Budget 2026: फूड प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा निवेश करेगी सरकार, PMFME और PMKSY के लिए 28 हजार करोड़ होंगे अलॉट
केंद्र अगले Budget 2026 में PMFME और PMKSY योजनाओं के लिए लगभग ₹28,000 करोड़ का प्रस्तावित निवेश कर रहा है. इसका उद्देश्य माइक्रो फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स, SHGs और FPOs को वित्तीय, तकनीकी और मार्केटिंग सपोर्ट देना है. किसानों के लिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कोल्ड चेन और एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टर तैयार किए जाएंगे.
Food Processing Infrastructure: केंद्र सरकार अगले बजट में किसानों और माइक्रो फूड प्रोसेसिंग सेक्टर के लिए बड़ी योजना पेश करने की तैयारी में है. रिपोर्ट के मुताबिक प्रस्तावित योजना के तहत अगले पांच साल में लगभग ₹28,000 करोड़ का निवेश किया जा सकता है. इसका मकसद न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाना है बल्कि पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान घटाना, वैल्यू एडिशन बढ़ाना और छोटे उद्योगों को मजबूती देना है. योजना में दो प्रमुख स्कीमें शामिल हैं PMFME और PMKSY.
PMFME: माइक्रो फूड यूनिट्स को नया जीवन
मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री फॉर्मलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज (PMFME) स्कीम के तहत माइक्रो फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स, SHGs और FPOs को क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी, टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन और ब्रांडिंग एवं मार्केटिंग सपोर्ट मिलेगा. योजना का लक्ष्य 200,000 माइक्रो एंटरप्राइजेज को लाभ पहुंचाना है.
PMKSY: किसानों के लिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर
प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY) का फोकस किसानों के लिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है. इसमें कोल्ड चेन नेटवर्क, एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टर और फूड टेस्टिंग लैब शामिल हैं. इससे किसानों को बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी और फसल का कीमत भी बढ़ेगी.
प्रस्तावित बजट और निवेश
मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार PMFME के लिए ₹15,000 करोड़ और PMKSY के लिए ₹13,000 करोड़ की नई आवंटन पर विचार कर रही है. इस निवेश से योजना के विस्तार, प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और ग्रामीण रोजगार में बढ़ोतरी होगी. FY27 के बजट में इसका ऐलान 1 फरवरी को हो सकता है.
| कैटेगरी | आंकड़ा |
|---|---|
| कुल प्रस्तावित निवेश | ₹28,000 करोड़ (अगले 5 साल में) |
| PMFME आवंटन | ₹15,000 करोड़ |
| PMKSY आवंटन | ₹13,000 करोड़ |
| PMFME FY2020-25 कुल आउटले | ₹10,000 करोड़ |
| PMKSY FY2016-20 कुल आउटले | ₹6,000 करोड़ |
| PMKSY FY21-26 विस्तारित आवंटन | ₹6,520 करोड़ |
| PMFME के तहत लक्षित माइक्रो एंटरप्राइजेज | 2,00,000 |
| PMFME के तहत पहले लाभान्वित यूनिट्स | 1,72,000 |
| PMFME प्रोजेक्ट की कुल लागत | ₹16,000 करोड़ |
| MSME नई निवेश सीमा (माइक्रो) | ₹2.5 करोड़ |
| MSME नई टर्नओवर सीमा (माइक्रो) | ₹10 करोड़ |
| MSME नई निवेश सीमा (स्माल) | ₹25 करोड़ |
| MSME नई टर्नओवर सीमा (स्माल) | ₹100 करोड़ |
| MSME नई निवेश सीमा (मीडियम) | ₹125 करोड़ |
| MSME नई टर्नओवर सीमा (मीडियम) | ₹500 करोड़ |
| PMFME केंद्र-राज्य खर्च अनुपात | 60:40 |
| उत्तर-पूर्व और हिमालयी राज्यों में केंद्र का योगदान | 90% |
| क्रेडिट लिंक्ड ग्रांट यूनिट अपग्रेडेशन पर | 35% तक |
| मार्केटिंग और ब्रांडिंग सहायता | 50% तक |
| कृषि और संबद्ध क्षेत्र GDP में योगदान | 18% |
| कृषि पर निर्भर भारतीय वर्कफोर्स | 46% |
MSME नियमों में बदलाव
1 अप्रैल 2025 से MSME के नए नियम लागू हो गए हैं. माइक्रो एंटरप्राइजेज की इन्वेस्टमेंट सीमा अब ₹2.5 करोड़ और टर्नओवर ₹10 करोड़ तक हो गई है. छोटे और मीडियम एंटरप्राइजेज के लिए भी निवेश और टर्नओवर की लिमिट बढ़ाई गई है. इससे अधिक बिजनेस अब MSME के दायरे में आएंगे.
वित्तीय सहायता और सब्सिडी
PMFME के तहत केंद्र और राज्य सरकार 60:40 के अनुपात में खर्च साझा करेंगे. उत्तर-पूर्व और हिमालयी राज्यों में केंद्र का योगदान 90% है. स्कीम के तहत क्रेडिट लिंक्ड ग्रांट के माध्यम से यूनिट अपग्रेडेशन, कैपिटल खर्च और कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 35% तक खर्च की सहायता मिलेगी. मार्केटिंग और ब्रांडिंग पर 50% तक खर्च की मदद दी जाएगी.
पहले से लाभान्वित यूनिट्स
31 दिसंबर 2025 तक PMFME के तहत 172,000 से अधिक माइक्रो फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स को मंजूरी मिल चुकी है. इसमें व्यक्तिगत लाभार्थी, FPOs, SHGs और प्रोड्यूसर कोऑपरेटिव सोसाइटी शामिल हैं. इन प्रोजेक्ट्स की कुल लागत ₹16,000 करोड़ रही है.
किसानों के लिए फोकस
जानकारों का मानना है कि हाई बजट और सब्सिडी के साथ-साथ फसल के लिए बेहतर मार्केट लिंक और डिजिटल प्लेटफॉर्म जरूरी हैं. जब तक किसानों को संगठित खरीदारों और प्रोसेसर से जोड़ा नहीं जाएगा, निवेश का पूरा फायदा नहीं मिल पाएगा.
क्यों महत्वपूर्ण है यह निवेश
एग्रीकल्चर और इससे जुडे़ सेक्टर भारत के GDP में 18% योगदान देते हैं और लगभग 46% भारतीय वर्कफोस एग्रीकल्चर पर निर्भर है. इन योजनाओं के जरिए किसानों की आमदनी बढ़ेगी, ग्रामीण रोजगार सृजित होंगे और पोस्ट-हार्वेस्ट लॉस कम होगा.
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