ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से खोलने का किया ऐलान, कहा- सीजफायर की अवधि तक खुला रहेगा ये समुद्री रूट

यह घोषणा तब हुई, जब गुरुवार शाम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लेबनान और इजरायल के बीच 10 दिनों के संघर्ष-विराम का ऐलान किया. यह एक अहम कदम था, जिससे ईरान के साथ तनाव कम हुआ.

ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से खोलने का ऐलान किया. Image Credit: tv9 bharatvarsh

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार 17 अप्रैल को ऐलान किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) युद्धविराम की बाकी अवधि के लिए ‘पूरी तरह से खुला’ रहेगा.

अराघची ने X पर पोस्ट किया, ‘लेबनान में युद्धविराम के अनुरूप, होर्मुज जलडमरूमध्य से सभी वाणिज्यिक जहाजों के गुजरने का रास्ता, युद्धविराम की बाकी अवधि के लिए पूरी तरह से खुला घोषित किया जाता है.’ उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों का गुजरना ‘उसी समन्वित मार्ग पर होगा, जिसकी घोषणा ईरान के बंदरगाहों और समुद्री संगठन द्वारा पहले ही की जा चुकी है.’

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि वह लेबनान और इजरायल के बीच तय हुई 10-दिन की उस युद्धविराम संधि की बात कर रहे थे, जो आधी रात से लागू हुई थी, या फिर ईरान और अमेरिका के बीच हुई दो हफ्ते की उस पिछली संधि की, जो 8 अप्रैल को शुरू हुई थी.

ट्रंप ने पुष्टि की

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात की भी पुष्टि की कि यह जलडमरूमध्य ‘पूरी तरह से खुला है और पूरी तरह से आवाजाही के लिए तैयार है.’ हालांकि, उन्होंने कहा कि अमेरिकी नाकाबंदी ‘पूरी ताकत और प्रभाव के साथ जारी रहेगी, लेकिन यह केवल ईरान पर लागू होगी.’

ट्रंप ने कहा क यह प्रक्रिया बहुत तेजी से आगे बढ़नी चाहिए, क्योंकि ज्यादातर मुद्दों पर पहले ही बातचीत हो चुकी है.

यह तुरंत साफ नहीं हो पाया कि जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नाकेबंदी के लिए इसका क्या मतलब था. अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का पहला दौर बिना किसी नतीजे या समझौते के खत्म होने के बाद ट्रंप ने होर्मुज की नाकेबंदी की घोषणा की थी.

तेल की कीमतों में गिरावट

इस खबर के बाद तेल की कीमतें 10 फीसदी से ज्यादा गिरकर $90 प्रति बैरल से नीचे आ गईं. युद्ध से पहले, दुनिया की कच्चे तेल की सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता था. इस समुद्री रास्ते के बंद होने से, जो फारसी खाड़ी को दुनिया के ऊर्जा बाजारों से जोड़ता है, तेल की सप्लाई में अब तक की सबसे बड़ी रुकावट पैदा हो गई है.

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