युद्ध से शेयर बाजार-SIP सब में नुकसान, क्या अमीरों के भी डूब रहे हैं पैसे, जानें अंबानी-अडानी-जिंदल से लेकर दूसरे अरबपतियों का हाल
पश्चिम एशिया में बढ़ते ईरान–अमेरिका तनाव का असर अब सीधे अरबपतियों की दौलत पर दिखने लगा है. Bloomberg Billionaires Index के मुताबिक, पिछले डेढ़ महीने में भारत के टॉप उद्योगपतियों की संपत्ति में बड़ा उतार-चढ़ाव आया है. एक ओर जहां कुछ ने अरबों डॉलर कमाए, वहीं कुछ को भारी नुकसान उठाना पड़ा.
Billionaires Networth in Iran usa war : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान–अमेरिका युद्ध शुरू होने के बाद दुनिया भर के बाजारों में जबरदस्त हलचल देखने को मिली है. कहीं तेल की कीमतें उछलीं, तो कहीं शेयर बाजार में दबाव दिखा. इस संकट में निवेशकों के पोर्टफोलियों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. लेकिन इस उथल-पुथल का सबसे दिलचस्प असर दिखा है अरबपतियों की दौलत पर, जहां कुछ की नेटवर्थ तेजी से बढ़ी, तो कुछ को भारी नुकसान झेलना पड़ा. Bloomberg Billionaires Index के आंकड़ों के मुताबिक, 28 फरवरी 2026, जब युद्ध शुरू हुआ से 17 अप्रैल 2026 यानी आज के बीच भारत के टॉप उद्योगपतियों की नेटवर्थ में अलग-अलग रुझान देखने को मिले.
किसकी दौलत बढ़ी, किसकी घटी?
फायदे में रहने वाले अरबपति
गौतम अडानी
- 28 फरवरी: $81.7B (लगभग ₹7.52 लाख करोड़)
- 17 अप्रैल: $92.6B (लगभग ₹8.52 लाख करोड़)
$10.9B का जबरदस्त उछाल देखने को मिला. यानी लगभग डेढ महीने में गौतम अडानी की ने नेटवर्थ लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की बढ़त दर्ज की गई है.
शिव नादर
- 28 फरवरी: $33.2B (लगभग ₹3.05 लाख करोड़)
- 17 अप्रैल: $33.5B (लगभग ₹3.08 लाख करोड़)
शिव नादर की नेटवर्थ में हल्की बढ़त (+ $0.3B) देखने को मिली.
नुकसान उठाने वाले अरबपति
मुकेश अंबानी
- 28 फरवरी: $94.2B (लगभग ₹8.67 लाख करोड़)
- 17 अप्रैल: $90.8B (लगभग ₹8.35 लाख करोड़)
इस अवधि में मुकेश अंबानी की संपत्ती में $3.4B की गिरावट दर्ज की गई है.
लक्ष्मी मित्तल
- 28 फरवरी: $39B (लगभग ₹3.59 लाख करोड़)
- 17 अप्रैल: $36.9B (लगभग ₹3.39 लाख करोड़)
लक्ष्मी मित्तल को $2.1B का नुकसान हुआ है.
सावित्री जिंदल
- 28 फरवरी: $32.9B (लगभग ₹3.03 लाख करोड़)
- 17 अप्रैल: $32.7B (लगभग ₹3.01 लाख करोड़)
सावित्री जिंदल की नेटवर्थ में मामूली $0.2B की गिरावट दर्ज की गई है.
क्यों बदली अरबपतियों की किस्मत?
इस उतार-चढ़ाव के पीछे तीन बड़े कारण हैं:
तेल की कीमतों में उछाल – पश्चिम एशिया तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं, जिससे एनर्जी सेक्टर में उतार-चढ़ाव आया.
शेयर बाजार में अस्थिरता – ग्लोबल अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने जोखिम कम किया, जिससे कई सेक्टरों के शेयर दबाव में आए.
सेक्टर आधारित असर
- इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी से जुड़े कारोबार को फायदा
- मेटल और कुछ पारंपरिक सेक्टरों पर दबाव
मिडिल ईस्ट का यह तनाव सिर्फ भू-राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सीधे अरबों डॉलर की दौलत को प्रभावित कर रहा है. आने वाले समय में अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो यह उतार-चढ़ाव और तेज हो सकता है. साथ ही अरबपतियों की सूची में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
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