ईरान का बड़ा हमला! UAE के गैस प्लांट और कुवैत रिफाइनरी पर वार, गहराया वैश्विक ऊर्जा संकट
ईरान ने UAE के एक गैस प्लांट और कुवैत की रिफाइनरी को निशाना बनाया, जिससे काफी नुकसान हुआ. इसके चलते उसे बंद करना पड़ा. हमलों से तेल, गैस और पानी (डीसैलिनेशन प्लांट) की सप्लाई प्रभावित हुई, जिससे क्षेत्र में ऊर्जा और जल संकट गहरा गया है.
Tehran Hits Gas Plant: पश्चिम एशिया में जारी जंग अब ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर सीधा असर डालने लगा है, जिससे वैश्विक तेल और गैस सप्लाई पर खतरा मंडराने लगा है. हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत के अहम ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है.
ईरान की ओर से अबू धाबी में स्थित हबशन गैस फैसिलिटी (Habshan Gas Facility) UAE का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस प्रोसेसिंग केंद्र है, इस पर हमला किया गया. जिसके चलते इसे बंद करना पड़ा. अधिकारियों के मुताबिक हमले को हवा में ही इंटरसेप्ट कर लिया गया था, लेकिन उसके मलबे के गिरने से प्लांट में आग लग गई. यह प्लांट देश के गैस उत्पादन, प्रोसेसिंग और घरेलू सप्लाई का मुख्य केंद्र है, इसलिए इसका बंद होना UAE के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.
वहीं कुवैत में भी हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं. मीना अल अहमदी रिफाइनरी (Mina Al Ahmadi Refinery) जो देश की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरियों में से एक है इस पर हमले के बाद वहां आग लग गई. इससे कई ऑपरेशनल यूनिट्स को बंद करना पड़ा. इस रिफाइनरी की क्षमता लाखों बैरल प्रतिदिन है, ऐसे में इसका प्रभावित होना वैश्विक तेल सप्लाई को भी प्रभावित कर सकता है.
तेल के अलावा पानी पर भी खतरा
तनाव का असार सिर्फ तेल ही नहीं, पानी की सप्लाई भी खतरे में आ गई है. दरअसल कुवैत के एक बड़े डीसैलिनेशन प्लांट पर भी हमला हुआ है, जिससे उसके कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा है. कुवैत में लगभग 90% पीने का पानी समुद्री पानी को शुद्ध करके तैयार किया जाता है, ऐसे में इस प्लांट पर हमला देश के लिए गंभीर जल संकट पैदा कर सकता है.
निशाने पर ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर
इन हमलों के पीछे क्षेत्रीय तनाव और युद्ध की स्थिति को जिम्मेदार माना जा रहा है. ईरान की ओर से पहले ही चेतावनी दी जा चुकी थी कि वह ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकता है. अब लगातार हो रहे हमलों ने इस खतरे को वास्तविक बना दिया है. इसका असर वैश्विक बाजारों पर भी साफ दिखाई दे रहा है. कई रिफाइनरियों, LNG प्लांट्स और पेट्रोकेमिकल यूनिट्स के प्रभावित होने से उत्पादन घटा है, जिससे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है. आने वाले दिनों में इस संकट का असर दुनिया भर के बाजारों और आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है.
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