अमेरिका-ईरान में युद्ध की आहट से तेल बाजार में उबाल, क्रूड ऑयल के दाम $71 के पार; क्या $100 तक पहुंचेंगी कीमतें
ईरान परमाणु वार्ता टूटने और अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें 71 डॉलर से आगे पहुंच गई हैं. मध्य-पूर्व में सैन्य तैनाती और होर्मुज जलडमरूमध्य पर जोखिम के कारण बाजार में युद्ध प्रीमियम बढ़ा है. विश्लेषकों का मानना है कि टकराव बढ़ने पर ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है.
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान परमाणु वार्ता के टूटने की खबरों के बीच अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में तेजी देखने को मिल रही है. 20 फरवरी 2026 को ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर करीब 71 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गई जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 66.55 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव बढ़ता है, तो क्रूड आयल की कीमत जल्द ही 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू सकती है.
क्या है मामला
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने मध्य-पूर्व में दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और करीब 50 फाइटर जेट तैनात किए हैं. वहीं ईरान भी खाड़ी क्षेत्र में सैन्य अभ्यास कर रहा है. जिनेवा में हुई परमाणु वार्ता बेनतीजा खत्म हो गई, जिससे बाजार में युद्ध की आशंका बढ़ गई है. अमेरिकी प्रशासन ने ईरान को फरवरी के अंत तक रियायत देने की समयसीमा दी है. अगले 10 दिन तेल बाजार के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं.
क्यों बढ़ सकती हैं तेल की कीमतें
तेल कीमतों में तेजी का बड़ा कारण होर्मुज जलडमरूमध्य है. यह दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का करीब 31% हिस्सा संभालता है. अगर इस रास्ते में कोई बाधा आती है, तो वैश्विक सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई होती है और ईरान जवाबी कदम उठाता है, तो तेल की कीमत कुछ ही दिनों में 100 डॉलर के पार जा सकती है.
सेफ हेवेन की तरफ लौट रहे निवेश
हालांकि अगर कूटनीतिक बातचीत दोबारा शुरू होती है, तो कीमतें 65-70 डॉलर के दायरे में लौट सकती हैं. फिलहाल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और निवेशक जियो-पॉलिटिकल घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं. सोना और प्राकृतिक गैस जैसी सेफ हेवेन संपत्तियों में भी तेजी देखी जा रही है. ग्लोबल शेयर बाजारों में भी इस तनाव का असर दिखने लगा है. अमेरिका और ईरान में युद्ध की आशंका को देखते हुए निवेशकों ने बिकवाली शुरू कर दी है.
विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की ऊंची कीमतें वैश्विक महंगाई और अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकती हैं. अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें बढ़ने से आर्थिक दबाव भी बढ़ सकता है. कुल मिलाकर, आने वाले कुछ दिन वैश्विक ऊर्जा बाजार और निवेशकों के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं.
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