टैरिफ केस में अगर ट्रंप को लगा झटका तो दूसरे देशों की चुप रहने में है भलाई, जानें एक्सपर्ट क्यों कह रहे हैं ऐसा
ट्रंप के टैरिफ मामले पर सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसले को लेकर ट्रेड एक्सपर्ट्स ने देशों को संयम बरतने की सलाह दी है. उनका कहना है कि टैरिफ रद्द होने पर भी अमेरिका वैकल्पिक रास्तों से दबाव बना सकता है, जिससे वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बनी रह सकती है.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ से जुड़े मामले पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसले को लेकर वैश्विक स्तर पर नजरें टिकी हुई हैं. ट्रेड एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर अदालत ट्रंप के खिलाफ फैसला सुनाती है और उनकी टैरिफ नीति को झटका लगता है तो दूसरे देशों को घबराने या आक्रामक प्रतिक्रिया देने के बजाय शांत और व्यावहारिक रुख अपनाना चाहिए. आइये जानते हैं कि कंपनियों को क्या सलाह दी गई है.
शांत रहना ही समझदारी होगी
लंदन स्थित कंसल्टिंग फर्म फ्लिंट ग्लोबल के पार्टनर और ट्रेड एंड मार्केट एक्सेस प्रैक्टिस के प्रमुख Sam Lowe ने ब्लूमबर्ग टीवी से बातचीत में कहा कि ट्रंप के व्यापक टैरिफ से प्रभावित देशों के लिए “शांत रहना” ही समझदारी होगी. उनके मुताबिक, “एक तरह से हालात को सामान्य रूप से ही आगे बढ़ने देना चाहिए .मुझे नहीं लगता कि कई सरकारें खुलकर आलोचना करेंगी या इस पर शोर मचाएंगी.”
सुप्रीम कोर्ट का फैसला वॉशिंगटन समयानुसार सुबह 10 बजे तक आ सकता है, हालांकि अंतिम राय आने में जून तक का वक्त भी लग सकता है. सट्टेबाजी बाजार ट्रंप की हार की संभावना जता रहे हैं, जबकि ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस का अनुमान है कि अदालत के 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत टैरिफ लगाने के अधिकार को खारिज करने की संभावना करीब 60 फीसदी है.
दूसरे कानूनी विकल्प
ब्लूमबर्ग के अनुसार, एक्सपर्ट्स का मानना है कि भले ही सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के मौजूदा अधिकारों को खत्म कर दे, लेकिन ट्रंप प्रशासन दूसरे कानूनी विकल्पों के जरिए इसी तरह का टैरिफ ढांचा फिर से खड़ा करने की कोशिश कर सकता है. ऐसे में अगर कोई देश अदालत के फैसले को आधार बनाकर पुराने ट्रेड एग्रीमेंट्स को दोबारा खोलने की कोशिश करता है, तो उस पर और सख्त अमेरिकी पेनल्टी लगने का खतरा बना रहेगा.
सैम के अनुसार, देशों की चिंता अभी भी कार, स्टील और भविष्य में फार्मास्यूटिकल्स पर संभावित टैरिफ को लेकर बनी रहेगी. इसी वजह से वे राष्ट्रपति को उकसाने से बचेंगे और मौजूदा डील्स पर सवाल नहीं उठाना चाहेंगे.
यूरोपीय संसद और नेता हो सकते हैं मुखर
सैम का कहना है कि अगर ट्रंप के टैरिफ का कानूनी आधार खत्म होता है, तो यूरोपीय संसद और नेता ज्यादा मुखर और आलोचनात्मक हो सकते हैं. इसके उलट, ब्रिटेन, जापान और दक्षिण कोरिया के ऐसा करने की संभावना कम है.
कंपनियों को भी सतर्क रहने की सलाह
ट्रेड एक्सपर्ट्स ने कंपनियों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है. कई कंपनियां टैरिफ रिफंड के लिए अमेरिकी सरकार पर मुकदमे कर चुकी हैं, लेकिन यह प्रक्रिया राजनीतिक दबाव और लंबी कानूनी जटिलताओं से भरी हो सकती है. कुल मिलाकर, अगर टैरिफ रद्द होते हैं तो बाजार में अनिश्चितता बढ़ेगी, हालांकि कुछ सेक्टर्स के लिए नए अवसर भी उभर सकते हैं.
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