पंजाब के इस शहर का दुनिया में डंका, अमेरिका है बड़ा खरीदार, लेकिन ट्रंप टैरिफ से बड़ा झटका, अब बजट से उम्मीद
पंजाब का लुधियाना शहर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया को सर्दियों से बचाने वाले ऊनी कपड़ों का बड़ा केंद्र है. यहां बनने वाले स्वेटर और जैकेट अमेरिका और यूरोप तक पहुंचते हैं. लेकिन अमेरिकी टैरिफ ने इस उद्योग को संकट में डाल दिया है, जिससे कारोबारियों की नजर अब आने वाले बजट पर टिकी है.
Budget 2026 Expectation of Ludhiana Knitwear Industry : क्या आप जानते हैं कि पंजाब का एक शहर पूरी दुनिया को सर्दियों से बचाने का काम करता है? जी हां, लुधियाना ऊनी कपड़ों का ऐसा हब है जहां से बनने वाले स्वेटर और जैकेट न सिर्फ भारत भर में बिकते हैं, बल्कि यूरोप तक पहुंचते हैं. लेकिन अब अमेरिकी टैरिफ की मार से यह उद्योग मुश्किल में है. इस शहर का कारोबार और कारोबारी को 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट से उम्मीद है.
ऊनी निटवियर उद्योग की चमक
लुधियाना ऊनी कपड़ों के कारोबार के लिए मशहूर है. यहां मुख्य रूप से ऊनी और होजरी उत्पाद बनते हैं, जिसकी वजह से इसे भारत का ‘मैनचेस्टर’ कहा जाता है. भारत और सोवियत संघ के पुराने समझौते से यहां की कंपनियां रूस को ऊनी कपड़े बेचती थीं. अब यह उद्योग सर्दियों के जैकेट तक फैल चुका है. 2000 के दशक में घरेलू बाजार की मांग बढ़ने से निर्यात कम हो गया, लेकिन लुधियाना अभी भी सर्दियों के कपड़ों पर लगभग एकाधिकार रखता है. यहां भारत के 95 प्रतिशत ऊनी और ऐक्रेलिक निटवियर बनते हैं.
होजरी कारोबारी तरुण जैन बाबा ने कहा कि देश भर में ज्यादातर होजरी यहीं से सप्लाई की जाती है. यहां पर सबसे बड़े क्लस्टर यूनिट हैं, जहां पर हर तरीके के कपड़े बनाए जाते हैं. उन्होंने बताया कि लुधियाना में ऊनी शर्ट, टोपियां, दस्ताने, जैकेट बेहद कम दामों में और अच्छी क्वालिटी में मिलती है और यहां से जम्मू कश्मीर. हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश सहित बिहार से आर्डर आते हैं.
ऊनी कपड़े कैसे बनते हैं और क्या-क्या मिलता है
ये कपड़े मुख्य रूप से ऊन और मिश्रित धागों से तैयार होते हैं. उत्पादों में ऊनी शर्ट, पुलओवर, कार्डिगन, टोपी, जूते, स्टॉकिंग्स, ट्राउजर, ड्रॉअर, मफलर, दस्ताने, बालाक्लावा कैप और जैकेट शामिल हैं. यहां से 30 प्रतिशत उत्पाद विदेश भेजे जाते हैं. इसका अधिकांश हिस्सा अमेरिका जाता है. जबकि 70 प्रतिशत पूरे भारत में सप्लाई होते हैं. यूरोपीय देशों में भी इनकी अच्छी डिमांड है. लुधियाना होजरी का गढ़ है. यहां से देश भर में ज्यादातर होजरी सामान सप्लाई होता है. बड़े क्लस्टर यूनिट्स में हर तरह के कपड़े बनते हैं.
अमेरिकी टैरिफ से बड़ा नुकसान
अमेरिका के टैरिफ वॉर का सबसे ज्यादा असर पंजाब के कपड़ा उद्योग पर पड़ रहा है. लुधियाना के होजरी कारोबार पर खासतौर से. यहां के उद्योगपतियों का अनुमान है कि कपड़ा उद्योग को 8 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है. वहीं, कृषि उपकरण बनाने वाली इंडस्ट्री को सबसे कम 200 करोड़ का घाटा होने की उम्मीद है.
क्या है सरकार और बजट से उम्मीद?
लुधियाना के कपड़ा और होजरी उद्योगपति अमेरिकी टैरिफ के संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार से कई महत्वपूर्ण मांगें कर रहे हैं. सरकार अमेरिका के साथ डील पर काम कर रही है, लेकिन उद्योग को वैकल्पिक रास्ते भी ढूंढने होंगे. इसलिए सरकार को जल्द से जल्द भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लागू करना चाहिए और यूरोपीय संघ (EU) के साथ समझौते को तेजी से पूरा करना चाहिए. इससे निर्यातकों को नए बाजार मिलेंगे और अमेरिकी टैरिफ की मार से राहत मिलेगी. कारोबारियों को बजट से यही उम्मीद है कि टैरिफ और ड्रेल से निपटने के लिए उन्हें कोई विकल्प तलाशने होंगे.
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