बजट में रक्षा खर्च पर होगा अधिक फोकस, MOFSL ने कहा- 15 फीसदी बढ़ सकता है डिफेंस कैपेक्स

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) ने अपने ताजा नोट में कहा है कि हमें उम्मीद है कि FY27 का केंद्रीय बजट भारत के वित्तीय ढांचे में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा. खास तौर पर डिफेंस और उससे जुड़ी इंडस्ट्रीज के सेंटर स्टेज पर आने की उम्मीद है.

बजट में बढ़ सकता है डिफेंस खर्च. Image Credit: TV9 Bharatvarsh

आने वाले बजट में डिफेंस और उससे जुड़े उद्योगों और पावर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे दूसरे उभरते हुए सेक्टर्स पर ज्यादा जोर दिए जाने की उम्मीद है. साथ ही सरकार रेवेन्यू खर्च (रेवेक्स) पर कड़ी नजर रखेगी, सब्सिडी और गैर-जरूरी खर्चों में सीमित बढ़ोतरी करेगी और फिस्कल बैलेंस को मैनेज करने के लिए RBI के डिविडेंड पर निर्भर रहेगी. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) ने अपने ताजा नोट में कहा है कि हमें उम्मीद है कि FY27 का केंद्रीय बजट भारत के वित्तीय ढांचे में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा, जिसमें ग्रॉस फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य GDP का 4.3 फीसदी रखा गया है, जो FY26 के 4.4 फीसदी से कम है.

डिफेंस कैपिटल आउटले

खास तौर पर डिफेंस और उससे जुड़ी इंडस्ट्रीज के सेंटर स्टेज पर आने की उम्मीद है. ब्रोकरेज ने बताया कि डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने विंटर सेशन के दौरान 79,000 करोड़ रुपये के कैपिटल एक्विजिशन प्रपोजल को मंजूरी दी, जिससे FY26 में अब तक कुल मंजूरी 3.3 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जो डिफेंस कैपिटल आउटले के लिए बजट में रखे गए 1.8 लाख करोड़ रुपये से लगभग दोगुना है.

15 फीसदी बढ़ सकता है डिफेंस कैपेक्स

इसी तेजी को देखते हुए, मोतीलाल ओसवाल का अनुमान है कि FY27 में डिफेंस कैपेक्स FY26 के 1.8 लाख करोड़ रुपये के बेस से लगभग 15 फीसदी बढ़ सकता है. शिपबिल्डिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और जरूरी मिनरल्स जैसे जुड़े हुए सेगमेंट्स को भी फायदा होने की उम्मीद है, क्योंकि सरकार स्वदेशीकरण और रणनीतिक आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देना जारी रखे हुए है.

नॉन-ट्रेडिशनल सेक्टर में अधिक निवेश की गुंजाइश

कुल मिलाकर, मोतीलाल ओसवाल का मानना ​​है कि सनराइज या नॉन-ट्रेडिशनल सेक्टर में ज्यादा इन्वेस्टमेंट की गुंजाइश है. इनमें डिफेंस और उससे जुड़ी इंडस्ट्रीज, फार्मास्यूटिकल्स, पावर और न्यूक्लियर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स, जरूरी मिनरल्स, और लेबर-इंटेंसिव इंडस्ट्रीज शामिल हैं, जिन पर ग्लोबल ट्रेड टैरिफ का असर पड़ा है. इनमें से कई प्राथमिकताओं के बारे में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पहले ही बताया जा चुका था, जिससे आने वाले समय की झलक मिलती है.

7 फीसदी बढ़ सकता है सरकारी खर्च

खर्च के मामले में MOFSL का अनुमान है कि FY27 में कुल सरकारी खर्च सालाना आधार पर लगभग 7 फीसदी बढ़ेगा, जो लगभग 52.9 लाख करोड़ रुपये या GDP का 13.4 फीसदी होगा। रेवेन्यू खर्च 40.5 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जबकि सब्सिडी बिल लगभग 4.1 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जिसमें मुख्य रूप से भोजन आवंटन पर 2.1 लाख करोड़ रुपये और उर्वरक सहायता पर 1.9 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे.

कितना रहा सकता है कैपिटल एक्सपेंडिचर

केंद्र सरकार का पूंजीगत खर्च FY27 में 12.4 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो सालाना आधार पर 10.3 फीसदी या GDP का 3.1 फीसदी ज्यादा है, जिसका मुख्य कारण रक्षा खर्च में बढ़ोतरी है. ब्रोकरेज ने यह भी बताया कि FY26 में लगभग 40,000 करोड़ रुपये की एक बार की इमरजेंसी रक्षा खरीद शामिल थी.

इन सेक्टर्स पर रह सकता है जोर

ब्रोकरेज ने कहा कि हमें उम्मीद है कि आने वाले बजट में उभरते हुए प्राथमिकता वाले सेक्टर्स पर जोर दिया जाएगा जो लॉन्ग-टर्म ग्रोथ और रणनीतिक मजबूती ला सकते हैं. खासकर, रक्षा और उससे जुड़े उद्योगों पर अधिक ध्यान दिए जाने की संभावना है, जो स्टार्ट-अप्स में हाल की तेजी और केंद्र द्वारा रक्षा से जुड़ी क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित समिति के गठन पर आधारित है. डिजिटल टेक्नोलॉजी, खासकर ऐसे सॉल्यूशन जो एडवांस्ड टेक्नोलॉजी को कृषि, स्वास्थ्य सेवा और संबंधित सामाजिक क्षेत्रों में इंटीग्रेट करते हैं, रिफॉर्म ओरिएंटेड आवंटन के मुख्य स्तंभ बने रहने चाहिए.

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