India-US Trade Deal Highlights: ज्वाइंट स्टेटमेंट की 5 बड़ी बातें, जानें कौन-सा सेक्टर खुला, कौन है सेफ और किसे मिला फायदा
भारत और अमेरिका ने एक अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क जारी किया है, जिससे आगे चलकर बड़ा द्विपक्षीय व्यापार समझौता यानी BTA किया जाएगा. इस फ्रेमवर्क में टैरिफ घटाने, डिजिटल ट्रेड को आसान बनाने, सप्लाई चेन मजबूत करने और गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने जैसे मुद्दे शामिल हैं.
India-US trade Deal Highlights: भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर एक अहम समझौते की रूपरेखा सामने आई है. दोनों देशों ने एक अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क जारी किया है, जिससे आगे चलकर बड़ा द्विपक्षीय व्यापार समझौता यानी BTA किया जाएगा. इस फ्रेमवर्क में टैरिफ घटाने, डिजिटल ट्रेड को आसान बनाने, सप्लाई चेन मजबूत करने और गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने जैसे मुद्दे शामिल हैं. India और United States के बीच जारी इस पहल को व्यापारिक रिश्तों में नई शुरुआत माना जा रहा है. साथ ही भारत की ओर से अगले 5 साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर तक की खरीद का संकेत भी दिया गया है. तो, आइए इन ट्रेड हाइलाइट्स के बारे में विस्तार से और जानते है.
समझौते का मकसद क्या है
अंतरिम ज्वाइंट स्टेटमेंट के मुताबिक दोनों देश इस अंतरिम ढांचे को जल्दी लागू करेंगे और इसके बाद एक विस्तृत BTA पर बातचीत आगे बढ़ाई जाएगी. इसका उद्देश्य यह है कि दोनों देशों को एक-दूसरे के बाजार तक ज्यादा आसान पहुंच मिले और लंबे समय से अटकी समस्याओं को धीरे-धीरे सुलझाया जाए.
भारत क्या देगा इस समझौते में
इस फ्रेमवर्क के तहत भारत ने अमेरिकी Industrial सामानों पर शुल्क घटाने या खत्म करने पर सहमति जताई है. इसके साथ ही कई खाद्य और कृषि प्रोडक्ट पर भी टैरिफ कम होंगे. इनमें पशु आहार के लिए इस्तेमाल होने वाला अनाज, लाल ज्वार, ड्राई फ्रूट, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और शराब जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं. सरकार ने यह भी कहा है कि मेडिकल डिवाइस, Food products और टेक्नोलॉजी से जुड़े सामानों में अमेरिकी निर्यातकों को जिन नियमों की वजह से परेशानी होती थी, उन्हें आसान बनाया जाएगा.
बदले में अमेरिका क्या देगा
अमेरिका ने अप्रैल 2025 के आदेश के तहत भारतीय सामानों पर 18 प्रतिशत का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की बात कही है. यह कपड़ा, चमड़ा, प्लास्टिक, रबर, केमिकल, हस्तशिल्प और कुछ मशीनरी प्रोडक्ट्स पर लागू होगा. हालांकि यह भी कहा गया है कि अगर अंतरिम समझौता सफल रहा, तो कई भारतीय वस्तुओं पर यह शुल्क हटाया जा सकता है. इनमें जेनेरिक दवाइयां, हीरे, आभूषण और विमान के पुर्जे शामिल हैं. कुछ विमानों और उनके हिस्सों पर पहले जो सुरक्षा कारणों से शुल्क लगाया गया था, उसे हटाने पर भी सहमति बनी है.
गैर-टैरिफ बाधाओं पर फोकस
इस फ्रेमवर्क का बड़ा हिस्सा उन नियमों से जुड़ा है, जो सीधे टैक्स नहीं होते लेकिन व्यापार को धीमा करते हैं. भारत ने मेडिकल उपकरणों से जुड़ी शिकायतों को देखने, टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट के आयात लाइसेंस आसान करने और छह महीने के भीतर यह तय करने का वादा किया है कि किन क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय मानकों को स्वीकार किया जा सकता है. दोनों देश यह भी चाहते हैं कि टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया आसान बने, ताकि कंपनियों का खर्च कम हो.
डिजिटल ट्रेड और सप्लाई चेन
समझौते में डिजिटल कारोबार को लेकर भी खास बात कही गई है. दोनों देश ऐसे नियम बनाने पर सहमत हुए हैं, जिससे ऑनलाइन व्यापार में भेदभाव या बेवजह की रुकावटें कम हों. इसके साथ ही सप्लाई चेन को मजबूत करने और निवेश नियमों में तालमेल बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है.
| प्वाइंट्स | India क्या देगा | United States क्या देगा |
|---|---|---|
| टैरिफ में बदलाव | सभी अमेरिकी इंडस्ट्रियल सामानों पर शुल्क घटाएगा या हटाएगा. | भारतीय सामानों पर 18% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाएगा, आगे चलकर घट सकता है. |
| कृषि व खाद्य प्रोडक्ट्स | अनाज, लाल ज्वार, ड्राई फ्रूट, फल, सोयाबीन तेल, वाइन और शराब पर ड्यूटी कम करेगा. | अंतरिम समझौता सफल होने पर कई भारतीय कृषि व इंडस्ट्रियल वस्तुओं पर राहत दे सकता है. |
| नॉन-टैरिफ बाधाएं | मेडिकल डिवाइस और टेक सामानों के नियम आसान करेगा. आयात लाइसेंस प्रक्रिया सुधारेगा. | कुछ भारतीय सेक्टरों को बेहतर बाजार पहुंच देगा. |
| विमान व ऑटो पार्ट्स | अगले 5 साल में अमेरिका से $500 अरब की एनर्जी, विमान और टेक सामान खरीदने का संकेत. | विमान और उनके पुर्जों पर पुराने सुरक्षा शुल्क हटाएगा. ऑटो पार्ट्स के लिए भारत को खास कोटा देगा. |
| फार्मा सेक्टर | अमेरिकी कंपनियों को भारत में आसान एंट्री देगा. | जांच पूरी होने पर जेनेरिक दवाओं पर राहत संभव. |
भारत की बड़ी खरीद योजना
इस समझौते का सबसे बड़ा आकर्षण भारत की ओर से किया गया बड़ा संकेत है. भारत अगले पांच साल में अमेरिका से करीब 500 अरब डॉलर के एनर्जी प्रोडक्ट्स, विमान, तकनीकी सामान, कीमती धातु और कोकिंग कोल खरीदने की योजना बना रहा है. इसके अलावा डेटा सेंटर में इस्तेमाल होने वाले ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट जैसे एडवांस्ड तकनीकी प्रोडक्ट का व्यापार भी बढ़ाया जाएगा.




