India-New Zealand FTA: बिजनेस से लेकर वीजा तक की राह होगी आसान, सोमवार को लगेगी मुहर; जानें- भारत को क्या मिलेगा
India-New Zealand FTA: दोनों देशों ने पिछले साल 22 दिसंबर को इस समझौते के लिए बातचीत पूरी कर ली थी, जिसका लक्ष्य अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 5 अरब डॉलर तक पहुंचाना है. इस व्यापार समझौते में मैन्युफैक्चरिंग के लिए सहायता के उपाय भी शामिल हैं.

India-New Zealand FTA: न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने शुक्रवार को घोषणा की कि भारत और न्यूजीलैंड सोमवार, 27 अप्रैल को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर साइन करने के लिए तैयार हैं. दोनों देशों ने पिछले साल 22 दिसंबर को इस समझौते के लिए बातचीत पूरी कर ली थी, जिसका लक्ष्य अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 5 अरब डॉलर तक पहुंचाना है. यह भारत द्वारा की गई सबसे तेज व्यापार डील्स में से एक है, जिसकी शुरुआत मार्च 2025 में हुई थी और जो 9 महीनों के भीतर ही पूरी हो गई.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लक्सन ने मिलकर इस समझौते का अनावरण किया और इसे व्यापक, संतुलित और फ्यूचर ओरिएंटेड बताया.
15 वर्षों में 20 अरब डॉलर का प्लान
न्यूज एजेंसी पीटीआई ने एक अधिकारी के हवाले से बताया कि यह व्यापार समझौता न्यूजीलैंड के बाजार में भारतीय सामानों को टैरिफ-मुक्त पहुंच प्रदान कर सकता है और अगले 15 वर्षों में 20 अरब डॉलर तक का निवेश आकर्षित कर सकता है.
दिसंबर की शुरुआत में लक्सन ने कहा था कि भारत के साथ FTA से अधिक नौकरियां मिलेंगी, इनकम बढ़ेगी और एक्सपोर्ट में तेजी आएगी. उन्होंने इसे अपनी सरकार के पहले कार्यकाल में पूरा किया गया वादा बताया, क्योंकि इससे न्यूजीलैंड के बिजनेस के लिए भारत का विशाल कंज्यूमर बेस खुल जाएगा.
उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा, जिसके साथ टैगलाइन थी ‘बुनियादी चीजों को ठीक करना, भविष्य का निर्माण.’ क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा, ‘हमने कहा था कि हम अपने पहले कार्यकाल में भारत के साथ एक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) करेंगे और हमने ऐसा कर दिखाया है. इस ऐतिहासिक समझौते का मतलब है ज्यादा नौकरियां, अधिक आमदनी और ज्यादा निर्यात, क्योंकि इससे 1.4 अरब भारतीय उपभोक्ताओं के लिए दरवाजे खुल गए हैं.’
भारत-न्यूजीलैंड FTA: इसमें क्या है?
इस व्यापार समझौते के तहत कहा जा रहा है कि न्यूजीलैंड भारत के सभी एक्सपोर्ट पर जीरो-ड्यूटी एक्सेस देगा, जिससे टेक्सटाइल और कपड़ों, चमड़े और जूतों, इंजीनियरिंग सामान, दवाइयों और कृषि उत्पादों जैसे अहम सेक्टर्स के लिए बड़े मौके मिलेंगे. भारत अपनी लगभग 70 फीसदी टैरिफ लाइनों पर टैरिफ में ढील देगा, जिसमें न्यूजीलैंड के साथ होने वाले लगभग 95 फीसदी द्विपक्षीय व्यापार को शामिल किया जाएगा.
यह व्यापार समझौता सिर्फ सामानों के व्यापार तक ही सीमित नहीं है, क्योंकि न्यूजीलैंड 118 सर्विस सेक्टर्स में बाजार तक पहुंच देता है और IT, पेशेवर सेवाओं, दूरसंचार, निर्माण, पर्यटन और शिक्षा सहित 139 सब-सेक्टर्स में सबसे पसंदीदा राष्ट्र (MFN) का दर्जा देता है.
भारतीय छात्रों के लिए क्या?
विदेश में पढ़ाई करने के इच्छुक भारतीय छात्रों के लिए, यह व्यापार समझौता वादा करता है कि छात्रों को किसी भी तरह की संख्यात्मक सीमा का सामना नहीं करना पड़ेगा. साथ ही, STEM ग्रेजुएट्स को पढ़ाई के बाद तीन साल तक और डॉक्टोरल स्कॉलर्स को चार साल तक काम करने का अधिकार मिलेगा.
वीजा की राह होगी आसान
भारत-NZ FTA में IT, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर, शिक्षा और कंस्ट्रक्शन जैसे क्षेत्रों के 5,000 भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए एक टेम्पररी एम्प्लॉयमेंट एंट्री वीजा का भी प्रावधान है, साथ ही AYUSH प्रैक्टिशनर्स, योग इंस्ट्रक्टर्स, शेफ और संगीत शिक्षकों के लिए खास श्रेणियां भी हैं. इसके साथ ही सरकार हर साल 1,000 वर्क-एंड-हॉलिडे वीजा भी जारी करेगी.
कृषि क्षेत्र में सहयोग
निवेश के मोर्चे पर, न्यूजीलैंड सरकार ने अगले 15 साल में भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश को बढ़ावा देने का वादा किया है. इस व्यापार समझौते में शहद, सेब और कीवी फल के लिए ‘सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस’ के जरिए कृषि क्षेत्र में सहयोग भी शामिल है. साथ ही, डेयरी, चीनी, मसाले और खाने के तेल जैसी चीजों को बाजार तक पहुंच की शर्तों से बाहर रखकर संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित भी रखा गया है.
मैन्युफैक्चरिंग और मेडिकल
इस व्यापार समझौते में मैन्युफैक्चरिंग के लिए सहायता के उपाय भी शामिल हैं, जिसमें लकड़ी के लट्ठे, कोकिंग कोयला और धातु के कचरे और स्क्रैप जैसे जरूरी इनपुट तक ड्यूटी-फ्री पहुंच शामिल है.
दवा और मेडिकल डिवाइस बनाने वाली कंपनियों को भी US FDA, EMA और UK MHRA जैसे रेगुलेटर्स द्वारा ग्लोबल इंस्पेक्शन रिपोर्ट स्वीकार किए जाने से, रेगुलेटरी मंजूरी तेजी से मिलने का फायदा होने वाला है.
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