ईरान ने दी चेतावनी, एनर्जी ठिकानों पर हुआ हमला तो पूरी तरह बंद होगा होर्मुज; निशाने पर होंगे अमेरिकी एसेट्स

पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने उसके एनर्जी ठिकानों पर हमला किया तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा. यह रूट वैश्विक तेल और गैस सप्लाई के लिए बेहद अहम है, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा सकता है. मौजूदा हालात में तेल की कीमतों में तेजी आई है और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ रही है, जिसका असर अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर साफ नजर आ रहा है.

ईरान की सख्त चेतावनी Image Credit: AI/canva

Iran Hormuz Threat: पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने उसके एनर्जी ठिकानों पर हमला किया, तो वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद कर सकता है. यह कदम वैश्विक स्तर पर तेल और गैस सप्लाई को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे के भीतर होर्मुज को बिना किसी बाधा के खोलने की चेतावनी दी थी, जिसके जवाब में ईरान ने कड़ा रुख अपनाया है.

ईरान की सख्त चेतावनी, क्षेत्रीय ठिकानों को बताया निशाना

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने कहा है कि अगर देश के इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला होता है, तो पूरे क्षेत्र के महत्वपूर्ण ठिकानों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने भी संकेत दिया है कि उन देशों के एनर्जी और टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जा सकता है, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं. हालांकि, ईरान ने यह भी कहा है कि जो जहाज उसके “दुश्मनों” से जुड़े नहीं हैं, उन्हें समन्वय के साथ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी जा सकती है.

दुनिया की एनर्जी लाइफलाइन

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम शिपिंग रूट्स में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है. 28 फरवरी के बाद से इस मार्ग पर ईरान का नियंत्रण सख्त हो गया है, जिससे टैंकर मूवमेंट प्रभावित हुआ है. इसका असर वैश्विक बाजारों पर भी दिख रहा है, जहां ईंधन की कीमतों में तेज उछाल आया है और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है.

बढ़ते हवाई हमले और जवाबी कार्रवाई

जमीनी हालात भी लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. 21 मार्च को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई हिस्सों, खासकर तेहरान और होर्मुज के आसपास के इलाकों में बड़े हमले किए. इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर मिसाइल हमले किए. इजरायली सेना के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने 400 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइल दागी हैं, जिनमें से करीब 92 फीसद को हवा में ही रोक दिया गया.

नागरिकों पर असर और क्षेत्रीय तनाव

इस संघर्ष का असर आम नागरिकों पर भी पड़ रहा है. ईरान में 81000 से ज्यादा घर और इमारतें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जबकि इजरायल में 2700 से ज्यादा लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं. वहीं, लेबनान में हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच भी संघर्ष तेज हो गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है.

तेल कीमतों में उछाल

इस युद्ध का असर केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था भी इससे प्रभावित हो रही है. ब्रेंट क्रूड की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है, जो हाल के वर्षों का उच्च स्तर है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज पूरी तरह बंद होता है, तो वैश्विक एनर्जी संकट और गहरा सकता है और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है.

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