यूपीआई ने 2025 में तोड़े सारे रिकॉर्ड; 228 अरब ट्रांजेक्शन से हुई ₹300 लाख करोड़ की लेन-देन
भारत की डिजिटल पेमेंट सेवा यूपीआई ने 2025 में नए रिकॉर्ड कायम किए हैं. पूरे साल में 228 अरब लेनदेन हुए, जिनकी कुल कीमत 300 लाख करोड़ रुपये रही. दिसंबर में रिकॉर्ड 21.6 अरब ट्रांजेक्शन के साथ यूपीआई बड़े शहरों से छोटे कस्बों तक लोगों की पहली पसंद बन गया है. 2026 में यह और स्मार्ट और व्यापक होने की उम्मीद है.
UPI Transaction in 2025: भारत की डिजिटल पेमेंट सर्विस यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI ने 2025 में शानदार प्रदर्शन किया है. दिसंबर महीने में सबसे ज्यादा लेनदेन हुए, जबकि पूरे साल का आंकड़ा भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के नए डेटा के अनुसार, 2025 में यूपीआई पर कुल 228 अरब ट्रांजेक्शन हुए, जिनकी कुल कीमत करीब 300 लाख करोड़ रुपये थी. यह 2024 की तुलना में संख्या में 33 प्रतिशत और कीमत में 21 प्रतिशत ज्यादा है.
दिसंबर में रिकॉर्ड तोड़ ट्रांजेक्शन
दिसंबर 2025 में यूपीआई पर रिकॉर्ड 21.6 अरब ट्रांजेक्शन हुए, जिनकी कुल कीमत 30 लाख करोड़ रुपये रही. पिछले साल दिसंबर की तुलना में यह संख्या में 29 प्रतिशत और कीमत में 20 प्रतिशत ज्यादा है. महीने में औसतन हर दिन 698 मिलियन (69.8 करोड़) लेनदेन हुए और औसत रोजाना रकम 90,217 करोड़ रुपये रही. एक्सपर्ट का कहना है कि बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक यूपीआई अब लोगों की पहली पसंद बन गया है.
महीना ट्रांजेक्शन की संख्या (अरब में) वैल्यू (₹ ट्रिलियन में) जनवरी 17.0 23.5 फरवरी 16.1 22.0 मार्च 18.3 24.8 अप्रैल 17.9 23.9 मई 18.7 25.1 जून 18.4 24.0 जुलाई 19.5 25.1 अगस्त 20.0 24.9 सितंबर 19.6 24.9 अक्टूबर 20.7 27.3 नवंबर 20.5 26.3 दिसंबर 21.6 28.0 वर्ष ट्रांजेक्शन की संख्या (अरब में) वैल्यू (₹ ट्रिलियन में) 2023 117.6 182.9 2024 172.2 246.8 2025 228.3 299.8
एनपीसीआई का नया पोर्टल: ऑटोपे को और आसान बनाया
हाल ही में एनपीसीआई ने यूपीआई ऑटोपे के लिए एक खास पोर्टल शुरू किया है. इससे यूजर्स एक जगह पर अपनी सभी ऑटो पेमेंट (जैसे सब्सक्रिप्शन, बिजली बिल आदि) देख और मैनेज कर सकते हैं. यह सुविधा यूजर्स को ज्यादा कंट्रोल देती है और ई-कॉमर्स कंपनियों के छिपे तरीकों से बचाती है. सभी यूपीआई सदस्यों को 31 दिसंबर 2025 तक इसके नियम मानने थे.
2026 में यूपीआई की नई उड़ान
2026 में यूपीआई का इस्तेमाल छोटे शहरों और गांवों में और बढ़ने की उम्मीद है. नई सुविधाएं जैसे बायोमेट्रिक पहचान, स्थानीय भाषा में बातचीत और आसान ऑनबोर्डिंग से ज्यादा लोग जुड़ेंगे. क्यूआर कोड का इस्तेमाल बढ़ेगा और बड़े ट्रांजेक्शन भी ज्यादा होंगे. विशेषज्ञों के मुताबिक, अब विकास सिर्फ ज्यादा यूजर्स से नहीं, बल्कि स्मार्ट पेमेंट, एआई की मदद और विदेशी लेनदेन से आएगा.