दिल्ली-NCR में 2040 से नहीं चलेंगी BS-6 डीजल-पेट्रोल बाइक और कारें! BS-4 वाहनों के लिए अगले 5 साल का टाइमलाइन

दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण कम करने के लिए सीएक्यूएम की एक्सपर्ट कमिटी ने सख्त रोडमैप सुझाया है. प्रस्ताव के तहत BS वन टू और थ्री वाहनों को तुरंत हटाने और BS फोर को पांच साल में फेज आउट करने की बात है. BS सिक्स टू व्हीलर 2035 और कारें 2040 तक हट सकती हैं.

BS-6 कारें 2040 तक हट सकती हैं.

BS vehicles Ban: दिल्ली एनसीआर में बढ़ते एयर पॉल्यूशन को देखते हुए वाहनों को लेकर बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है. एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन की एक एक्सपर्ट कमेटी ने इसके लिए रोडमैप तैयार किया है. इस रोडमैप का मकसद प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों को धीरे- धीरे सड़कों से हटाना है. कमेटी का कहना है कि प्रदूषण अब गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है. खासकर बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर तेजी से बढ़ रहा है.

पुराने BS वाहन तुरंत बाहर होंगे

ड्राफ्ट प्रस्ताव के मुताबिक BS-1, BS- 2 और BS 3 वाहनों को तुरंत सड़कों से हटाने की सिफारिश की गई है. इसके अलावा BS-4 वाहनों को अगले 5 साल में स्टेपवाइज तरीके से हटाया जाएगा. समिति का मानना है कि पुराने पेट्रोल और डीजल वाहन हवा को सबसे ज्यादा प्रदूषित कर रहे हैं. इन्हें हटाए बिना वायु क्वालिटी में सुधार संभव नहीं है.

BS-6 वाहनों के लिए भी डेडलाइन

कमेटी ने BS-6 वाहनों को भी लंबे समय तक चलने की छूट देने के पक्ष में नहीं है. प्रस्ताव में कहा गया है कि BS-6 टू व्हीलर को 2035 तक और कारों को 2040 तक स्टेपवाइज तरीके से हटाया जाना चाहिए. हालांकि इसके लिए 10 से 15 साल का ट्रांजिशन पीरियड देने की बात कही गई है ताकि हाल में वाहन खरीदने वाले लोगों को नुकसान न हो.

कमर्शियल वाहनों पर ज्यादा फोकस

रिपोर्ट में कहा गया है कि कमर्शियल वाहन ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं. इसलिए अप्रैल 2027 के बाद रजिस्टर होने वाले सभी कमर्शियल टू व्हीलर और टैक्सी 0 टेलपाइप एमिशन वाहन होने चाहिए. इसी तरह अप्रैल 2028 के बाद पिकअप वैन और मिनी ट्रक जैसे हल्के मालवाहक वाहनों को भी इलेक्ट्रिक या हाइड्रोजन आधारित होना होगा.

2030 से सिर्फ इलेक्ट्रिक कार का सुझाव

ड्राफ्ट रोडमैप में 2030 से केवल इलेक्ट्रिक कारों के रजिस्ट्रेशन का सुझाव दिया गया है. कमेटी का मानना है कि पेट्रोल और डीजल कारों की बिक्री को हतोत्साहित करना जरूरी है. इसके लिए कार मैन्युफैक्चरर को भी 0 एमिशन वाहनों की बिक्री बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाएगा.

चार्जिंग सुविधा और सब्सिडी पर जोर

एक्सपर्ट कमेटी ने घर और ऑफिसों में चार्जिंग सुविधा तय करने के लिए राइट टू चार्ज जैसे कानूनी स्ट्रक्चर की जरूरत बताई है. साथ ही ग्रीन कार को बढ़ावा देने के लिए सभी कैटेगरी के वाहन मालिकों को सब्सिडी देने की सिफारिश की गई है. इससे लोग इलेक्ट्रिक और क्लीन व्हीकल की ओर तेजी से बढ़ सकेंगे.

ये भी पढ़ें- Bharat Taxi के ड्राइवर को 10 लाख की सेफ्टी! कमीशन की चिक-चिक नहीं, जानें क्या-क्या मिलेंगे फायदे

पॉल्यूशन कंट्रोल सिस्टम होगी मजबूत

रिपोर्ट में पॉल्यूशन कंट्रोल सर्टिफिकेट सिस्टम को और सख्त बनाने की जरूरत बताई गई है. एनसीआर में रिमोट सेंसिंग डिवाइस से सड़क पर चलते वाहनों के इमिशन की जांच का पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है. हालांकि भीड़भाड़ वाली सड़कों पर किसी एक वाहन के प्रदूषण को मापना बड़ी चुनौती माना जा रहा है.