पेट्रोल पंप पर कितना होता है पेट्रोल- डीजल का स्टॉक, कितने दिन का रहता है रिजर्व, जानें क्यों लग रही लंबी लाइन
ईरान अमेरिका और इजरायल के तनाव के बीच भारत में गैस की कमी की खबरें सामने आई हैं, लेकिन सरकार ने साफ किया है कि पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है. अफवाहों के कारण कई जगह पेट्रोल पंपों पर भीड़ बढ़ गई. नियमों के अनुसार पेट्रोल पंपों पर 15 से 45 किलोलीटर तक टैंक क्षमता होती है और 3 दिन का स्टॉक रखना जरूरी है.
Petrol Pump Capacity: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी युद्ध के चलते पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट पैदा हो गया है. इसका असर भारत में भी देखने को मिल रहा है और देश में गैस की कमी की स्थिति बन रही है. इसे देखते हुए सरकार ने गैस सप्लाई को लेकर कुछ गाइडलाइन जारी की हैं. हालांकि यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि देश में केवल गैस की कमी है, पेट्रोल और डीजल की नहीं. सरकार ने साफ किया है कि देश में पेट्रोल और डीजल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं.
लेकिन पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर अफवाह फैल गई कि पेट्रोल और डीजल की भी कमी हो सकती है. इसका नतीजा यह हुआ कि देश के कई राज्यों में पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी और अफरातफरी का माहौल बन गया. कई लोगों ने शिकायत की कि पेट्रोल पंपों पर तेल खत्म हो गया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि पेट्रोल पंप की क्षमता कितनी होती है.
पेट्रोल पंप पर कितनी होती है टैंक क्षमता
भारत में पेट्रोल पंपों पर अंडरग्राउंड टैंक की क्षमता आमतौर पर PESO का मानक 15000 लीटर से 45000 लीटर के बीच होता है. यह क्षमता पंप के आकार, लोकेशन और बिक्री पर निर्भर करती है. बड़े शहरों और हाईवे पर स्थित पंपों में आमतौर पर ज्यादा क्षमता वाले टैंक होते हैं, जिससे वे लगातार मांग को पूरा कर पाते हैं. वहीं छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम क्षमता वाले टैंक होते हैं. हालांकि यह कोई तय नियम नहीं है.
3 दिन का स्टॉक रखना जरूरी
पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (PESO) के नियमों के अनुसार, पेट्रोल पंपों को निर्बाध सप्लाई बनाए रखने के लिए कम से कम 3 दिनों की औसत बिक्री के बराबर स्टॉक रखना जरूरी होता है. यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि किसी भी सप्लाई बाधा की स्थिति में ग्राहकों को परेशानी न हो और बाजार में ईंधन की कमी न पैदा हो.
टैंकर सप्लाई का क्या है नियम
पेट्रोल और डीजल की सप्लाई के लिए आमतौर पर 12000 से 20000 लीटर क्षमता वाले टैंकर इस्तेमाल किए जाते हैं. ये टैंकर रिफाइनरी या डिपो से सीधे पेट्रोल पंप तक ईंधन पहुंचाते हैं. टैंकरों की आवाजाही और लोडिंग-अनलोडिंग की प्रक्रिया तय नियमों के तहत होती है.
PESO के नियमों के अनुसार 25000 लीटर से ज्यादा ईंधन के स्टोरेज या हैंडलिंग के लिए सरकारी लाइसेंस लेना अनिवार्य है. लेकिन इसे कम क्षमता के लिए कंपनियों से परमिशन लेनी पड़ती है. ये नियम सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाए गए हैं. बिना लाइसेंस के इतनी मात्रा में ईंधन रखना गैरकानूनी है.
फिर क्यों लग रही लंबी लाइन
असल में सरकार बार-बार कह रही है कि देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है. लेकिन अफवाहों का बाजार गरम है. ऐसे में लोग अफरा-तफरी में खरीदारी कर रहे हैं. जरूरत से ज्यादा पेट्रोल और डीजल की खरीदारी लोग कर रहे हैं. पेट्रोल पंप पर ईंधन की खपत सामान्य दिनों में तुलना में कहीं ज्यादा हो गई है. जिसकी वजह से स्टॉक जल्द खत्म हो रहा है. इस कारण ही लंबी लाइनें लग रही है. हकीकत यह है कि स्टॉक की कोई किल्लत नहीं है. ऐसे में लोगों को अफवाहों से बचना चाहिए और सामान्य तौर पर खरीदारी करना चाहिए.
पेट्रोलियम नियम 2002 का पालन जरूरी
भारत में ईंधन से जुड़े सभी कार्य Petroleum Rules 2002 के तहत किए जाते हैं. इसमें स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट और सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं को शामिल किया गया है. इन नियमों का पालन करना हर पेट्रोल पंप और संबंधित कंपनियों के लिए अनिवार्य है.
इसके अलावा Indian Oil Corporation Limited और Bharat Petroleum Corporation Limited जैसी सरकारी तेल कंपनियां भी अपने स्तर पर सप्लाई और स्टोरेज से जुड़ी गाइडलाइन जारी करती हैं. इनके टेंडर डॉक्यूमेंट्स में टैंक क्षमता और सप्लाई सिस्टम की विस्तृत जानकारी दी जाती है.
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