अब नौकरी छूटे तो डर नहीं… सरकार 45 दिनों के भीतर देगी नई स्किल सीखने का पैसा, जानें नए नियमों में क्या बदला
इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड 2020 के तहत बनाए गए ड्राफ्ट नियमों में यह प्रस्ताव रखा गया है कि नौकरी से निकाले गए कर्मचारी को 45 दिनों के भीतर री-स्किलिंग के लिए पैसा दिया जाएगा. इस पैसे का मकसद यह है कि कर्मचारी नई स्किल सीख सके और जल्दी दोबारा रोजगार पा सके.
Retrenched staff: नौकरी जाना किसी भी कर्मचारी के लिए सबसे मुश्किल दौर होता है. अचानक इनकम बंद हो जाती है और आगे की राह भी साफ नजर नहीं आती. ऐसे समय में अगर दोबारा काम सीखने और नई नौकरी की तैयारी के लिए सरकार से मदद मिले, तो बड़ी राहत मिल सकती है. इसी सोच के साथ केंद्र सरकार एक नया कदम उठाने जा रही है.
इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड 2020 के तहत बनाए गए ड्राफ्ट नियमों में यह प्रस्ताव रखा गया है कि नौकरी से निकाले गए कर्मचारी को 45 दिनों के भीतर री-स्किलिंग के लिए पैसा दिया जाएगा. इस पैसे का मकसद यह है कि कर्मचारी नई स्किल सीख सके और जल्दी दोबारा रोजगार पा सके. सरकार का मानना है कि आज के बदलते समय में सिर्फ मुआवजा देना काफी नहीं है, बल्कि लोगों को नए रोल के लिए तैयार करना भी जरूरी है.
नौकरी छूटने के 45 दिन के भीतर मिलेगा पैसा
ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, अगर किसी कर्मचारी को नौकरी से निकाला जाता है तो उसे 45 दिनों के अंदर री-स्किलिंग फंड की रकम मिल जाएगी. यह रकम कर्मचारी की आखिरी सैलरी के बराबर 15 दिनों की मजदूरी होगी. सरकार यह पैसा सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में इलेक्ट्रॉनिक तरीके से ट्रांसफर करेगी. सरकार का कहना है कि इससे कर्मचारी इस रकम का इस्तेमाल नई स्किल सीखने और ट्रेनिंग लेने में कर सकेगा.
जिम्मेदारी भी तय की गई
ड्राफ्ट नियमों में नियोक्ता यानी कंपनी की जिम्मेदारी भी साफ तौर पर तय की गई है. अगर कोई कंपनी किसी कर्मचारी को रिट्रेंच करती है, यानी नौकरी से निकालती है, तो उसे 10 दिनों के भीतर री-स्किलिंग फंड की रकम सरकार के पास इलेक्ट्रॉनिक रूप से जमा करनी होगी. इसके बाद सरकार यह रकम कर्मचारी के खाते में भेजेगी.
TOI कि रिपोर्ट के हवाले से सरकार के एक अधिकारी के मुताबिक, यह फंड पहली बार री-स्किलिंग को संस्थागत रूप देता है. अधिकारी ने बताया कि जब कोई नौकरी खत्म हो जाती है या बेकार हो जाती है, तो सिस्टम की जिम्मेदारी बनती है कि कर्मचारी को नई नौकरी के लिए तैयार किया जाए. यह फंड सिर्फ नौकरी छूटने का मुआवजा नहीं है, बल्कि आगे के करियर के लिए एक सहारा है.
हर स्तर के कर्मचारियों को मिलेगा फायदा
सरकार ने साफ किया है कि यह री-स्किलिंग फंड सभी स्तर और सभी कैटेगरी के कर्मचारियों के लिए होगा. अधिकारियों का कहना है कि नई स्किल सीखने की जरूरत सिर्फ मजदूरों को ही नहीं, बल्कि हर तरह के कर्मचारियों को होती है. इसलिए यह योजना सभी पर लागू होगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ ले सकें. ड्राफ्ट नियमों में यह भी बताया गया है कि अगर किसी कंपनी में बाद में उसी तरह की नौकरी निकलती है, तो पहले निकाले गए कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी. इसके लिए कंपनी को रिट्रेंचमेंट से सात दिन पहले कर्मचारियों की एक सूची तैयार करनी होगी और उसे सार्वजनिक करना होगा.
पुराने कर्मचारियों को मिलेगी प्राथमिकता
अगर एक साल के भीतर कंपनी में वैसी ही कोई खाली जगह निकलती है और पहले निकाले गए कर्मचारी दोबारा काम करने की इच्छा जताते हैं, तो उन्हें बाहर के लोगों पर तरजीह दी जाएगी. यह प्राथमिकता कर्मचारियों की सीनियरिटी यानी सेवा अवधि के आधार पर दी जाएगी. यह प्रस्ताव नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है. री-स्किलिंग फंड और दोबारा नौकरी का मौका, दोनों मिलकर कर्मचारियों को नई शुरुआत करने में मदद करेंगे.
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