बंद हुआ होर्मुज स्ट्रेट! भारत के पास अब भी 74 दिन का है तेल रिजर्व: रिपोर्ट

मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण अहम समुद्री तेल मार्ग पर संकट गहराया है. कई तेल कंपनियों ने शिपमेंट रोक दी है, जिससे ग्लोबल सप्लाई और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के पास 74 दिनों का रणनीतिक तेल भंडार मौजूद है.

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मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बदल रहे हैं. अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के सैन्य और बड़े ठिकानों पर हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है. इस सैन्य टकराव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. अब सबसे ज्यादा नजरें उस समुद्री रास्ते पर टिक गई हैं, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल से गुजरता है. ग्लोब आई न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ईरान ने आधिकारिक रूप में होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की घोषणा कर दी है.

लेकिन भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. India Today Global की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास 74 दिनों की घरेलू जरूरत पूरी करने लायक स्ट्रैटेजिक ऑयल रिजर्व मौजूद है. यानी अगर कुछ समय के लिए तेल आयात में रुकावट आती है तो भी देश में ऊर्जा खपत जारी रखने की व्यवस्था की गई है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आयात बाधित होने की स्थिति में सरकार के पास कंटिन्जेंसी प्लान तैयार हैं और पूर्वी व पश्चिमी दोनों बंदरगाहों से सप्लाई मैनेज करने की रणनीति बनाई गई है.

कच्चे तेल और फ्यूल की शिपमेंट पर लगा रोक

उधर रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान-इजराइल-अमेरिका टकराव के बीच कई बड़े ऑयल मेजर्स और ट्रेडिंग हाउस ने उस अहम समुद्री तेल मार्ग से कच्चे तेल और फ्यूल की शिपमेंट फिलहाल रोक दी है. यही वह रास्ता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है. खबरों के मुताबिक ईरान ने इस रास्ते को बंद कर दिया है, जिससे शिपमेंट पर अनिश्चितता बढ़ गई है.

रॉयटर्स को एक प्रमुख ट्रेडिंग डेस्क के अधिकारी ने बताया कि उनके जहाज फिलहाल आगे नहीं बढ़ेंगे और कुछ दिनों तक रुकेंगे. सुरक्षा चिंताओं और संभावित सैन्य गतिविधियों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. अगर यह हालात लंबे समय तक बने रहते हैं तो एशिया और यूरोप की कच्चे तेल की सप्लाई पर सीधा असर पड़ सकता है और कीमतों में अस्थिरता बढ़ सकती है.

तेल सप्लाई बाधित होने पर क्या हो सकता है?

अगर समुद्री तेल सप्लाई लंबे समय तक बाधित रहती है तो ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है. पहले भी क्षेत्रीय तनाव के दौरान तेल बाजार में अचानक तेजी आई है. आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति दोहरी चुनौती बन सकती है, जहां एक तरफ सप्लाई की चिंता होगी और दूसरी तरफ महंगे तेल का दबाव.

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