टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर संशय, बोर्ड मीटिंग में उठा ये बड़ा मामला
बोर्ड के दूसरे सदस्यों ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का समर्थन किया, और नुकसान की वजह ग्रीनफील्ड इन्वेस्टमेंट और उनके मैच्योर होने के लिए जरूरी जेस्टेशन पीरियड को बताया. इस रीअपॉइंटमेंट के लिए एक स्पेशल रेजॉल्यूशन की जरूरत है और इसमें 65 साल की उम्र के बाद नॉन-एग्जीक्यूटिव रोल के लिए टाटा संस की रिटायरमेंट पॉलिसी में छूट शामिल है.
टाटा संस के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने मंगलवार को टाटा संस की बोर्ड मीटिंग में मतभेद होने के बाद, तीसरे टर्म के लिए अपनी दोबारा नियुक्ति पर चर्चा टालने के लिए कहा, मामले से जुड़े लोगों ने इस बात की जानकरी दी. ईटी के अनुसार, बोर्ड मीटिंग के दौरान, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा ग्रुप के नए बिजनेस से हुए नुकसान का मुद्दा उठाया, जिससे इस मामले पर डिटेल में चर्चा हुई. बोर्ड के दूसरे सदस्यों ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का समर्थन किया, और नुकसान की वजह ग्रीनफील्ड इन्वेस्टमेंट और उनके मैच्योर होने के लिए जरूरी जेस्टेशन पीरियड को बताया.
कब खत्म हो रहा मौजूदा टर्म?
नोएल टाटा, वेणु श्रीनिवासन के साथ टाटा संस के बोर्ड में टाटा ट्रस्ट्स के नॉमिनी हैं. चंद्रशेखरन का मौजूदा टर्म तुरंत खत्म नहीं हो रहा है. उनके पास इस रोल में फरवरी 2027 तक एक साल का समय है. मीटिंग में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और वाइस चेयरमैन श्रीनिवासन समेत सभी बोर्ड मेंबर शामिल हुए.
रिटायरमेंट पॉलिसी में छूट
इस रीअपॉइंटमेंट के लिए एक स्पेशल रेजॉल्यूशन की जरूरत है और इसमें 65 साल की उम्र के बाद नॉन-एग्जीक्यूटिव रोल के लिए टाटा संस की रिटायरमेंट पॉलिसी में छूट शामिल है. चंद्रशेखरन जून में 63 साल के हो जाएंगे. 2017 में एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनने के बाद, चंद्रशेखरन ने ग्रुप में कंसोलिडेशन, बैलेंसशीट रिपेयर और नए कैपिटल एलोकेशन डिसिप्लिन के दौर को देखा है.
दूसरा यह कि चेयरमैन को यह पक्का करना चाहिए कि कंपनी पर कोई कर्ज न हो. तीसरा यह कि उन्हें यह पक्का करना होगा कि ज्यादा रिस्क वाले इन्वेस्टमेंट में ज्यादा कैपिटल खर्च की वजह से कंपनी का खजाना खाली न हो. चौथा यह कि एयर इंडिया और बिग बास्केट जैसे एक्विजिशन से होने वाले नुकसान को कंट्रोल किया जाना चाहिए.
बोर्ड की रीअपॉइंटमेंट कमिटी की हेड अनीता जॉर्ज ने रीअपॉइंटमेंट के पक्ष में बात करते हुए कहा कि ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट्स में नुकसान की उम्मीद थी और उसका इंतजाम भी किया गया था.
वोटिंग का सुझाव
इसके बाद, जबकि बोर्ड मेंबर्स ने सुझाव दिया कि इस मामले को वोटिंग के लिए रखा जाए, चंद्रा ने कहा कि बेहतर होगा कि इस चर्चा को टाल दिया जाए, क्योंकि टाटा ग्रुप जैसी संस्था तभी काम कर सकती है जब टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स फैसले लेने में एकजुट हों.
इसके बाद, जबकि बोर्ड के सदस्यों ने सुझाव दिया कि इस मामले पर वोटिंग की जाए, चंद्रा ने कहा कि बेहतर होगा कि इस चर्चा को टाल दिया जाए, क्योंकि टाटा ग्रुप जैसी संस्था तभी काम कर सकती है जब टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स फैसले लेने में एकजुट हों.
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