ऑनलाइन पेमेंट पर सरकार का प्लान, phonePe, Gpay, Paytm क्यों परेशान?
क्या आपका नेटफ्लिक्स या अमेजन प्राइम सब्सक्रिप्शन गूगल पे या फ़ोनपे के जरिए ऑटो-पे पर सेट है? क्या होगा अगर नए नियमों के तहत हर बार पैसे डेबिट होने पर आपकी मंजूरी जरूरी हो? क्या डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP एक्ट) आवर्ती भुगतानों को जटिल और महंगा बना देगा? अमेजन, गूगल और NPCI जैसी कंपनियां चिंतित क्यों हैं? इसका छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स पर क्या असर होगा? क्या ये अनुपालन लागतें अंततः आप जैसे उपभोक्ताओं को प्रभावित करेंगी? पर्दे के पीछे क्या हो रहा है, यह समझने के लिए यह वीडियो देखें.
पेमेंट कंपनियों ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम के उन प्रावधानों से छूट मांगी है जिनके तहत प्रत्येक लेनदेन के लिए उपयोगकर्ता की सहमति आवश्यक है. कंपनियों ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को दिए गए अपने ज्ञापन में कहा है कि इस अनिवार्यता से लागत और जटिलता बढ़ेगी. व्यक्तियों को अपने व्यक्तिगत डेटा की प्रोसेसिंग के लिए स्पष्ट सहमति प्रदान करनी होगी, जिसमें ऑनलाइन लेनदेन भी शामिल है.
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