जयप्रकाश एसोसिएट्स बोली के खिलाफ वेदांता की याचिका NCLAT ने खारिज की, अडानी को मिला सुकून

NCLAT ने वेदांता की चुनौती खारिज कर अडानी ग्रुप की 14,535 करोड़ की बोली को मंजूरी दे दी है. जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण का रास्ता अब लगभग साफ हो गया है, जिससे भारत के कॉरपोरेट सेक्टर में बड़ी हलचल मच गई है.

NCLT Image Credit: Money9 Live

कॉरपोरेट जगत में लंबे समय से चर्चा में चल रही जयप्रकाश एसोसिएट्स (JAL) की बोली प्रक्रिया पर अब बड़ा फैसला आ गया है. राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय अधिकरण (NCLAT) ने Vedanta Ltd की याचिका खारिज करते हुए Adani Enterprises की बोली को बरकरार रखा है. इस फैसले के साथ ही अडानी समूह के लिए JAL के अधिग्रहण का रास्ता लगभग साफ हो गया है.

CoC के फैसले को सही ठहराया

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, NCLAT की बेंच ने साफ कहा कि लेनदारों की समिति (CoC) ने “कमर्शियल समझदारी” के आधार पर फैसला लिया और इसमें कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई. ट्रिब्यूनल ने माना कि NCLT द्वारा अडानी की 14,535 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी देना सही था और इसमें दखल देने का कोई आधार नहीं बनता.

वेदांता की दलील क्यों नहीं चली

वेदांता ने दावा किया था कि उसकी संशोधित बोली 16,070 करोड़ रुपये की थी, जो अडानी के प्रस्ताव से अधिक थी. कंपनी ने प्रक्रिया की पारदर्शिता और मूल्यांकन के तरीके पर सवाल उठाए थे. लेकिन ट्रिब्यूनल ने कहा कि

  • बोली की समयसीमा के बाद बदलाव स्वीकार नहीं किए जा सकते
  • सिर्फ ज्यादा कीमत ही निर्णायक नहीं होती
  • व्यवहार्यता और निष्पादन क्षमता भी अहम होती है
  • इस आधार पर वेदांता की दलील को खारिज कर दिया गया.

क्या है पूरा मामला

जयप्रकाश एसोसिएट्स को जून 2024 में दिवाला प्रक्रिया में भेजा गया था, क्योंकि कंपनी पर 57,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज था. इस प्रक्रिया में 28 कंपनियों ने रुचि दिखाई, लेकिन अंतिम दौर में अडानी और वेदांता प्रमुख दावेदार बनकर उभरे.
नवंबर 2025 में CoC ने 93.81% वोट के साथ अडानी समूह की योजना को मंजूरी दी. वेदांता ने बाद में संशोधित बोली दी, लेकिन नियमों के चलते उसे खारिज कर दिया गया.

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आगे क्या होगा

अब यह फैसला अडानी समूह के लिए JAL के अधिग्रहण का रास्ता खोलता है. हालांकि, वेदांता चाहे तो इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है. JAL के पास रियल एस्टेट, सीमेंट, पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में अहम संपत्तियां हैं, जिनमें ग्रेटर नोएडा का फॉर्मूला वन सर्किट भी शामिल है. ऐसे में यह अधिग्रहण अडानी समूह के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.