नेशनल लेवल का शूटर निकला साइबर ठगी गिरोह का मददगार, 40 लाख की ठगी केस में गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस शूटर को एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया है. आरोप है कि वह ठगों के लिए ऐसे बैंक खाते जुटाता था, जिनका इस्तेमाल ठगी के पैसों को इधर उधर भेजने के लिए किया जाता था.
Cyber Crime: साइबर ठगी के मामलों में रोज नए नए खुलासे हो रहे हैं. इस बार मामला इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि पुलिस ने जिस व्यक्ति को पकड़ा है, वह कोई आम अपराधी नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर का निशानेबाज है, जिसने कई प्रतियोगिताओं में पदक जीते थे. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस शूटर को एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया है.
आरोप है कि वह ठगों के लिए ऐसे बैंक खाते जुटाता था, जिनका इस्तेमाल ठगी के पैसों को इधर उधर भेजने के लिए किया जाता था. पुलिस के मुताबिक इस गिरोह ने दिल्ली के एक व्यक्ति से करीब 40 लाख रुपये की ठगी की थी. जांच अभी जारी है और पुलिस दूसरे आरोपियों की तलाश कर रही है.
आगरा से पकड़ा गया आरोपी
The Pioneer की एक रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी की पहचान हिमांशु चौहान के रूप में हुई है. वह उत्तर प्रदेश के आगरा का रहने वाला है. क्राइम ब्रांच ने कई राज्यों में तकनीकी और वित्तीय निगरानी के बाद उसे पकड़ा. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हिमांशु ने राष्ट्रीय और राज्य स्तर की शूटिंग प्रतियोगिताओं में कई पदक जीते थे.
40 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी का मामला
यह मामला जून 2025 में दर्ज एक e FIR से जुड़ा है. शिकायतकर्ता ने बताया था कि उसे फर्जी ऑनलाइन गेमिंग, शेयर ट्रेडिंग और IPO निवेश के नाम पर बहकाया गया था. पीड़ित से IMPS, NEFT और UPI के जरिए 40.27 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए थे.
म्यूल अकाउंट के जरिए घूमाया गया पैसा
जांच में पता चला कि ठगी का पैसा कई बैंक खातों में भेजा गया. इनमें से एक खाते में एक ही दिन में 8 लाख रुपये जमा हुए थे. पुलिस ने कहा कि यह खाता म्यूल अकाउंट था, यानी किसी और के नाम पर खुलवाया गया खाता जिसका इस्तेमाल ठग करते हैं. नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर जांच करने पर इसी खाते से जुड़े करीब 40 मामले और बेंगलुरु व मुंबई में दो एफआईआर भी सामने आईं. इससे यह साफ हुआ कि गिरोह पूरे देश में सक्रिय था.
आरोपी की भूमिका क्या थी
पूछताछ में सामने आया कि हिमांशु इस पूरे नेटवर्क में अहम कड़ी था. वह लोगों को कमीशन देकर उनके बैंक खाते इस्तेमाल के लिए तैयार करता था. हर खाते के बदले उन्हें एक लाख रुपये तक देने का लालच दिया जाता था. इसके बाद वह इन खातों की जानकारी आगरा में बैठे अपने एक साथी को देता था, जो आगे पैसों को दूसरे खातों में भेजता था.
जांच अभी जारी
पुलिस अब उस साथी की तलाश कर रही है और गिरोह से जुड़े दूसरे लोगों की पहचान भी की जा रही है. साथ ही और म्यूल खातों का पता लगाने और पूरे पैसों के रास्ते को ट्रेस करने की कोशिश चल रही है. अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों को पकड़ा जाएगा.
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