बाजार में हाहाकार! निफ्टी गिरते ही ‘Magnificent 7’ धड़ाम! निवेशकों के 3.28 लाख करोड़ रुपये डूबे
सबसे ज्यादा नुकसान रिलायंस इंडस्ट्रीज को हुआ है. कंपनी का मार्केट कैप करीब 87,690 करोड़ रुपये घटकर 18.24 लाख करोड़ रुपये रह गया. शेयर में दो दिन में 4.5 प्रतिशत की गिरावट आई है. इसके बाद SBI और HDFC बैंक का नंबर आता है, जिनके मार्केट कैप में 70,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की गिरावट आई है.
भारतीय शेयर बाजार में आई हालिया गिरावट ने दिग्गज शेयरों को भी नहीं बख्शा है. निफ्टी में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट के बीच देश के ‘Magnificent 7’ स्टॉक्स में सिर्फ दो कारोबारी सत्रों में 3.28 लाख करोड़ रुपये की वैल्यू खत्म हो गई. इन ‘Magnificent 7’ कंपनियों में HDFC बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, ICICI बैंक, भारती एयरटेल, इन्फोसिस, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) शामिल हैं. ये सभी कंपनियां निफ्टी 50 में सबसे ज्यादा वेटेज रखती हैं और म्यूचुअल फंड, FIIs और रिटेल निवेशकों के पसंदीदा हैं.
किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट?
सबसे ज्यादा नुकसान रिलायंस इंडस्ट्रीज को हुआ है. कंपनी का मार्केट कैप करीब 87,690 करोड़ रुपये घटकर 18.24 लाख करोड़ रुपये रह गया. शेयर में दो दिन में 4.5 प्रतिशत की गिरावट आई है. इसके बाद SBI और HDFC बैंक का नंबर आता है, जिनके मार्केट कैप में 70,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की गिरावट आई है. दोनों शेयरों में 6-7 प्रतिशत तक की कमजोरी देखी गई है.
किसमें कितना डूबा?
- ICICI बैंक में करीब 3.8 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे निवेशकों को 34,144 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
- भारती एयरटेल में 27,845 करोड़ रुपये की वैल्यू घटी, जबकि L&T में 19,857 करोड़ रुपये की गिरावट आई.
- इन्फोसिस में सबसे कम गिरावट रही, जहां 2.45 प्रतिशत कमजोरी के साथ 12,694 करोड़ रुपये की वैल्यू कम हुई.
गिरावट की बड़ी वजह क्या है?
- मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और अमेरिका-ईरान युद्ध का असर बाजार पर साफ दिख रहा है. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारतीय बाजार के लिए चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है.
- ब्रेंट क्रूड 114 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जबकि WTI भी 100 डॉलर के ऊपर ट्रेड कर रहा है. तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई और आर्थिक स्थिरता पर असर डाल सकती हैं.
बैंकों और इंडस्ट्री पर असर
जानकारों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चलता है, तो कंपनियों के कैपेक्स प्लान टल सकते हैं. खासकर तेल पर निर्भर सेक्टर में दबाव बढ़ सकता है. MSME सेक्टर पर भी इनपुट लागत बढ़ने और सप्लाई चेन में दिक्कत का असर पड़ सकता है. इसके अलावा, बढ़ती महंगाई के चलते RBI के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है. वहीं, PSU बैंकों की ट्रेजरी इनकम पर भी दबाव आ सकता है.
निफ्टी में 6 साल की सबसे बड़ी मासिक गिरावट
अमेरिका-ईरान तनाव के चलते मार्च महीने में निफ्टी करीब 11 प्रतिशत टूट चुका है, जो पिछले 6 सालों की सबसे बड़ी मंथली गिरावट है.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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