ईरान-इजरायल युद्ध के बीच महंगा हुआ कच्चा तेल, 12% तक उछला ब्रेंट क्रूड, ओपेक प्लस ने बढ़ाया प्रोडक्शन

अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने खाड़ी देशों में जवाबी कार्रवाई की, जिससे मध्य पूर्व में बड़ा संकट पैदा हो गया. इस तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर दिखा और ब्रेंट क्रूड 12 फीसदी उछलकर 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. जानकारों का कहना है कि यदि होरमुज मार्ग बंद होता है तो कीमतें 100 डॉलर तक जा सकती हैं.

क्रूड ऑयल Image Credit: Getty image

Crude Oil Prices: मध्य पूर्व में तेजी से बिगड़ते हालात का असर अब सीधे वैश्विक तेल बाजार पर दिखने लगा है. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद हालात खराब हो गए हैं. ईरान ने भी खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर जवाब दिया है. इस तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल दर्ज किया गया है. ब्रेंट क्रूड 76 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है. इसमें 5 फीसदी के करीब तेजी देखने को मिली है.

तेल बाजार में उछाल

अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई की है. दुबई, अबू धाबी, कतर, बहरीन, सऊदी अरब और ओमान जैसे देशों में तनाव बढ़ गया है. इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है. निवेशकों को आशंका है कि तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इसी डर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है.

ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई में तेज बढ़ोतरी

ब्रेंट क्रूड जो शुक्रवार को 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बंद हुआ था, उसमें एक ही झटके में 12 फीसदी तक की तेजी आ गई. यह 80 डॉलर के पार पहुंच गया था, जो पिछले साल जून के बाद पहली बार है. वहीं अमेरिका का वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट भी 8 फीसदी चढ़कर 70 डॉलर के ऊपर पहुंच गया. हालांकि बाद में इन दोनों में हल्की गिरावट देखने को मिली.साल 2026 के पहले दो महीनों में ही ब्रेंट करीब 19 फीसदी चढ़ चुका था.

33 लाख बैरेल की कैपेसिटी

ईरान ओपेक प्लस समूह का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक देश है. कुल समूह उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी करीब 12 फीसदी है. देश प्रतिदिन लगभग 33 लाख बैरल तेल उत्पादन की क्षमता रखता है. यह वैश्विक कुल उत्पादन का करीब 3 फीसदी है. ईरान की सबसे बड़ी रिफाइनरी प्रतिदिन 5 लाख बैरल तेल प्रोसेस कर सकती है. इसलिए वहां किसी भी तरह की बाधा का असर वैश्विक बाजार पर पड़ता है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नजर

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की सबसे अहम ऑयल सप्लाई का रास्ता में से एक है. वैश्विक तेल सप्लाई का लगभग 20 फीसदी इसी रास्ते से गुजरता है. LNG सप्लाई का भी बड़ा हिस्सा यहीं से जाता है. ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि स्ट्रेट बंद करने का इरादा नहीं है. ईरान का 90 फीसदी तेल निर्यात चीन को इसी मार्ग से जाता है.

100 डॉलर तक जा सकता है तेल

कई जानकार का मानना है कि यदि होरमुज मार्ग लंबी अवधि तक बंद रहा तो तेल की कीमतें जल्द ही 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं. हालांकि उनका यह भी कहना है कि यदि हालात जल्दी सामान्य होते हैं तो कीमतें ज्यादा समय तक हाई लेवल पर टिक नहीं पाएंगी.

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ओपेक प्लस ने बढ़ाया प्रोडक्शन

रविवार को हुई मासिक बैठक में ओपेक प्लस देशों ने अप्रैल से उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है. सऊदी अरब और रूस अप्रैल से प्रतिदिन 2 लाख 6 हजार बैरल अतिरिक्त उत्पादन करेंगे. यह बढ़ोतरी पिछले दिसंबर में तय 1 लाख 37 हजार बैरल से करीब डेढ़ गुना ज्यादा है. समूह का मकसद बाजार में स्थिरता लाना और संभावित सप्लाई संकट को बैलेंस करना है.