GMR vs Adani Airport: एयरपोर्ट सेक्टर का असली बादशाह कौन, जानें किसमें कितना है दम, आंकड़ों से समझें पूरा गणित
भारत का एयरपोर्ट सेक्टर एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां एयरपोर्ट सिर्फ उड़ानों तक सीमित नहीं रहे. बढ़ते पैसेंजर ट्रैफिक, मजबूत एयर कार्गो और कमर्शियल संभावनाओं ने इसे बड़ा बिजनेस बना दिया है. इस बदलते परिदृश्य में GMR एयरपोर्ट्स और अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स सबसे बड़े खिलाड़ी बनकर उभरे हैं. सवाल है इस सेक्टर का असली बादशाह कौन?
GMR vs Adani Airport: भारत में एयरपोर्ट सेक्टर तेजी से बदल रहा है. यात्रियों की संख्या बढ़ रही है, एयर कार्गो महत्वपूर्ण हो गया है और एयरपोर्ट अब सिर्फ उड़ान का स्टॉप नहीं, बल्कि बड़ा कमर्शियल हब बन रहे हैं. इस बदलाव में देश के दो बड़े प्राइवेट प्लेयर आगे हैं. ये हैं GMR एयरपोर्ट्स और अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स. सवाल यह है कि एयरपोर्ट सेक्टर के बादशाह कौन हैं. दोनों के पास बड़े एयरपोर्ट पोर्टफोलियो हैं, लेकिन स्केल, बिजनेस मॉडल, कमाई और भविष्य की रणनीति में काफी अंतर है. कौन सच में भारत के एयरपोर्ट्स को कंट्रोल करता है? इस रिपोर्ट में आपको इस सवाल के जवाब मिल जाएंगे.
एयरपोर्ट पोर्टफोलियो में आगे कौन?
अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स के पास भारत में ज्यादा एयरपोर्ट हैं. कुल 8 ऑपरेशनल एयरपोर्ट: मुंबई (और नया नवी मुंबई), अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, गुवाहाटी, मंगलुरु और तिरुवनंतपुरम. ये एयरपोर्ट देश के कुल पैसेंजर ट्रैफिक का 23%, एयर ट्रैफिक मूवमेंट्स का 22% और कार्गो का 29% हैंडल करते हैं. खासकर मुंबई और अहमदाबाद जैसे लॉजिस्टिक्स हब में मजबूत पकड़ है.
GMR एयरपोर्ट्स का पोर्टफोलियो ज्यादा डायवर्सिफाई है. भारत के अलावा साउथईस्ट एशिया और यूरोप में फैला हुआ. कंपनी का मुख्य मजबूत एयरपोर्ट दिल्ली और हैदराबाद हैं, जो लंबे समय से अच्छी कमाई दे रहे हैं. इसके अलावा गोवा का मोपा, इंडोनेशिया का मेदान, फिलीपींस का मैक्टन-सेनबू जैसे एयरपोर्ट हैं. नागपुर, भोगापुरम, बिदर और क्रीट जैसे प्रोजेक्ट भविष्य में बड़ा योगदान देंगे. GMR का फोकस स्थिर कमाई और लंबे समय की ग्रोथ पर है.
पैसेंजर ट्रैफिक, कार्गो और ऑपरेशन
पैसेंजर संख्या में GMR के प्रमुख एयरपोर्ट मजबूत हैं. FY25 में दिल्ली एयरपोर्ट ने 7 करोड़ 93 लाख पैसेंजर हैंडल किए, हैदराबाद ने 2 करोड़ 95 लाख. लगभग यह 11 करोड़ के बराबर है. पिछले 10 साल में दिल्ली में 6.8% और हैदराबाद में 10.9% CAGR ग्रोथ रही. कार्गो में भी अच्छी बढ़ोतरी.
अडानी ने H1FY26 में 4 करोड़ 60 लाख पैसेंजर हैंडल किए (2% YoY ग्रोथ), लेकिन कार्गो के मामले में कंपनी ने 5.7 लाख मीट्रिक टन का कार्गो संभाला है. अडानी का फोकस ज्यादा एयरपोर्ट्स और कार्गो पर है.
शेयर का हाल
GMR के एक शेयर की कीमत 99.90 रुपये है. बीते पांच साल में इसने 275 फीसदी का रिटर्न दिया है. लेकिन कंपनी पर भारी कर्ज है. Adani Airport अभी बाजार में लिस्टेड नहीं है. अडाणी समूह 2027 तक इसका IPO (Initial Public Offering) लाने की योजना बना रहा है, जिसके बाद यह शेयर बाजार में लिस्ट हो जाएगी.
रेवेन्यू साइज, ग्रोथ और कमाई की क्वालिटी
GMR ने Q2FY26 में 3,750 करोड़ रुपये ग्रॉस इनकम की (45% YoY ग्रोथ), H1FY26 में 7,080 करोड़ (38% ग्रोथ). पैसेंजर फ्लैट होने के बावजूद ग्रोथ ज्यादा, मतलब यील्ड (प्रति पैसेंजर कमाई) में बढ़ोतरी.
अडानी ने Q2FY26 में 3,167 करोड़ और H1FY26 में 5,882 करोड़ (32% ग्रोथ) कमाए. GMR की रेवेन्यू ज्यादा है.
एरोनॉटिकल रेवेन्यू और टैरिफ पावर
एरोनॉटिकल कमाई (लैंडिंग, पार्किंग फीस) स्थिर है. GMR को दिल्ली में टैरिफ रिवीजन से फायदा हुआ. Q2FY26 में प्रति पैसेंजर एरो यील्ड 469 रुपये (69% YoY बढ़ोतरी). दिल्ली में एरोनॉटिकल इनकम 166% बढ़ी. अडानी के 4 एयरपोर्ट्स में टैरिफ बढ़ा, H1FY26 में प्रति पैसेंजर 485 रुपये (20% YoY). अडानी का यील्ड हाई है, लेकिन GMR की ग्रोथ तेज.
लैंड बैंक, रियल एस्टेट और लॉन्ग-टर्म ऑप्शन
GMR के पास 2,500 एकड़ से ज्यादा जमीन है. इसमें हैदराबाद में 1,500 एकड़, दिल्ली में 230 एकड़ शामिल. यहां ऑफिस, होटल, कार्गो सिटी जैसे प्रोजेक्ट बन सकते हैं. अडानी के पास मुंबई और नवी मुंबई में अच्छा पोटेंशियल है, लेकिन वो अभी धीरे-धीरे विकसित हो रहा है. नवी मुंबई एयरपोर्ट से कंपनी को बड़ा बूस्ट मिलेगा.
भविष्य की ग्रोथ और स्ट्रैटेजी
GMR का फोकस मौजूदा एयरपोर्ट्स में कैपेसिटी बढ़ाना, नए एयरपोर्ट्स का रैंप-अप और लंबे प्रोजेक्ट्स पर है. कंसेशन पीरियड 40+ साल के हैं. अडानी का ग्रोथ वॉल्यूम-बेस्ड नवी मुंबई, गुवाहाटी नए टर्मिनल और डिजिटल इनिशिएटिव्स से. AI और टेक्नोलॉजी पर जोर है.
भारत के एयरपोर्ट्स पर असली कंट्रोल किसका?
अडानी ज्यादा एयरपोर्ट्स, कार्गो शेयर और नेशनल फुटप्रिंट में आगे है. या यूं कहें कि देश का सबसे बड़ा प्राइवेट ऑपरेटर. लेकिन GMR के पास सबसे वैल्यूएबल और प्रॉफिटेबल एसेट्स (दिल्ली-हैदराबाद), बेहतर यील्ड, मार्जिन और लॉन्ग-टर्म कैश फ्लो मौजूद है. अडानी की ताकत स्केल और नेटवर्क में, GMR की एसेट क्वालिटी और रियल एस्टेट में आगे है. इन आधार पर कहा जा सकता है कि किसी एक कंपनी के पास पूरा कंट्रोल नहीं है.
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