77 साल में 133 गुना बढ़ गई GDP, हर भारतीय के कमाई में 35 गुना का इजाफा; भारत बना नया सुपर पावर, ऐसे बदली तस्वीर
पिछले 77 वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है. वर्ष 1950 में भारत की GDP करीब तीस अरब डॉलर थी जो अब बढ़कर लगभग चार ट्रिलियन डॉलर हो चुकी है. प्रति व्यक्ति आय में कई गुना वृद्धि हुई है. विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हुआ है और भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहा है.
Republic Day Special: आज भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. आज ही के दिन 1950 में देश गणतंत्र घोषित हुआ था. जब हम देश की 77 साल की यात्रा को देखते हैं, तो हर भारतीय को गर्व महसूस होता है. सुरक्षा, सामाजिक न्याय, गरीबी और आर्थिक स्तर पर देश में उल्लेखनीय बदलाव हुआ है. आज का दिन केवल गर्व का ही नहीं, बल्कि देश की विकास यात्रा का विश्लेषण करने का भी अवसर है. आइए भारत की आर्थिक यात्रा पर एक नजर डालते हैं.
आज का भारत आर्थिक रूप से उस भारत से बिल्कुल अलग है जो आजादी के शुरुआती वर्षों में था. 1950 में देश की अर्थव्यवस्था कमजोर थी और आमदनी बेहद कम थी. बीते 77 वर्षों में भारत ने लंबा सफर तय किया है. आज भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. GDP से लेकर विदेशी मुद्रा भंडार तक हर क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिला है.
भारत की GDP में बड़ा बदलाव
वर्ष 1950 में भारत की कुल अर्थव्यवस्था करीब 30 अरब अमेरिकी डॉलर की थी. उस समय देश मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर था. इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर का योगदान सीमित था. आज भारत की GDP करीब 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के आसपास पहुंच चुकी है. भारत दुनिया की टॉप बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है.
प्रति व्यक्ति आय में जबरदस्त बढ़ोतरी
आजादी के बाद प्रति व्यक्ति आय बहुत कम थी. वर्ष 1950 में यह सालाना 60 से 70 अमेरिकी डॉलर के आसपास थी. आम लोगों की जीवन शैली बेहद साधारण थी. अब प्रति व्यक्ति आय बढ़कर करीब 2020 से 2080 अमेरिकी डॉलर नॉमिनल हो चुकी है. क्रय शक्ति ( परचेजिंग पावर) के हिसाब से यह और भी अधिक है. इससे लोगों की लिविंग स्टैंडर्ड में साफ सुधार दिखता है.
डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति
वर्ष 1950 में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत लगभग 4.76 रुपये थी. तब एक्सचेंज रेट तय सिस्टम पर आधारित थी. समय के साथ व्यवस्था बदली और मार्केट बेस्ड सिस्टम आई. आज एक अमेरिकी डॉलर करीब 92 रुपये के आसपास है. यह गिरावट मुख्य रूप से महंगाई के अंतर को दिखाती है. इसे आर्थिक कमजोरी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.
विदेशी मुद्रा भंडार में ऐतिहासिक उछाल
आजादी के शुरुआती वर्षों में भारत के पास विदेशी मुद्रा भंडार बहुत सीमित था. वर्ष 1950 के आसपास यह 2 अरब अमेरिकी डॉलर से भी कम था. आयात के लिए देश को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. आज भारत के पास करीब 700 अरब अमेरिकी डॉलर के आसपास विदेशी मुद्रा भंडार है. भारत दुनिया के टॉप देशों में शामिल है.
ग्लोबल ट्रेड में भारत की हिस्सेदारी
वर्ष 1950 में वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी करीब 2 फीसदी थी. यह उस दौर की औपनिवेशिक विरासत को दिखाती है. समय के साथ भारत ने अपने व्यापार का दायरा बढ़ाया है. आज भी हिस्सेदारी लगभग 2 से 2.3 फीसदी के बीच है. हालांकि टोटल ट्रेड वैल्यू कई गुना बढ़ चुका है. इससे भारत की वैश्विक मौजूदगी मजबूत हुई है.
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ग्लोबल पावर तक का सफर
भारत ने खाने की संकट से अपनी यात्रा शुरू की थी. आज देश अंतरिक्ष, परमाणु और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ चुका है. घरेलू बाजार मजबूत हुआ है और निर्यात में विविधता आई है. भारत अब केवल आकार में बड़ा नहीं, बल्कि स्ट्रक्चरल रूप से भी मजबूत देश बन चुका है. यह 77 साल की आर्थिक यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि है.
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