Excise Duty घटी, अब क्या राज्य घटाएंगे VAT? जानें पेट्रोल पर कौन-कितना वसूलता है टैक्स, ये रहे टॉप 5 स्टेट
केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाकर राहत दी है, लेकिन पेट्रोल-डीजल की कीमतों में असली कमी राज्यों के VAT पर निर्भर करेगी. देश के कई राज्यों में 30 फीसदी से ज्यादा टैक्स वसूला जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं पर बोझ बना हुआ है. जानें कौन-सा कितना वसूलता है टैक्स.
Excise Duty State VAT: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच केंद्र सरकार ने कुछ दिन पहले बड़ा कदम उठाया था. इसके तहत सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर दी थी. पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये और डीजल पर 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दी गई है. यानी दोनों ईंधनों पर करीब 10 रुपये की राहत दी गई है. हालांकि, इस कटौती के बावजूद आम उपभोक्ताओं को पूरी राहत मिलना अभी तय नहीं है, क्योंकि अंतिम कीमत में बड़ा हिस्सा राज्यों द्वारा वसूले जाने वाले VAT (वैल्यू एडेड टैक्स) का होता है.
कैसे तय होती है कीमत?
दरअसल, भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत चार मुख्य हिस्सों से मिलकर बनती है- कच्चे तेल की बेस कीमत, केंद्र का एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और राज्य सरकार का VAT. इनमें से बेस प्राइस, फ्रेट और एक्साइज पूरे देश में लगभग समान रहते हैं, लेकिन VAT हर राज्य में अलग-अलग होता है, जिसकी वजह से अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिलता है.
दिल्ली में कीमत और लगने वाले टैक्स का गणित समझिए
अगर दिल्ली का उदाहरण लें, तो पेट्रोल की कीमत करीब 94.77 रुपये प्रति लीटर है. इसमें बेस प्राइस लगभग 52.83 रुपये और फ्रेट जोड़कर 53 रुपये के आसपास बैठता है. इसके बाद एक्साइज ड्यूटी (कटौती के बाद करीब 11.9 रुपये), डीलर कमीशन (करीब 4.40 रुपये) और VAT (करीब 15.40 रुपये) जुड़ता है. यानी कुल मिलाकर पेट्रोल की कीमत में 35-40 फीसदी हिस्सा सिर्फ टैक्स का होता है. अगर सभी टैक्स हटा दिए जाएं, तो पेट्रोल की कीमत करीब 52 रुपये प्रति लीटर रह सकती है.
सबसे ज्यादा VAT वसूलने वाले टॉप 5 राज्य
क्लीयरटैक्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में कुछ राज्य ऐसे हैं जहां पेट्रोल पर सबसे ज्यादा VAT लगाया जाता है, जिससे वहां कीमतें ज्यादा रहती हैं:
| रैंक | राज्य | पेट्रोल पर VAT/टैक्स संरचना |
|---|---|---|
| 1 | तेलंगाना | ~35.2% VAT |
| 2 | आंध्र प्रदेश | ~31% VAT + अतिरिक्त सेस |
| 3 | केरल | ~30%+ VAT + सेस |
| 4 | कर्नाटक | ~29.8% VAT |
| 5 | मध्य प्रदेश / राजस्थान | ~29% VAT (लगभग) |
इन राज्यों में ऊंचे टैक्स की वजह से उपभोक्ताओं को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है.
क्या राज्य घटाएंगे VAT?
यही सबसे बड़ा सवाल है. पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच, राज्यों द्वारा VAT घटाने की संभावना बनी हुई है, खासकर तब जब SBI Research जैसे संस्थान यह संकेत दे रहे हैं कि ऊंची वैश्विक तेल कीमतों के कारण राज्यों को ज्यादा टैक्स रेवेन्यू मिल रहा है. हालांकि, VAT घटाने या न घटाने का फैसला पूरी तरह राज्य सरकारों के विवेक पर निर्भर करता है और अभी तक इस पर कोई एकसमान निर्णय नहीं लिया गया है.
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क्यों नहीं मिलती पूरी राहत?
विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही केंद्र एक्साइज घटा दे, लेकिन अगर राज्य VAT में कटौती नहीं करते, तो उपभोक्ताओं को सीमित राहत ही मिलती है. यही वजह है कि कई बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम घटने के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल उतना सस्ता नहीं होता. अगर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहती हैं, तो सरकारों पर टैक्स घटाने का दबाव और बढ़ सकता है. लेकिन फिलहाल केंद्र ने राहत देकर तेल कंपनियों का दबाव कम किया है, जबकि गेंद अब राज्यों के पाले में है.
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