तापमान बढ़ने से गेहूं पर मडराने लगा नया खतरा, फसल की आधी रह गई ऊंचाई; पैदावार में गिरावट की संभावना
Temperature Effect: अचानक तापमान में बढ़ोतरी होने से गेहूं की फसल पर असर पड़ने लगा है. एक्सपर्ट का कहना है कि अगर तापमान में बढ़ोतरी इसी तरह से जारी रही, तो उत्पादन में गिरावट आ सकती है. ऐसे उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा गर्मी का असर देखने को मिल रहा है.
Wheat Production: पिछले कुछ दिनों से दिन के समय तापमान में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. इससे देश के सबसे बड़े गेहूं उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में गेहूं की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का खतरा मडरा रहा है. राज्य कृषि विभाग के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश में कृषि भूमि के बड़े हिस्से में सामान्य से अधिक गर्मी का असर देखा जा रहा है. इससे गेहूं की फसल का आकार सामान्य ऊंचाई से लगभग आधा (लगभग 70-80 सेमी) रह गया है.
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक संजय सिंह ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में न्यूनतम तापमान भी 15 डिग्री सेल्सियस के बेंचमार्क को पार कर गया है. अगर आने वाले दिनों में तापमान में बढ़ोतरी इसी तरह से जारी रही, तो गेहूं की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. सिंह ने कहा कि फसल को ठीक होने के लिए अगले 10-15 दिनों तक न्यूनतम तापमान 15 डिग्री से नीचे रहना जरूरी है. नहीं तो उत्पादन में काफी गिरावट आएगी.
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गेहूं उत्पादन में गिरावट की संभावना
एक्सपर्ट के अनुसार, विशेष रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रति हेक्टेयर दो से तीन क्विंटल गेहूं उत्पादन में गिरावट आने की संभावना है. सिंह ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थिति उतनी चिंताजनक नहीं है, जहां तापमान सामान्य सीमा के भीतर ही बना हुआ है.
उपज हो सकती है प्रभावित
विशेषज्ञों ने कहा कि उच्च तापमान मुख्य रूप से प्रकाश संश्लेषण को कम करके, अनाज के भरने की प्रक्रिया को बाधित करते हैं. इससे गेहूं की वृद्धि और उपज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. उन्होंने कहा कि तापमान में मामूली वृद्धि भी उपज को नुकसान पहुंचा सकती है.
गेहूं उत्पादन में यूपी की हिस्सेदारी
2024-2025 रबी सीजन के लिए, यूपी में 32.25 मिलियन टन गेहूं का उत्पादन होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4.7 फीसदी की वृद्धि दर्शाता है. ऐसे उत्तर प्रदेश में गेहूं की खेती का रकबा लगभग 9.6 मिलियन हेक्टेयर है. यह राज्य भारत के कुल गेहूं उत्पादन में 25 फीसदी से अधिक का योगदान देता है.
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