डेटा शेयरिंग पर WhatsApp का सुप्रीम कोर्ट में बड़ा बयान, 16 मार्च तक CCI के निर्देशों का पालन करेगी मेटा
व्हाट्सऐप ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह 2021 की विवादित प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़े CCI के निर्देशों का 16 मार्च तक पूरी तरह पालन करेगा. यूजर्स को डेटा शेयरिंग से बाहर निकलने का विकल्प मिलेगा. यह मामला मेटा, CCI और NCLAT के बीच लंबे कानूनी विवाद से जुड़ा है.
व्हाट्सऐप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर चल रहा लंबा कानूनी विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के सामने आया है. इस मामले में व्हाट्सऐप ने शीर्ष अदालत को भरोसा दिलाया है कि वह यूजर्स के डेटा को अपनी पैरेंट कंपनी मेटा के साथ साझा करने से जुड़े कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) के निर्देशों का पूरी तरह पालन करेगा. कंपनी ने कहा है कि वह 16 मार्च तक सभी जरूरी बदलाव लागू कर देगी. इस बयान के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है, क्योंकि इसका सीधा असर करोड़ों यूजर्स की प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा पर पड़ता है.
सुप्रीम कोर्ट में व्हाट्सऐप का आश्वासन
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच, जिसमें चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली शामिल थे, के सामने व्हाट्सऐप की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि कंपनी नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के दिसंबर 2025 के आदेश के मुताबिक CCI के निर्देशों को लागू करेगी. एनसीएलएटी ने मेटा को तीन महीने के भीतर नियामक द्वारा तय किए गए सेफगार्ड्स लागू करने का निर्देश दिया था.
डेटा शेयरिंग पर क्या होंगे नए नियम
CCI और NCLAT के निर्देशों के मुताबिक, व्हाट्सऐप अब यूजर्स का डेटा नॉन-कोर सर्विसेज के लिए जबरन मेटा के साथ साझा नहीं कर सकेगा. इसके अलावा, कंपनी को यूजर्स को एक साफ और पारदर्शी ऑप्ट-आउट विकल्प देना होगा, जिससे वे किसी भी समय अपनी सहमति वापस ले सकें.
CCI का क्या है आरोप
CCI के वकील ने अदालत में कहा कि व्हाट्सऐप की डेटा शेयरिंग पॉलिसी के कई पहलू हैं और रेगुलेटर यह दिखाएगा कि कैसे कंपनी ने मेटा के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर डेटा को जोड़कर अपने बाजार में दबदबे का फायदा उठाया. कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें दर्ज कीं, व्हाट्सऐप को एक कंप्लायंस एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की सुनवाई आगे के लिए टाल दी.
2021 की पॉलिसी से शुरू हुआ विवाद
यह पूरा मामला व्हाट्सऐप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़ा है, जिसमें यूजर्स का फोन नंबर, डिवाइस की जानकारी और बिजनेस अकाउंट्स से बातचीत जैसे डेटा को मेटा कंपनियों के साथ साझा करने की अनुमति दी गई थी. आलोचकों ने इसे यूजर्स पर थोपी गई शर्त बताया था. इसके बाद CCI ने जांच शुरू की और नवंबर 2024 में मेटा और व्हाट्सऐप पर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया.
मेटा और व्हाट्सऐप ने CCI के आदेश को NCLAT में चुनौती दी. ट्रिब्यूनल ने जुर्माना और ज्यादातर निष्कर्षों को बरकरार रखा, लेकिन विज्ञापन के लिए डेटा शेयरिंग पर लगाए गए पांच साल के प्रतिबंध को हटा दिया. बाद में यह भी साफ किया गया कि विज्ञापन और गैर-विज्ञापन, दोनों तरह के डेटा शेयरिंग के लिए यूजर की सहमति जरूरी होगी. अब CCI और मेटा, दोनों ही इस फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं, जिससे यह मामला और अहम हो गया है.
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