Gold-Silver Price Today 03-03-2026: मिडिल-ईस्‍ट टेंशन के बीच चमका सोना, 5300 डॉलर के पार, चांदी भी 2% उछली

मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते सोना और चांदी में फिर से जोरदार तेजी देखने को मिली है. वैश्विक बाजारों के साथ भारतीय वायदा बाजार में भी कीमती धातुओं में मजबूत उछाल दर्ज हुआ, हालांकि बाद में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली. अमेरिका-ईरान तनाव, ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने सोने-चांदी को सपोर्ट दिया है.

सोने की कीमत Image Credit: OsakaWayne Studios/Moment/Getty Images

Gold-Silver Price Today: मिडिल ईस्‍ट में बढ़ते तनाव के बीच सोने और चांदी की कीमतों में फिर तेजी लौट आई है. सोना लगातार पांचवें सत्र में चढ़ा, जबकि चांदी ने पिछली गिरावट से उबरते हुए जोरदार वापसी की. एशियाई कारोबार के दौरान स्पॉट गोल्ड 1.65% चढ़कर 5,365 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, वहीं स्पॉट सिल्वर करीब 2% उछलकर 90.56 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करता दिखा. हालांकि बाद में इसमें गिरावट आई.

भारतीय बाजार का हाल

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से 2 मार्च को सोना और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली. MCX पर सोना 6,906 रुपये यानी 4.26% की बढ़त के साथ 1,69,880 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था, जबकि पिछले सत्र में यह 1,62,104 रुपये पर बंद हुआ था. वहीं MCX पर चांदी 14,156 रुपये यानी 5% से ज्‍यादा उछलकर 2,97,799 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई, हालांकि बाद में ये हल्‍की गिरावट के साथ बंद हुई. इसका पिछला बंद भाव 2,82,644 रुपये था.

तेजी की बड़ी वजह

सोना-चांदी की कीमतों में आए उछाल की बड़ीवजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य अभियान जारी रखने के संकेत दिए हैं, जबकि ईरान ने तेल और गैस ठिकानों को निशाना बनाने और समुद्री यातायात को बाधित करने की चेतावनी दी है. इससे ऊर्जा कीमतों में उछाल आया और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है. ऊंची ऊर्जा कीमतों के चलते अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड पर दबाव बना है और बाजार अब यह मान रहा है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती को पहले की उम्मीदों से आगे टाल सकता है.

क्‍या है संभावनाएं?

विशेषज्ञों का मानना है कि शॉर्ट टर्म में दोनों कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, क्योंकि भू-राजनीतिक खबरें और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े बाजार की दिशा तय करेंगे. फिर भी लॉन्‍ग टर्म रुझान मजबूत बना हुआ है, जिसे वैश्विक कर्ज, नीति में नरमी की उम्मीद और अस्थिरता का सपोर्ट मिल रहा है.