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Prada ने रैंप पर उतारी ‘कोल्हापुरी’, 150 रुपये की चप्पल अब बन गई 1 लाख की फैशन स्टेटमेंट; क्या है पूरी कहानी

कभी 150 रुपये में मिलने वाली कोल्हापुरी चप्पल अब अंतरराष्ट्रीय फैशन का हिस्सा बन गई है. Milan Fashion Week में Prada के रैंप शो ने इस पारंपरिक भारतीय चप्पल को नई पहचान दी है. हालांकि डिजाइन चुराने के आरोपों के बाद ब्रांड को स्पष्टीकरण भी देना पड़ा. जानें पूरा मामला.

कोल्हापुरी चप्पल और कहानी Image Credit: @Money9live

Kolhapuri Chappal and Prada Controversy: कभी 150 रुपये में मिलने वाली साधारण सी दिखने वाली कोल्हापुरी चप्पल अचानक फैशन की दुनिया का स्टार बन गई है. वजह? इटली के मशहूर लग्जरी ब्रांड ‘Prada’ ने हाल ही में हुए Milan Fashion Week में अपने पुरुष मॉडल्स को ऐसी चप्पल पहनाकर रैंप पर उतारा, जिनकी डिजाइन बिल्कुल कोल्हापुरी चप्पल जैसी थी. इस एक रैंप शो ने भारत के इस सदियों पुराने पारंपरिक हस्तशिल्प को फिर से अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला दी. इस रैंप के साथ Prada को लेकर कई सवाल भी खड़े हुए. आइए विस्तार से जानते हैं पूरा मामला.

कहां से शुरू हुई कोल्हापुरी की कहानी?

कोल्हापुरी चप्पल की जड़ें महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले से जुड़ी हुई हैं. यह चप्पलें खास तौर पर हाथ से बनाई जाती हैं और इनमें सब्जी से रंगे चमड़े का इस्तेमाल होता है. इन्हें पारंपरिक तरीकों से बनाया जाता है और इनकी खास बात होती है इनका लचीला, टिकाऊ और बिना सिलाई का डिजाइन. 1998 में हस्तशिल्प विशेषज्ञ जया जेटली ने कोल्हापुर के इन कारीगरों का दौरा किया था.

उन्होंने देखा कि कैसे छोटे-छोटे 100 से ज्यादा दुकानों में कारीगर सुबह 6 से रात 8 बजे तक मेहनत कर रहे थे. उस वक्त इन चप्पलों की कीमत सिर्फ 70 से 150 रुपये के बीच थी. आज वही चप्पलें ब्रांडेड रूप में 1,500 रुपये से 2,500 रुपये में बिक रही हैं और अब Prada के जरिए इनकी कीमत 1 लाख रुपये तक पहुंचने की चर्चा हो रही है.

क्या है Prada का रोल- चप्पल या सैंडल?

22 जून 2025 को हुए Milan Fashion Week में Prada ने अपनी Spring/Summer 2026 कलेक्शन में 56 लुक्स पेश किए, जिनमें से 7 लुक्स में पुरुष मॉडल्स ने ऐसे फुटवियर पहने, जो हूबहू कोल्हापुरी चप्पल जैसे दिखते थे. हालांकि, Prada ने उन्हें “leather flat sandals” बताया और Kolhapuri शब्द का इस्तेमाल नहीं किया, जिससे सोशल मीडिया पर बवाल मच गया. लोगों ने इसे भारतीय डिजाइन की चोरी कहा और साभार देने की मांग उठाई.

मामला इतना बढ़ गया कि Prada को आधिकारिक बयान जारी करना पड़ा. Prada ने शनिवार को एक आधिकारिक में कहा कि उनकी डिजाइन “महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ जिलों में बनने वाली पारंपरिक भारतीय चप्पलों से प्रेरित है”. उन्होंने यह भी बताया कि वे इस मुद्दे पर महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री और एग्रीकल्चर से संपर्क में हैं.

क्या हुआ इसके बाद?

Prada के शो के बाद, Google पर ‘Kolhapuri Chappal’ की सर्च में जबरदस्त उछाल आया. ईटी अपनी एक रिपोर्ट में लिखता है कि पुणे स्थित ब्रांड Chappers के फाउंडर हर्षवर्धन पाटवर्धन ने बताया कि उनके ब्रांड की सोशल मीडिया इंगेजमेंट में 400-500 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है. इसी तरह, The Sole Sisters ब्रांड की फाउंडर चौडम्मा करिअप्पा ने कहा कि उनके पास कस्टमर इंक्वायरी और ऑर्डर्स में तेजी आई है.

ब्रांड्स अब कोल्हापुरी चप्पल की मूल आइडिया को बरकरार रखते हुए उन्हें नए रंगों, टेक्सचर और मॉडर्न डिजाइन के साथ पेश कर रहे हैं. इतना ही नहीं, Kolhapuri chappal को GI यानी Geographical Indication टैग भी मिला हुआ है. इसका मतलब है कि यह चप्पल सिर्फ कुछ खास जिलों में बनी होनी चाहिए और पारंपरिक तरीकों से बनाई जानी चाहिए, तभी उसे ‘Kolhapuri’ कहा जा सकता है.

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