RBI ने ग्राहकों के होने वाले नुकसान के लिए कंपनसेशन की लिमिट 30 लाख रुपये की, नया नियम 1 जुलाई से होगा लागू

RBI ओम्बड्समैन के पास शिकायतकर्ता के समय के नुकसान, हुए खर्च, उत्पीड़न या मानसिक परेशानी के लिए 3 लाख रुपये तक का कंपनसेशन देने की शक्ति भी हो सकती है. यह खास लिमिट 1 लाख रुपये से बढ़ाकर की गई है. यह नया नियम 1 जुलाई, 2026 से लागू होगा.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (फाइल फोटो) Image Credit: Getty image

भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने ओम्बड्समैन (लोकपाल) को शिकायत करने वाले ग्राहकों को 30 लाख रुपये तक का कंपनसेशन देने का अधिकार दिया है, जो पहले की 20 लाख रुपये की सीमा से 50 फीसदी ज्यादा है. यह कंपनसेशन उन रेगुलेटेड संस्थाओं द्वारा दिया जाएगा जिनके खिलाफ सेवाओं में कमी के लिए शिकायत दर्ज की गई है. यह कंपनसेशन सिर्फ शिकायतकर्ता को हुए नुकसान के लिए है, जबकि ओम्बड्समैन के सामने लाए जाने वाले विवाद की रकम पर कोई लिमिट नहीं है, जिसके लिए ओम्बड्समैन या उनके डिप्टी सेटलमेंट करवा सकते हैं या अवॉर्ड दे सकते हैं.

3 लाख रुपये तक का कंपनसेशन

इसके अलावा, RBI ओम्बड्समैन के पास शिकायतकर्ता के समय के नुकसान, हुए खर्च, उत्पीड़न या मानसिक परेशानी के लिए 3 लाख रुपये तक का कंपनसेशन देने की शक्ति भी हो सकती है. यह खास लिमिट 1 लाख रुपये से बढ़ाकर की गई है. यह नया नियम 1 जुलाई, 2026 से लागू होगा.

ओम्बड्समैन के पास शिकायत करा सकते हैं दर्ज

अगर रेगुलेटेड एंटिटीज से 30 दिनों में उनकी शिकायतों का जवाब नहीं मिलता है, या वे समाधान से संतुष्ट नहीं हैं, तो परेशान ग्राहक RBI ओम्बड्समैन के पास शिकायत दर्ज कर सकते हैं. हालांकि, RBI ओम्बड्समैन ऐसी शिकायतें स्वीकार नहीं करेगा जो किसी कोर्ट, ट्रिब्यूनल या आर्बिट्रेटर या किसी अन्य न्यायिक या अर्ध-न्यायिक फोरम के सामने पेंडिंग हैं.

RBI ने कहा, ‘प्रस्तावित सीमाएं 30 लाख रुपये (परिणामी नुकसान) और 3 लाख रुपये (समय/खर्च/परेशानी)—एक तरफ उपभोक्ताओं को सार्थक राहत देने और रोक लगाने और दूसरी तरफ रेगुलेटेड संस्थाओं के हितों के बीच एक समझदारी भरा संतुलन बनाती हैं.’

कंपनसेशन के खिलाफ अपील

रेगुलेटेड एंटिटीज शिकायतकर्ता के अवॉर्ड स्वीकार करने वाले लेटर की तारीख से 30 दिनों के अंदर अपीलीय अथॉरिटी के सामने कंपनसेशन के खिलाफ अपील कर सकती हैं. रेगुलेटर ने विरोध में फीडबैक मिलने के बावजूद प्रस्तावित कंपनसेशन की रकम को ज्यादा रखा है. उसे खास तौर पर प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPI) जारी करने वालों से 30 लाख रुपये के मुआवज़े के खिलाफ एक कमेंट मिला था, जो आमतौर पर कम वॉल्यूम वाले ट्रांजैक्शन को हैंडल करते हैं.

कंपनसेशन के खिलाफ शिकायत

इसमें आगे कहा गया है, ‘इस स्कीम के तहत कंपनसेशन के खिलाफ अपील सिद्धांतों पर आधारित और एंटिटी-न्यूट्रल है और तय की गई रकम ऊपरी सीमा है, जबकि असल मुआवज़ा हर मामले के तथ्यों और खूबियों के आधार पर ओम्बड्समैन तय करेगा.’

कमर्शियल बैंक, रीजनल रूरल बैंक, स्टेट कोऑपरेटिव बैंक, सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक, अर्बन कोऑपरेटिव बैंक, डिपॉजिट लेने वाली नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को छोड़कर) और कम से कम 100 करोड़ रुपये की एसेट वाली NBFCs, PPI जारी करने वाली कंपनियां और क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनियां इस स्कीम के तहत आएंगी.

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