Gold-Silver Outlook: भारी गिरावट के बाद सोने-चांदी में दिख सकती है रिकवरी, लेकिन सीमित रहेगी तेजी; जानें कारण
सोना और चांदी में पिछले हफ्ते की बड़ी गिरावट के बाद अगले सप्ताह हल्की रिकवरी की उम्मीद है. हालांकि ऊंची ब्याज दरें, मजबूत डॉलर और वैश्विक संकेत कीमतों की तेजी को सीमित रख सकते हैं. इसको लेकर विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी है. जानें क्या है वजहें.
Gold Silver Price Outlook: पिछले हफ्ते आई तेज गिरावट के बाद सोना और चांदी की कीमतों में अगले सप्ताह कुछ हद तक संभलने के संकेत मिल रहे हैं. हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिकवरी सीमित रह सकती है, क्योंकि ऊंची ब्याज दरें और मजबूत अमेरिकी डॉलर अभी भी इन कीमती धातुओं पर दबाव बनाए हुए हैं. विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर प्रमुख वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी. खासतौर पर अमेरिका, ब्रिटेन और जापान के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज PMI डेटा, कंज्यूमर सेंटीमेंट और जॉबलेस क्लेम्स जैसे इंडिकेशन बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे. इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी सोना-चांदी के रुख को प्रभावित कर सकता है.
गिरावट से भरा था पिछला हफ्ता
पिछले सप्ताह घरेलू बाजार में कीमती धातुओं में जोरदार गिरावट देखने को मिली. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमत करीब 32,663 रुपये (लगभग 12.5 फीसदी) गिरकर 2.26 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई. वहीं सोना भी करीब 13,974 रुपये (लगभग 8.8 फीसदी) टूटकर 1.44 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ. यह गिरावट दर्शाती है कि बाजार में दबाव काफी मजबूत रहा.
इससे इतर, रिटेल बाजार में भी सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. हफ्ते भर में सोना 11000 रुपये और चांदी 28000 रुपये तक लुढ़की है. गिरावट के बाद पिछले कारोबारी सत्र में यानी शुक्रवार, 20 मार्च को सोना 1,47,218 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2,32,364 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई.
क्या है गिरावट की वजह?
विशेषज्ञों का कहना है कि इस गिरावट के पीछे वैश्विक केंद्रीय बैंकों के संकेत प्रमुख कारण रहे. अमेरिका के फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ इंग्लैंड, बैंक ऑफ जापान और यूरोपियन सेंट्रल बैंक ने महंगाई और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता जताई है. इससे यह संकेत मिला है कि फिलहाल ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम है, जिसने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया और सोने-चांदी में बिकवाली बढ़ी. अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी यही रुझान देखने को मिला. कॉमैक्स पर चांदी में दो अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जबकि सोना भी करीब 10 फीसदी तक फिसल गया. इससे साफ है कि गिरावट केवल घरेलू नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर रही है.
आगे कैसी रहेगी सोने-चांदी की चाल?
आने वाले समय को लेकर विशेषज्ञों की राय है कि सोना फिलहाल साइडवेज से हल्की गिरावट वाले दायरे में कारोबार कर सकता है. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 99-100 के आसपास मजबूत बना हुआ है और ऊंची ब्याज दरें सोने की रिकवरी में बाधा बन रही हैं. साथ ही, फेड की ओर से दरों में कटौती को लेकर सख्त रुख के कारण बाजार अब 2026 तक किसी बड़ी राहत की उम्मीद नहीं कर रहा, जिससे सोने की सुरक्षित निवेश के रूप में मांग कुछ कम हुई है.
लेकिन ये कुछ और कर रहे इशारा
हालांकि, लंबी अवधि के नजरिए से तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है. वैश्विक केंद्रीय बैंक अब भी अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ाने की रणनीति पर कायम हैं, जिससे सोने की बेसिक डिमांड मजबूत बनी हुई है. इसके अलावा, जियो पॉलिटिकल टेंशन भी समय-समय पर सोने को सपोर्ट देते हैं, जिससे कीमतों में बड़ी गिरावट पर रोक लग सकती है. घरेलू स्तर पर भी कुछ सकारात्मक कारक मौजूद हैं. भारत में शादी-ब्याह का सीजन और अक्षय तृतीया जैसे त्योहारों की मांग सोने-चांदी की कीमतों को सपोर्ट दे सकती है. ऐसे में आने वाले सप्ताह में बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच हल्की रिकवरी देखने को मिल सकती है, लेकिन किसी बड़ी तेजी के लिए वैश्विक संकेतों का अनुकूल होना जरूरी रहेगा.
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