मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर फोकस करेगी सरकार, कैपिटल और निवेश बढ़ाने पर होगा जोर; इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स में होगा सुधार

इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के अनुसार भारत की लॉन्ग टर्म आर्थिक ग्रोथ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मजबूती पर निर्भर करेगी. देश में कैपिटल की ऊंची लागत के कारण प्राइवेट निवेश प्रभावित हो रहा है. इससे निपटने के लिए घरेलू बचत बढ़ाने, मैन्युफैक्चरिंग को ज्यादा कंपटीटिव बनाने, कंपनियों का स्केल बढ़ाने पर फोकस की जरूरत बताई गई है.

Manufacturing Sector: इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में सरकार ने कुछ बड़े संकेत दिए है. सरकार ने बताया है कि देश की लंबी अवधि की आर्थिक ग्रोथ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मजबूती पर निर्भर करेगी. सर्वे के मुताबिक देश में कैपिटल की लागत ज्यादा होने से प्राइवेट निवेश प्रभावित हो रहा है. इस चुनौती से निपटने के लिए घरेलू बचत बढ़ाने और मैन्युफैक्चरिंग को ज्यादा कंपटेटिव बनाने पर जोर दिया गया है.

क्यों अहम है मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर

सर्वे के अनुसार भारत में कैपिटल की लागत विकसित देशों की तुलना में काफी ज्यादा है. इसका सीधा असर प्राइवेट निवेश और रोजगार पर पड़ता है. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अगर मजबूत होता है तो प्रोडक्शन बढे़गा, कंपनियों की कमाई सुधरेगी और निवेश के नए रास्ते खुलेंगे.

देशऔसत लॉन्ग टर्म ब्याज दर प्रतिशत
भारत7.6
कनाडा3.1
इटली2.9
स्विट्जरलैंड1.0
इंडोनेशिया14.1
मेक्सिको11.05
साउथ अफ्रीका9.08

कंपनियों का स्केल बढ़ाने पर जोर

इकोनॉमिक सर्वे कहता है कि भारतीय मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को छोटे स्तर से निकलकर बडे़ स्तर पर काम करना होगा. बड़ी कंपनियां ज्यादा स्कील होती हैं और उन्हें फंडिंग भी सस्ती मिलती है. इसके लिए पॉलिसी सपोर्ट और नियमों को आसान बनाना जरूरी बताया गया है.

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डिरेगुलेशन और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस

सर्वे में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए गैर जरूरी नियमों को कम करने की सलाह दी गई है. डिरेगुलेशन से लागत घटेगी और इंडस्ट्रीज को फैसले लेने में आसानी होगी. इससे घरेलू और विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा.

इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स सुधार की जरूरत

बेहतर सड़कें, पोर्ट, रेलवे और सप्लाई चेन मैन्युफैक्चरिंग की रीढ मानी गई हैं. सर्वे के मुताबिक लॉजिस्टिक्स और ट्रेड फैसिलिटेशन में सुधार से भारतीय उत्पाद ग्लोबल मार्केट में ज्यादा कंपटीशन बनेंगे.

टेक्नोलॉजी और R&D पर फोकस

इकोनॉमिक सर्वे में हाई टेक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की जरूरत बताई गई है. रिसर्च एंड डेवलपमेंट और नई तकनीकों से उत्पादकता बढ़ेगी और कंपनियों के मुनाफे में सुधार होगा. सर्वे के मुताबिक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग से निर्यात बढ़ेगा और विदेशी बचत पर निर्भरता कम होगी. इससे करेंसी पर दबाव घटेगा और समय के साथ कैपिटल की लागत भी कम होगी.

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