नियमों का पालन नहीं करना HDFC बैंक को पड़ा महंगा, RBI ने लगाया 91 लाख का जुर्माना; जानें क्या होगा ग्राहकों पर असर
RBI ने HDFC Bank पर KYC अनुपालन, ब्याज दर निर्धारण और आउटसोर्सिंग नियमों के उल्लंघन पर 91 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. जांच में पाया गया कि बैंक ने एक ही प्रकार के लोन पर अलग अलग बेंचमार्क उपयोग किए और KYC वेरिफिकेशन बाहरी एजेंटों को सौंप दिया. RBI ने यह कार्रवाई बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के तहत की है.
RBI Penalty: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने HDFC Bank पर नियमों के उल्लंघन के कारण 91 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. यह कार्रवाई KYC, ब्याज दर और आउटसोर्सिंग नियमों के पालन न करने से जुड़ी है. RBI ने बताया कि जांच में बैंक द्वारा कई प्रक्रियाओं में कमी पाई गई थी. बैंक पर आरोप है कि उसने एक ही तरह के लोन के लिए अलग-अलग बेंचमार्क का उपयोग किया और सहायक कंपनी के माध्यम से ऐसा बिजनेस कराया जो बैंकिंग कानून के अनुसार मान्य नहीं है.
क्यों लगाया गया जुर्माना
RBI ने कहा कि बैंक ने ब्याज दर निर्धारण और KYC जांच के मामलों में दिशा निर्देशों का पालन नहीं किया. बैंक ने कुछ ग्राहकों की KYC जांच बाहरी एजेंटों को सौंप दी थी, जो नियमों के अनुसार उचित नहीं माना जाता.
किस कानून के तहत की गई कार्रवाई
यह कार्रवाई बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के सेक्शन 47A 1 c और सेक्शन 46(4)i के तहत की गई है. RBI ने 18 नवम्बर 2025 को आदेश जारी किया था. RBI ने बैंक की मार्च 2024 की स्थिति का मूल्यांकन किया था. इसके आधार पर बैंक को शो कॉज नोटिस भेजा गया और जवाब की समीक्षा के बाद जुर्माने का फैसला लिया गया.
किन नियमों का हुआ उल्लंघन
जांच में यह पाया गया कि बैंक ने एक ही कैटेगरी के लोन पर अलग-अलग बेंचमार्क का उपयोग किया, जिससे रेगुलेटरी नियमों का पालन प्रभावित हुआ. इसके अलावा बैंक की सहायक कंपनी को ऐसी गतिविधियां कराई गई जो नियमों के अनुसार अप्रूव्ड नहीं थी. KYC अनुपालन की जिम्मेदारी भी बैंक ने बाहरी एजेंटों को सौंप दी थी, जबकि यह कार्य बैंक के अधिकार और दायित्व के अंतर्गत आता है. RBI का मानना है कि ये सभी कदम निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं थे और इसी कारण कार्रवाई की गई.
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ग्राहकों पर असर नहीं
RBI ने साफ किया कि यह जुर्माना केवल अनुपालन और प्रक्रिया से जुड़ा है. ग्राहकों के लेनदेन या किसी समझौते की वैधता पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा. RBI ने कहा कि यह कार्रवाई आगे की किसी अन्य नियामक कदम को रोकती नहीं है. यदि जरूरत पड़ी तो बैंक के विरुद्ध और कदम उठाए जा सकते हैं.
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