कितनी मजबूत है बुर्ज खलीफा, हर रोज इतनी कमाई, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर जैसा हुआ हाल तो लगेगा अरबों का झटका
दुबई का बुर्ज खलीफा सिर्फ दुनिया की सबसे ऊंची इमारत नहीं, बल्कि शहर की अर्थव्यवस्था और वैश्विक पहचान का मजबूत स्तंभ है. पर्यटन, रियल एस्टेट, हॉस्पिटैलिटी और कॉर्पोरेट गतिविधियों का बड़ा केंद्र होने के कारण इसका महत्व बेहद बड़ा है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अगर इस इमारत पर किसी बड़े हमले जैसी स्थिति बनती है तो उसका असर सिर्फ एक बिल्डिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुबई की आर्थिक गतिविधियों, निवेश माहौल और अंतरराष्ट्रीय छवि पर गहरा झटका लग सकता है.
Middle East Impact on Burj Khalifa: दुनिया की सबसे ऊंची इमारत का दर्जा दुबई में बने बुर्ज खलीफा Burj Khalifa के पास है. ये गगनचुंबी टावर महज एक इमारत नहीं, बल्कि दुबई की महत्वाकांक्षा और आर्थिक रणनीति की जीता जागता सबूत है. इसे यहां की लाइफलाइन भी कहां जाता है. इस 828 मीटर ऊंचे टावर पर पूरे शहर की इकोनॉमी टिकी हुई है. मगर मिडिल ईस्ट में बनें टेशन के महौल ने पूरी दुनिया की नींदें उड़ा दी है. अगर अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में सितंबर 2011 में हुए हमले की तहर अगर बुर्ज खलीफा पर हमला होता है तो क्या होगा.
अर्थव्यवस्था पर असर
करीब 1.4 अरब डॉलर की लागत से बने इस टावर का नाम यूएई के पूर्व राष्ट्रपति खलीफा बिन जायद अल नहयान के सम्मान में रखा गया. Connect Travel के मुताबिक बुर्ज खलीफा सिर्फ एंट्री टिकट बिक्री से ही हर साल लगभग 621 मिलियन डॉलर का रेवेन्यू कमाता है. यानी रोजना करीब 1.7 मिलियन डॉलर की कमाई करती है. वहीं टुमॉरो सिटी की फरवरी 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की सबसे ऊंची इमारत के भीतर मौजूद रिहायशी यूनिट्स ने 2010 से अब तक करीब 2.18 बिलियन डॉलर की कमाई की है. इनमें से 76 प्रतिशत से ज्यादा यूनिट्स की कीमत 1 मिलियन डॉलर से ज्यादा है.
बुर्ज खलीफा की वजह से दुबई वैश्विक निवेशकों और कारोबारियों का प्रमुख ठिकाना बन गया है. हर साल दुनियाभर से लाखों पर्यटक यहां पहुंचते हैं. यही वजह है कि ये दुबई की अर्थव्यवस्था में करोड़ों डॉलर का योगदान होता है. ऐसे में अगर बुर्ज खलीफा पर हमला होता है तो दुबई की इकोनॉमी की कमर टूट सकती है.
लग्जरी बिल्डिंगों पर खतरा
बुर्ज खलीफा में लग्जरी होटल, प्राइवेट रेसिडेंस, कॉर्पोरेट ऑफिस और ऑब्जर्वेशन डेक मौजूद हैं. यहां मौजूद अर्मानी होटल और सैकड़ों लग्जरी अपार्टमेंट्स इसे खास बनाते हैं. 122वीं मंजिल पर स्थित ‘एटमॉस्फियर’ रेस्टोरेंट दुनिया का सबसे ऊंचा रेस्टोरेंट माना जाता है. इसके अलावा स्पा, जिम, स्विमिंग पूल और बिजनेस सुविधाएं इसे एक पूर्ण वर्टिकल सिटी का रूप देती हैं. यह टावर 2010 में शुरू हुआ था. तब से यह वैश्विक पर्यटन और निवेश का केंद्र बना हुआ है. अगर हमला होता है तो बड़े-बड़े दफ्तरों से लेकर लग्जरी अपार्टमेंट्स धराशायी हो जाएंगे.
ये चीजें हैं खास
- बुर्ज खलीफा के बाहरी सरफेस में करीब 26,000 ग्लास पैनल लगे हैं. हर पैनल का वजन 362 किलो है.
- 512 मीटर ऊंचाई पर एल्यूमिनियम-ग्लास फसाड इंस्टॉल कर विश्व रिकॉर्ड बनाया गया.
- टॉप पर लगा टेलीस्कोपिक स्पायर 4,000 टन स्टील से बना है और इसमें कम्युनिकेशन उपकरण लगे हैं.
- रोजाना करीब 9.46 लाख लीटर पानी की सप्लाई, 57 लिफ्ट और दुनिया की सबसे ऊंची सर्विस एलिवेटर मौजूद है.
- मजबूत इंजीनियरिंग और एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम से लैस यह टावर सुरक्षा के लिहाज से भी हाईटेक है.
- यूएई ने बोला है कि ईरान ने कुल 541 ड्रोन भेजे थे जिनमें से 506 इंटरसेप्ट हुए थे.
कब और क्यों हुआ था शुरू?
बुर्ज खलीफा का निर्मा 2004 में शुरू हुआ था और महज साढ़े पांच साल में यानी 2009 तक यह तैयार हो गया. साल 2010 से इसे शुरू किया गया था. इसे Skidmore, Owings & Merrill ने डिजाइन किया था, जिसमें प्रमुख आर्किटेक्ट एड्रियन स्मिथ थे. दुबई को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने और तेल पर निर्भरता घटाने के मकसद से इसे एक ‘वर्टिकल सिटी’ के रूप में विकसित किया गया था. यूएई सरकार चाहती थी कि दुबई को एक ऐसा लैंडमार्क मिले जो दुनिया भर के पर्यटकों और निवेशकों को आकर्षित करे. साथ ही इसे रियल एस्टेट, हॉस्पिटैलिटी और कॉर्पोरेट सेक्टर को एक ही इमारत में समेटकर आर्थिक गतिविधियों का हब तैयार करना था.
इन हाईटेक तकनीक का हुआ इस्तेमाल
बुर्ज खलीफा को हवा के दबाव, तापमान और संरचनात्मक मजबूती को ध्यान में रखते हुए अपग्रेडेट इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल करके तैयार किया गया है. बाहरी हिस्से में हजारों ग्लास पैनल लगाए गए और टॉप पर स्टील से बना टेलीस्कोपिक स्पायर स्थापित किया गया, जो कम्यूनिकेशन उपकरणों से लैस है.
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