इकोनॉमिक सर्वे में पहली बार हुआ पावर गैप इंडेक्स का जिक्र, आखिर क्या है और भारत की ग्रोथ से कैसे जुड़ा है?
पावर गैप इंडेक्स ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स या ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स की तरह कोई अकेला इंडेक्स नहीं है. बल्कि, यह लोवी इंस्टीट्यूट के एशिया पावर इंडेक्स से लिया गया एक सेकेंडरी एनालिटिकल पैमाना है. यह पावर गैप इंडेक्स आखिर है क्या है जिसे सर्वे में शामिल हो गया है और यह पॉलिसी बनाने वालों के लिए क्यों अहम है?
गुरुवार को इकोनॉमिक सर्वे 2026 आ गया और यह एक रूटीन प्री-बजट डॉक्यूमेंट से अधिक, बदलती दुनिया की स्थिति का विश्लेषण जैसा लगता है. बढ़ते जियो-पॉलिटिकल बदलाव, टूटी हुई सप्लाई चेन और कमजोर होते ग्लोबल ऑर्डर के माहौल में सर्वे ने उन दबावों की ओर इशारा किया है, जिनका सामना भारत कर रहा है. हालांकि, देश के पास अनिश्चितता को रणनीतिक अवसर में बदलने के लिए बहुत कम समय है. उस बड़े आकलन में सर्वे ने पावर गैप इंडेक्स पर भारत की स्थिति का खास जिक्र किया है, जो अपनी तरह का पहला है.
सीधे शब्दों में कहें तो सर्वे कहता है कि ऑस्ट्रेलिया स्थित लोवी इंस्टीट्यूट का पावर गैप इंडेक्स बताता है कि भारत अपनी पूरी रणनीतिक क्षमता से कम पर काम कर रहा है. भारत का पावर गैप स्कोर -4.0 है, जो रूस और उत्तर कोरिया को छोड़कर एशिया में सबसे कम है. यानी भारत के सामने अभी बहुत काम है. यह पावर गैप इंडेक्स आखिर है क्या है जिसे सर्वे में शामिल हो गया है और यह पॉलिसी बनाने वालों के लिए क्यों अहम है?
पावर गैप इंडेक्स क्या है और यह कैसे काम करता है?
यह ध्यान रखना जरूरी है कि पावर गैप इंडेक्स ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स या ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स की तरह कोई अकेला इंडेक्स नहीं है. बल्कि, यह लोवी इंस्टीट्यूट के एशिया पावर इंडेक्स से लिया गया एक सेकेंडरी एनालिटिकल पैमाना है, जो ऑस्ट्रेलिया स्थित लोवी इंस्टीट्यूट द्वारा बनाई गई एक सालाना रैंकिंग है. पावर गैप मेट्रिक किसी देश के संसाधनों के आधार पर उसके अनुमानित प्रभाव और क्षेत्र में उसके असल प्रभाव के बीच का अंतर बताता है.
नेगेटिव पावर गैप
आसान शब्दों में कहें तो, पॉजिटिव पावर गैप स्कोर का मतलब है कि कोई देश अपने संसाधनों के अनुमान से अधिक प्रभाव डालता है, जबकि नेगेटिव पावर गैप स्कोर कम परफॉर्मेंस दिखाता है. एक पॉजिटिव नंबर कूटनीति, गठबंधनों और आर्थिक रणनीति के ज़रिए संसाधनों को प्रभाव में बदलने की असरदार क्षमता का संकेत देता है. एक नेगेटिव गैप एक डिस्कनेक्ट को दिखाता है, जहां किसी देश के पास महत्वपूर्ण क्षमताएं होती हैं, लेकिन वह भू-राजनीति में उनका पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं कर पाता है.
यह जानकारी एनालिस्ट्स और नीति निर्माताओं को न सिर्फ कच्ची ताकत का आकलन करने में मदद करती है, बल्कि यह भी समझने में मदद करती है कि कोई देश उस ताकत को क्षेत्रीय प्रभाव में कितनी असरदार तरीके से बदलता है.
पावर गैप इंडेक्स की गणना कैसे की जाती है
लोवी इंस्टीट्यूट के अनुसार, एशिया पावर इंडेक्स और इसी तरह पावर गैप इंडेक्स, दो बड़े आयामों में बांटे गए आठ विषयगत मापों पर आधारित है.
रिसोर्स-बेस्ड मापों में शामिल हैं
- आर्थिक क्षमता
- सैन्य क्षमता
- रेजिलिएंस (आंतरिक स्थिरता और रणनीतिक स्थिति)
- भविष्य के संसाधन (लॉन्गटर्म जनसांख्यिकीय और आर्थिक क्षमता)
प्रभाव-आधारित मापों में शामिल हैं
- आर्थिक संबंध
- रक्षा नेटवर्क
- राजनयिक प्रभाव
- सांस्कृतिक प्रभाव
प्रत्येक कैटेगरी सब-मेजर्स और सार्वजनिक स्रोतों और लोवी इंस्टीट्यूट के मूल रिसर्च से लिए गए लगभग 131 व्यक्तिगत संकेतकों से बनी है. इन्हें 100 में से भारित स्कोर में मिलाया जाता है. फिर इस ओवरऑल पावर स्कोर की तुलना किसी देश के संसाधन आधार पर आधारित अपेक्षित स्कोर से करके पावर गैप निकाला जाता है.
भारत की रैंक और पावर गैप स्कोर
एशिया पावर इंडेक्स 2025 में भारत 27 देशों और क्षेत्रों में से तीसरे स्थान पर है, जिसका कुल स्कोर 100 में से 40.0 है. यह पहली बार है जब भारत “प्रमुख पावर” श्रेणी में शामिल हुआ है. संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन पहले दो स्थानों पर हैं. इसके बावजूद, भारत का पावर गैप स्कोर -4.0 पर नेगेटिव बना हुआ है, जो रूस और उत्तर कोरिया को छोड़कर एशिया में सबसे कम है.
इसके विपरीत कम संसाधनों वाले कई देश प्रभाव के मामले में बेहतर प्रदर्शन करते हैं. जापान का पावर गैप स्कोर 1.0 है, ऑस्ट्रेलिया का 8.0, सिंगापुर का 5.2 और दक्षिण कोरिया का 5.1 है, जो भारत की तुलना में संसाधनों को क्षेत्रीय प्रभाव में बदलने की बेहतर क्षमता को दर्शाता है.
क्या कहता है इकोनॉमिक सर्वे?
इकोनॉमिक सर्वे 2026 ने पावर गैप इंडेक्स का हवाला देते हुए कहा है कि भारत अपनी पूरी रणनीतिक क्षमता से कम पर काम कर रहा है. हालांकि भारत के मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल्स मजबूत हैं, सर्वे में कहा गया है कि देश ने अभी तक अपने आर्थिक आकार और विकास को बाहरी प्रभाव में नहीं बदला है, खासकर आर्थिक संबंधों और रक्षा पार्टनरशिप में टिका हुआ है.
असल में भारत की क्षमताएं क्षेत्रीय रणनीतिक नतीजों को आकार देने की उसकी क्षमता में पूरी तरह से नहीं दिखती हैं, इस कमी को सर्वे ने एक बड़ी पॉलिसी चुनौती बताया है. सर्वे में कहा गया है कि भारत ने ग्लोबल झटकों का सामना करने में मजबूत लचीलापन और सहनशक्ति दिखाई है. इसके विकास की अगली चुनौती अलग है. मुख्य रूप से स्थिरता पाने वाले से बदलकर दूसरों के लिए स्थिरता और अवसर का स्रोत बनना है.
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