IPO से पहले NSE ने दिखाया दम, नेट प्रॉफिट बढ़कर 3120 करोड़ रुपये पहुंचा; 13 फीसदी बढ़ा रेवेन्यू

भारत के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज NSE ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए हैं. कंपनी का नेट प्रॉफिट 6.7 फीसदी बढ़कर 3,120 करोड़ रुपये और रेवेन्यू 13 फीसदी बढ़ा है. US-Iran युद्ध के बीच बढ़ी बाजार की अस्थिरता से ट्रेडिंग गतिविधियों में तेजी आई, जिसका फायदा NSE को मिला है.

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Highlights

  • NSE ने पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन किया है.
  • नेट प्रॉफिट 6.7 फीसदी बढ़कर 3,120 करोड़ रुपये हो गया है.
  • अप्रैल-जून तिमाही में ट्रेडिंग ऑपरेशंस से रेवेन्यू 4,100 करोड़ रुपये रहा है.

NSE Q1 Results: भारत के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज, NSE ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है. US-Iran युद्ध के कारण वैश्विक बाजारों में बढ़ी अस्थिरता के बीच निवेशकों की ट्रेडिंग गतिविधियां तेज रहीं, जिसका सीधा फायदा NSE को मिला. जून तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 6.7 फीसदी बढ़कर 3,120 करोड़ रुपये हो गया. एक साल पहले इसी अवधि में NSE का मुनाफा 2,920 करोड़ रुपये था.

13 फीसदी बढ़ा रेवेन्यू

NSE ने अपनी वेबसाइट पर जारी बयान में बताया कि तिमाही के दौरान कंपनी के रेवेन्यू में 13 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. वहीं, ट्रेडिंग ऑपरेशंस से होने वाला रेवेन्यू 12.8 फीसदी बढ़कर 4,100 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. यह प्रदर्शन ऐसे समय में आया है, जब NSE इस साल अपने IPO की तैयारी कर रहा है.

बढ़ी बाजार की अस्थिरता का मिला फायदा

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है. आमतौर पर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने पर निवेशकों और ट्रेडर्स की खरीद-बिक्री भी बढ़ जाती है. इसी वजह से NSE पर इक्विटी, डेरिवेटिव्स और अन्य सेगमेंट में ट्रेडिंग वॉल्यूम में इजाफा हुआ, जिससे एक्सचेंज की कमाई बढ़ी.

NSE दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव्स एक्सचेंज में से एक माना जाता है. ऐसे में बाजार में वोलेटिलिटी बढ़ने पर इसका सीधा फायदा एक्सचेंज को मिलता है, क्योंकि अधिक ट्रेडिंग होने से ट्रांजैक्शन फी और अन्य शुल्क के जरिए आय बढ़ती है.

IPO से पहले निवेशकों के लिए अच्छी खबर

NSE लंबे समय से अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) को लेकर तैयारी कर रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी इस साल के अंत तक IPO ला सकती है. मौजूदा शेयरधारकों का लक्ष्य करीब 3 अरब डॉलर के शेयर बेचने का है. जून तिमाही के मजबूत नतीजे NSE के IPO के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं. बेहतर मुनाफा और बढ़ती आय से निवेशकों का भरोसा मजबूत हो सकता है, जिससे IPO को अच्छा रिस्पॉन्स मिलने की संभावना बढ़ जाएगी.

ट्रेडिंग से होने वाली कमाई में तेज बढ़ोतरी

NSE के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में ट्रेडिंग ऑपरेशंस से रेवेन्यू 4,100 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 12.8 फीसदी अधिक है. इससे साफ है कि निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और अधिक ट्रेडिंग वॉल्यूम ने एक्सचेंज की कमाई को मजबूत किया. विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में वैश्विक घटनाओं, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना रहा. इसका असर ट्रेडिंग गतिविधियों पर भी देखने को मिला.

SEBI के साथ पुराने विवाद के निपटारे पर सहमति

NSE ने अपने बयान में यह भी जानकारी दी कि SEBI ने लगभग एक दशक पुराने अनफेयर मार्केट एक्सेस मामले के निपटारे के लिए सिद्धांततः सहमति दे दी है. इस समझौते के तहत NSE ने 1,490 करोड़ रुपये का भुगतान करने पर सहमति जताई है. यह राशि SEBI के इतिहास में किसी मामले के निपटारे के लिए सबसे बड़ी रकम मानी जा रही है. यह मामला कई वर्षों से लंबित था और माना जा रहा था कि इसी कारण NSE के IPO में देरी हो रही थी. अब इस विवाद के सुलझने से कंपनी के IPO का रास्ता और साफ हो सकता है.

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.