मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार पड़ी धीमी, 24 महीने के लो पर PMI, ये फैक्टर्स बने रोड़ा
दिसंबर में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार धीमी पड़ी और ग्रोथ 38 महीने के निचले स्तर पर पहुंची, हालांकि सेक्टर अब भी विस्तार के दायरे में बना हुआ है. नए ऑर्डर और एक्सपोर्ट की गति कमजोर रही, वहीं कम दबाव के चलते कंपनियों ने भर्तियों में सतर्क रुख अपनाया.
India’s Manufacturing PMI Dec: देश की मैन्युफैक्चरिंग की रफ्तार दिसंबर में थोड़ी धीमी पड़ गई. जिसके चलते S&P Global की ओर से जारी HSBC मैन्युफैक्चरिंग मैनेजर्स इंडेक्स दिसंबर में घटकर 55.0 पर आ गया, जो नवंबर में 56.6 था. यह आंकड़ा 24 महीनों का निचला स्तर है, हालांकि फिर भी ये 50 के काफी ऊपर है. ऐसे में ग्रोथ की उम्मीद बरकरार है.
S&P Global मार्केट इंटेलिजेंस की इकोनॉमिक्स एसोसिएट डायरेक्टर Pollyanna De Lima का कहना है कि सुस्ती के बावजूद भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने 2025 का अंत मजबूत आधार के साथ किया है. उनके मुताबिक नए ऑर्डर्स में तेज बढ़ोतरी से कंपनियां चालू वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में कमबैक करेंगी. साथ ही महंगाई के बड़े दबाव न होने से मांग को भी सपोर्ट मिलने की उम्मीद है.
नए ऑर्डर्स 2 साल के निचले स्तर पर
दिसंबर में नए कारोबार में बढ़ोतरी जारी रही, लेकिन इसकी रफ्तार दिसंबर 2023 के बाद सबसे धीमी रही. फैक्ट्री आउटपुट में भी इजाफा होने के बावजूद यह अक्टूबर 2022 के बाद की सबसे कमजोर गति रही. ऑर्डर्स की धीमी बढ़त के चलते कंपनियों ने कच्चे माल की खरीद में सतर्कता दिखाई.
एक्सपोर्ट ग्रोथ 14 महीने के निचले स्तर पर
दिसंबर में निर्यात ऑर्डर्स की रफ्तार भी कमजोर रही. अंतरराष्ट्रीय मांग 14 महीनों में सबसे धीमी गति से बढ़ी. जिन कंपनियों ने एक्सपोर्ट ग्रोथ देखी, उन्होंने एशिया, यूरोप और मिडिल ईस्ट से बेहतर मांग को इसकी वजह बताया. डे लीमा के मुताबिक दिसंबर में अंतरराष्ट्रीय बिक्री बढ़ने की बात कहने वाली कंपनियों की संख्या 2025 के औसत से करीब आधी रह गई है.
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रोजगार के मोर्चे पर भी दिखा दबाव
उत्पादन क्षमता पर दबाव कम रहने के कारण दिसंबर में कंपनियों ने सीमित संख्या में ही नई भर्तियां कीं. इससे मौजूदा जॉब ग्रोथ फेज मार्च 2024 में शुरू होने के बाद जॉब जनरेट करने में सबसे कमजोर महीना रहा. ज्यादातर कंपनियां मौजूदा क्षमता के साथ ही अपना काम चलाती नजर आईं.