AI स्टार्टअप्स की बढ़ती चमक के बीच एनर्जी सेक्टर की फंडिंग घट रही, क्या धीमा पड़ जाएगा क्लीन एनर्जी इनोवेशन?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच ऊर्जा सेक्टर के सामने नई चुनौती खड़ी हो रही है. IEA की रिपोर्ट के मुताबिक AI स्टार्टअप्स में बढ़ते निवेश के कारण ऊर्जा तकनीक और रिसर्च से जुड़े स्टार्टअप्स की फंडिंग घट रही है, जिससे ऊर्जा नवाचार, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु लक्ष्यों पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है.

AI और ऊर्जा सेक्टर Image Credit: AI Generated

AI impact on energy sector: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को आज दुनिया की सबसे तेज तकनीकी क्रांति कहा जा रहा है. लेकिन इसी क्रांति के बीच एक नई चिंता भी उभर रही है, क्या AI का विस्तार ऊर्जा सेक्टर के लिए खतरा बनता जा रहा है? एक तरफ AI की वजह से डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की बिजली खपत तेजी से बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर ऊर्जा तकनीक में निवेश धीमा पड़ने लगा है. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की ताजा रिपोर्ट “The State of Energy Innovation 2026” बताती है कि AI स्टार्टअप्स में बढ़ती फंडिंग के कारण एनर्जी इनोवेशन से जुड़ी कंपनियों के लिए निवेश जुटाना मुश्किल हो रहा है. यही स्थिति जारी रही तो यह भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु लक्ष्यों के लिए चिंता का संकेत हो सकता है.

AI से बढ़ रही है ऊर्जा की मांग

आज AI का इस्तेमाल केवल टेक कंपनियों तक सीमित नहीं रह गया है. बड़े भाषा मॉडल, क्लाउड सेवाएं, स्मार्ट डिवाइस और डेटा आधारित एप्लिकेशन तेजी से बढ़ रहे हैं. इन सबको चलाने के लिए बड़े डेटा सेंटर की जरूरत होती है, जिनकी ऊर्जा खपत बहुत ज्यादा होती है.

Oilprice वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक, AI के बढ़ते उपयोग ने ऊर्जा मांग के अनुमान को काफी ऊपर पहुंचा दिया है. सरकारें और कंपनियां भविष्य की जरूरतों को देखते हुए बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजनाएं बना रही हैं. हालांकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह विस्तार कई बार जलवायु लक्ष्यों की कीमत पर भी हो सकता है.

लेकिन समाधान भी बन सकता है AI

दिलचस्प बात यह है कि AI एनर्जी सेक्टर के लिए केवल चुनौती नहीं है, बल्कि संभावित समाधान भी है. AI की मदद से बिजली ग्रिड का बेहतर प्रबंधन, इंडस्ट्री में एनर्जी का बेहतर ढंग से इस्तेमाल और नई क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी का विकास संभव हो सकता है.

रिपोर्ट के मुताबिक, कई कंपनियां AI का इस्तेमाल करके बिजली खपत कम करने, उत्पादन को बेहतर तरीके से संतुलित करने और ऊर्जा सिस्टम को अधिक स्मार्ट बनाने पर काम कर रही हैं. अगर यह तकनीक सही तरीके से लागू होती है, तो भविष्य में AI ऊर्जा क्षेत्र के लिए सकारात्मक भूमिका निभा सकता है.

ऊर्जा इनोवेशन फंडिंग में गिरावट

हालांकि International Energy Agency (IEA) की रिपोर्ट बताती है कि एनर्जी इनोवेशन में निवेश की गति फिलहाल धीमी पड़ रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में चरम पर पहुंचने के बाद एनर्जी रिसर्च और डेवलपमेंट पर सरकारी खर्च 2024 में घटा और 2025 में इसमें और 2 फीसदी की गिरावट आई.

2025 में वैश्विक स्तर पर एनर्जी रिसर्च और डेवलपमेंट पर सरकारी खर्च लगभग 55 अरब डॉलर तक रह गया. यह गिरावट खासतौर पर यूरोपीय संघ और अमेरिका में नीति बदलाव और बजट कटौती की वजह से देखी गई.

वेंचर कैपिटल भी हुआ कम

ऊर्जा टेक्नोलॉजी में वेंचर कैपिटल निवेश भी लगातार तीन वर्षों से घट रहा है. IEA का कहना है कि इसके पीछे कई कारण हैं, लेकिन AI स्टार्टअप्स में बढ़ती दिलचस्पी एक बड़ा कारण बनकर सामने आई है. रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में वेंचर कैपिटल निवेश का लगभग 30 फीसदी हिस्सा AI सेक्टर को मिला, जबकि ऊर्जा सेक्टर का हिस्सा घट गया. कई बड़े निवेश फंड, जो पहले ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करते थे, उन्होंने अपना फोकस AI की ओर मोड़ दिया.

ऊर्जा और जलवायु लक्ष्यों पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति चिंताजनक हो सकती है, क्योंकि दुनिया को ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन दोनों चुनौतियों से एक साथ निपटना है. अगर ऊर्जा तकनीक में निवेश कम होता है तो स्वच्छ ऊर्जा और नई तकनीकों का विकास धीमा पड़ सकता है.

अमेरिका में इसका असर साफ दिख रहा है. 2025 की चौथी तिमाही में करीब 8 अरब डॉलर की क्लीन एनर्जी परियोजनाएं रद्द कर दी गईं, जबकि केवल 3 अरब डॉलर के नए प्रोजेक्ट घोषित किए गए.

कुछ नए क्षेत्रों में बढ़ रहा निवेश

हालांकि पूरी तस्वीर नकारात्मक नहीं है. IEA की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ उभरते क्षेत्रों में निवेश तेजी से बढ़ रहा है. इनमें कार्बन डाइऑक्साइड हटाने की तकनीक, क्रिटिकल मिनरल्स, अगली पीढ़ी की जियोथर्मल ऊर्जा, कम उत्सर्जन वाली औद्योगिक तकनीक, एयरोस्पेस, परमाणु विखंडन और परमाणु फ्यूजन शामिल हैं.

2025 में इन सात क्षेत्रों ने ऊर्जा वेंचर कैपिटल फंडिंग का लगभग एक-तिहाई हिस्सा हासिल किया. 2019 में यह हिस्सा 5 फीसदी से भी कम था.

यह भी पढ़ें: कॉपर में तेजी से चमका यह PSU शेयर, लेकिन क्या यह वैल्यूएशन ट्रैप या बनेगा अगला मल्टीबैगर? क्या कहते हैं आंकड़े?

रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले वर्षों में ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी प्रतिस्पर्धा निवेश के बड़े कारण बन सकते हैं. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा नवाचार में स्थिर और लॉन्ग टर्म निवेश जरूरी है, ताकि दुनिया ऊर्जा मांग और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का संतुलित समाधान खोज सके.