ट्रंप की पुतिन को चेतावनी, 50 दिन में नहीं रुका युद्ध तो लगेंगे 100% टैरिफ, भारत-चीन पर भी पड़ेगा असर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस को 50 दिनों के भीतर यूक्रेन के साथ युद्धविराम समझौता ना करने पर 100 फीसदी टैरिफ की धमकी देते हुए उन देशों को भी निशाने पर लिया है जो रूस से कच्चा तेल आयात करते हैं. इस सूची में भारत और चीन भी शामिल है. साथ ही, ट्रंप ने यूरोपीय देशों को अमेरिका से हथियार खरीदकर यूक्रेन के देने की बात कही है.

Trump vs Putin Image Credit: Getty, Canva

Trump Threatens Russia: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस को फिर एक बार धमकी दी है. ट्रंप का कहना है कि यदि अगले 50 दिनों के भीतर रूस, यूक्रेन के साथ युद्धविराम संधि पर सहमत नहीं करता है, तो उस पर 100 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा. ट्रंप की यह चेतावनी केवल रूस तक सीमित नहीं है, बल्कि उन देशों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाव डालेगी जो रूस से कच्चा तेल आयात करते हैं. इसमें भारत और चीन दो प्रमुख देश हैं.

50 दिन की मोहलत फिर लगेंगे 100 फीसदी टैरिफ

ट्रम्प ने सोमवार को व्हाइट हाउस में नाटो महासचिव मार्क रूट के साथ बैठक के दौरान कहा, “यदि वे 50 दिनों में समझौता नहीं कर पाते हैं तो हम बहुत कठोर टैरिफ लगाएंगे, टैरिफ लगभग 100 फीसदी होगा.” ट्रम्प ने बिना कोई जानकारी दिए कहा कि ये शुल्क सेकेंडरी टैरिफ के रूप में लगाए जाएंगे. इसका मतलब है कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भी प्रतिबंध लगेगा.

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अमेरिका से हथियार खरीदकर यूक्रेन को देगा यूरोप

ट्रंप ने यूक्रेन को हथियार देने का भी ऐलान किया है. उन्होंने बताया कि उनकी प्लानिंग के अनुसार यूरोपीय देश अमेरिका से हथियार खरीदकर यूक्रेन को देंगे. इसमें पैट्रियट मिसाइल सिस्टम, शॉर्ट-रेंज मिसाइलें, हॉवित्जर गोले और मिडिल रेंज की एयर-टु-एयर मिसाइलें दी जा सकती है. ट्रम्प ने कहा कि पुतिन ने क्लिंटन, बुश, ओबामा, बाइडेन को मूर्ख बनाया. मुझे बेवकूफ नहीं बना सकते. अब एक्शन लेना जरूरी है. पुतिन पर नाराजगी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे लगा कि हमने चार बार शांति समझौता कर लिया था, लेकिन युद्ध चलता रह. मैं युद्ध के लिए जिम्मेदार नहीं हूं, लेकिन अब मैं युद्ध खत्म करने के लिए काम कर रहा हूं.

भारत पर क्या होगा असर?

ट्रंप के सेकेंडरी टैरिफ का असर उन देशों पर भी पड़ेगा जो रूस से कच्चा तेल आयात करते हैं क्योंकि अमेरिका और रूस के बीच बहुत कम व्यापार है. इससे रूस की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है. भारत अपनी कच्चे तेल की 85 फीसदी से अधिक जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है.

फरवरी 2022 में मास्को के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद, वेस्टर्न सेक्शन ने रूसी उत्पादकों को भारी छूट देने के लिए मजबूर किया, जिससे भारतीय रिफाइनर ने रूस से कच्चे तेल खरीदना शुरू किया. भारत, रूस से अपनी कुल जरूरतों का 40 फीसदी तेल आयात करता है. ग्लोबल कमोडिटी ट्रैकिंग फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने पिछले महीने 2.08 मिलियन बैरल प्रतिदिन (BPD) रूसी कच्चे तेल का आयात किया, जो जुलाई 2024 के बाद से सबसे अधिक है.

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