स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अमेरिकी छूट के बावजूद रूस के तेल भुगतान से दूरी बनाई, जानें क्यों है SBI अलर्ट

जानकारों का कहना है कि अमेरिकी प्रतिबंधों में थोड़ी बहुत ढील देने के बावजूद, भारत की रूस से क्रूड ऑयल खरीद के लिए वित्तीय चैनल पूरी तरह से फिर से सक्रिय नहीं हो पाए हैं. अक्टूबर में रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध लगने के बाद, SBI ने रूस से तेल से जुड़े किसी भी भुगतान में मदद नहीं की.

कच्चे तेल की कीमतों का असर. Image Credit: Getty image

भारत के सबसे बड़े बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), ने रूस से तेल की खरीद के भुगतान में शामिल होने से इनकार कर दिया है, भले ही अमेरिकी सरकार ने भारत के लिए अस्थायी छूट दी हो. बैंक को इस बात का भरोसा नहीं है कि यह छूट कितने समय तक रहेगी, और इसी वजह से वह ऐसे लेन-देन में शामिल नहीं होना चाहता. बैंक का मानना है कि रूस से तेल के भुगतान में शामिल होने से उसके लिए जोखिम पैदा हो सकते हैं. SBI के पास ग्लोबल मार्केट्स में बड़ा लोन पोर्टफोलियो है. इसके चलते बैंक की प्रतिष्ठा पर भी असर पड़ सकता है. बैंक ने ब्लूमबर्ग न्यूज से संपर्क करने पर कोई टिप्पणी नहीं की.

क्या है जानकारों का कहना?

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जानकारों का कहना है कि अमेरिकी प्रतिबंधों में थोड़ी बहुत ढील देने के बावजूद, भारत की रूस से क्रूड ऑयल खरीद के लिए वित्तीय चैनल पूरी तरह से फिर से सक्रिय नहीं हो पाए हैं. अक्टूबर में रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध लगने के बाद, SBI ने रूस से तेल से जुड़े किसी भी भुगतान में मदद नहीं की. हालांकि पिछले साल कुछ भारतीय बैंक ऐसे लेन-देन पर विचार करने के लिए तैयार थे, बशर्ते कि वे बैंक ब्लैकलिस्टेड न हों और अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन करें.

SBI सतर्क

SBI की यह सतर्कता इस समय जियो-पॉलिटिक्स यानी अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक तनाव के बीच समझी जा रही है. बैंक अपने अंतरराष्ट्रीय लोन पोर्टफोलियो का 26 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका में रखता है, जो दिसंबर के अंत तक कुल 6.93 लाख करोड़ रुपये ($75.1 बिलियन) था. यही वजह है कि बैंक अपने अमेरिकी कारोबार को सुरक्षित रखने के लिए सतर्कता बरत रहा है.

अमेरिका ने दिया था अस्थाई छूट

ईरान में चल रही जंग के चलते तेल संकट पैदा होने की स्थिति के बीच अमेरिका ने हाल में ही एक अहम फैसला लिया था. अमेरिकी सरकार ने रूस को अगले 30 दिन तक भारत को तेल बेचने की अस्थायी अनुमति दी थी. अमेरिका ने यह छूट ग्लोबल ऑयल मार्केट पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए दी थी. यह केवल 30 दिन की टेंपरेरी छूट है. ईरान में जंग शुरू होने के बाद यह चिंता जताई जा रही थी कि भारत में भी तेल की कमी हो सकती है. सरकार ने पहले ही बताया था कि भारत के पास लगभग 50 दिन का तेल रिजर्व मौजूद है.