WhatsApp की सुरक्षा पर मस्क और Telegram के CEO का बड़ा हमला, कहा इस ऐप को सिक्योर मानना बेवकूफी

WhatsApp की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं. अमेरिका में Meta के खिलाफ दायर मुकदमे के बाद Telegram के CEO पावेल ड्यूरोव और एलन मस्क ने ऐप की एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पर संदेह जताया है. वहीं Meta ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए यूजर्स की चैट पूरी तरह सुरक्षित होने का दावा किया है.

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दुनिया के सबसे पॉपुलर मैसेजिंग ऐप WhatsApp की प्राइवेसी और सुरक्षा को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है. अमेरिका में मेटा के खिलाफ दायर एक मुकदमे के बाद टेलीग्राम के फाउंडर और CEO पावेल ड्यूरोव और उद्योगपति एलन मस्क ने WhatsApp की एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी सुरक्षा को लेकर पोस्ट किया है.

Telegram के CEO पावेल ड्यूरोव का बयान

Telegram के CEO पावेल ड्यूरोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि टेलीग्राम ने पहले ही WhatsApp की एन्क्रिप्शन सिस्टम का एनालिसिस किया, जिसमें कई कमजोरियां सामने आई. उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि साल 2026 में भी WhatsApp को पूरी तरह सुरक्षित मानना खुद को धोखा देने जैसा है. ड्यूरोव का दावा है कि WhatsApp की सुरक्षा व्यवस्था उतनी मजबूत नहीं है, जितना कंपनी दावा करती है.

एलन मस्क ने भी WhatsApp की सुरक्षा पर संदेह जताया. उन्होंने कहा कि यह ऐप सुरक्षित नहीं है और लोगों को दूसरे विकल्पों पर ध्यान देना चाहिए. मस्क ने यह भी इशारा किया कि कई दूसरी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स की सुरक्षा पर भी सवाल उठते हैं और यूजर्स को सतर्क रहने की जरूरत है.

मुकदमे में क्या आरोप हैं?

दरअसल, यह विवाद ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के बाद सामने आया, जिसमें सैन फ्रांसिस्को स्थित एक अमेरिकी जिला न्यायालय में दायर मुकदमे का जिक्र किया गया है. इस मुकदमे में Meta Platforms पर आरोप लगाया गया है कि कंपनी WhatsApp के एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन को लेकर झूठा दावा करती है. मुकदमे के अनुसार, WhatsApp यह दावा करता है कि केवल भेजने वाला और यूजर्स ही संदेश पढ़ सकते हैं, जबकि वास्तव में Meta कथित तौर पर यूजर्स के संदेशों की सामग्री को स्टोर, विश्लेषण और एक्सेस कर सकता है.

Meta ने दी अपनी सफाई

हालांकि Meta ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है. कंपनी का कहना है कि WhatsApp में वर्षों से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन लागू है और उसके पास यूजर्स की चैट पढ़ने की कोई पहुंच नहीं है. WhatsApp प्रमुख विल कैथकार्ट ने स्पष्ट किया कि एन्क्रिप्शन कीज़ यूजर्स के फोन में रहती हैं, न कि कंपनी के सर्वर पर। उन्होंने इस मुकदमे को बेबुनियाद और केवल सुर्खियां बटोरने की कोशिश बताया.

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