देश में 13 फीसदी कम हो गया चीनी का उत्पादन, UP में इतना लाख टन गिरा प्रोडक्शन
इथेनॉल के लिए डायवर्जन को छोड़कर, औसत चीनी रिकवरी अब तक 8.82 प्रतिशत पर कम रही, जो एक साल पहले की अवधि में 9.42 प्रतिशत थी. एनएफसीएसएफएल ने 2024-25 के लिए कुल उत्पादन 270 लाख टन रहने का अनुमान लगाया है, जो पिछले वर्ष के 319 लाख टन से कम है.
चीनी सहकारी संस्था एनएफसीएसएफएल ने बुधवार को कहा कि चालू विपणन सत्र 2024-25 में भारत का चीनी उत्पादन 13.62 प्रतिशत घटकर 130.55 लाख टन रह गया. एक साल पहले चीनी उत्पादन 151.20 लाख टन था. नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफएल) के अनुसार, शीर्ष तीन उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में चीनी उत्पादन में 15 जनवरी तक गिरावट देखी गई. चीनी विपणन सत्र अक्टूबर से सितंबर तक चलता है.
पीटीआई के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में चीनी उत्पादन 46.10 लाख टन से घटकर 42.85 लाख टन रह गया, जबकि महाराष्ट्र में यह 52.80 लाख टन से घटकर 43.05 लाख टन रह गया. कर्नाटक में उत्पादन चालू विपणन सत्र के 15 जनवरी तक एक साल पहले के 31 लाख टन से घटकर 27.10 लाख टन रह गया. इथेनॉल के लिए डायवर्जन को छोड़कर, औसत चीनी रिकवरी अब तक 8.82 प्रतिशत पर कम रही, जो एक साल पहले की अवधि में 9.42 प्रतिशत थी. एनएफसीएसएफएल ने 2024-25 के लिए कुल उत्पादन 270 लाख टन रहने का अनुमान लगाया है, जो पिछले वर्ष के 319 लाख टन से कम है.
केंद्रीय मंत्री ने की बैठक
वहीं, केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बुधवार को 2025-26 रबी मार्केटिंग सीजन में खाद्यान्न खरीद की तैयारियों की समीक्षा के लिए पांच प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों के खाद्य मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक की. इसमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, गुजरात और राजस्थान के मंत्रियों ने भाग लिया. इस बैठक में केंद्रीय पूल में पर्याप्त योगदान सुनिश्चित करने के लिए खरीद तंत्र को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया. बैठक के दौरान जोशी ने कहा कि इन पांच राज्यों में गेहूं खरीद की काफी संभावनाएं हैं और ये राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और मूल्य नियंत्रण उपायों के लिए महत्वपूर्ण हैं.
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इन मुद्दों पर हुई चर्चा
मंत्री ने जिलेवार लक्ष्य निर्धारित करने, दूरदराज के क्षेत्रों में खरीद केंद्रों का विस्तार करने, किसानों को समय पर एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) भुगतान सुनिश्चित करने और स्टॉक गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने सहित कई प्रमुख कार्य बिंदुओं को रेखांकित किया. राज्यों से परिवहन लागत को अनुकूलित करने और पर्याप्त केंद्रीय पूल स्टॉक बनाए रखने के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत कम से कम आवश्यक मात्रा में खरीद करने का आग्रह किया गया.
दिए ये सुझाव
राज्य के खाद्य मंत्रियों ने आगामी सीजन के दौरान गेहूं खरीद बढ़ाने के लिए सुझाए गए उपायों को लागू करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता का आश्वासन दिया. बैठक में खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव, राज्य खाद्य सचिव और भारतीय खाद्य निगम के सीएमडी भी शामिल हुए. गेहूं की बुआई लगभग समाप्त होने वाली है और कटाई अप्रैल से शुरू होगी.
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