बजट में कहां से आता है पैसा और कहां खर्च करती है सरकार? जानें हर 1 रुपये का पूरा हिसाब-किताब
बजट सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि यह बताता है कि सरकार की कमाई के मुख्य स्रोत क्या हैं और जनता से जुटाया गया पैसा किन-किन मदों में खर्च होता है. बजट 2025-26 के आंकड़े साफ दिखाते हैं कि सरकार का हर 1 रुपया कहां से आता है और राज्यों, ब्याज, रक्षा, पेंशन और विकास योजनाओं में कैसे खर्च किया जाता है. आसान भाषा में समझिए सरकार के पूरे आर्थिक गणित को.
Budget Income and Expense: हर साल जब केंद्र सरकार बजट पेश करती है, तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि सरकार के पास पैसा आखिर आता कहां से है और उस पैसे का इस्तेमाल किन-किन मदों में किया जाता है. पिछले साल का बजट यानी बजट 2025-26 के आंकड़े भी यही कहानी बयां करते हैं कि सरकार की कमाई के मुख्य स्रोत क्या हैं और जनता से जुटाए गए हर 1 रुपये को कहां-कहां खर्च किया जाता है. आसान भाषा में समझें तो बजट सरकार का पूरा ‘आर्थिक रिपोर्ट कार्ड’ होता है, जिसमें इनकम और खर्च दोनों की साफ तस्वीर सामने आती है.
सरकार के पास पैसा कहां से आता है?
बजट 2025-26 में सरकार की आमदनी का सबसे बड़ा हिस्सा उधार और दूसरे लायबिलिटी से आता है. पिछले साल के सरकारी डेटा के मुताबिक, अगर सरकार के पास कुल 1 रुपया आता है तो उसमें 24 पैसे उधार और दूसरे लायबिलिटी से आते है. 22 पैसे इनटम टैक्स से आते हैं. इससे इतर, 18 पैसे गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स और दूसरे टैक्स से आते हैं. वहीं, कॉर्पोरेशन टैक्स से सरकार को 17 पैसे मिलते हैं. इसमें सबसे अहम योगदान आयकर और कॉरपोरेट टैक्स का होता है.
| स्रोत | प्रति 1 रुपये में हिस्सा |
|---|---|
| उधार व अन्य देनदारियां (Borrowings & Liabilities) | 24 पैसे |
| आयकर (Income Tax) | 22 पैसे |
| GST व अन्य अप्रत्यक्ष कर | 18 पैसे |
| कॉर्पोरेट टैक्स (Corporation Tax) | 17 पैसे |
| नॉन-टैक्स रेवेन्यू (डिविडेंड, ब्याज, फीस आदि) | 9 पैसे |
| अन्य स्रोत | 10 पैसे |
| कुल | 1 रुपया |
आम नागरिकों और कंपनियों से मिलने वाला इनकम टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स मिलकर कुल रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा बनाते हैं. इसके अलावा GST (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) से भी सरकार को भारी रकम मिलती है, जो रोजमर्रा की चीजों और सेवाओं पर लगने वाला अप्रत्यक्ष कर है. टैक्स के अलावा सरकार को नॉन-टैक्स रेवेन्यू भी मिलता है. इसमें सरकारी कंपनियों से मिलने वाला डिविडेंड, ब्याज से होने वाली आय, फीस, जुर्माना और अन्य सेवाओं से मिलने वाली रकम शामिल होती है. पिछले कुछ वर्षों में सरकारी कंपनियों से मिलने वाला डिविडेंड सरकार की आय का अहम जरिया बनकर उभरा है.
आंकड़े क्या कहते हैं?
समझने के लिए 1 रुपये की बात बताई गई है. अब असल आंकड़े की ओर चलते हैं. सरकार की ओर से जारी आंकड़ों की मानें तो पिछले साल सरकार को ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू से कुल 4270233 करोड़ रुपये मिले थे. इसमें CGST, UTGST, IGST शामिल हैं. इससे इतर, कॉर्पोरेशन टैक्स से सरकार को कुल 1082000 करोड़ रुपये मिले थे. आय पर होने वाले टैक्स के जरिये केंद्र को कुल 1438000 करोड़ रुपये मिले थे.
| कमाई का स्रोत | राशि (₹ करोड़) |
|---|---|
| ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू (CGST, IGST, UTGST समेत) | 42,70,233 |
| कॉर्पोरेट टैक्स | 10,82,000 |
| आयकर (Taxes on Income) | 14,38,000 |
| नॉन-टैक्स रेवेन्यू | (डिविडेंड, ब्याज, फीस आदि शामिल) |
सरकार पैसा कहां खर्च करती है?
अब सवाल आता है कि सरकार के पास आने वाला पैसा आखिर जाता कहां है. बजट 2025-26 के मुताबिक, सरकार का सबसे बड़ा खर्च राज्यों को टैक्स में हिस्सा देने में होता है. अगर सरकार पूरे साल में 1 रुपये खर्च करती है तो उसमें वह सबसे बड़ा हिस्सा यानी 22 पैसे राज्यों को टैक्स और ड्यूटी देने में चले जाते हैं. संविधान के तहत केंद्र सरकार को टैक्स से मिलने वाली रकम का एक बड़ा हिस्सा राज्यों को देना होता है, ताकि वे अपने विकास कार्यों और योजनाओं को चला सके.
| खर्च का मद | प्रति 1 रुपये में खर्च |
|---|---|
| राज्यों को टैक्स व ड्यूटी में हिस्सा | 22 पैसे |
| ब्याज भुगतान | 20 पैसे |
| केंद्र सरकार की योजनाएं व स्कीम्स | 16 पैसे |
| रक्षा (Defence) | 8 पैसे |
| पेंशन | 4 पैसे |
| अन्य खर्च | 30 पैसे |
| कुल | 1 रुपया |
इसके बाद बड़ा खर्च होता है ब्याज भुगतान पर. सरकार जो कर्ज लेती है, उस पर ब्याज चुकाना उसकी मजबूरी होती है. हर 1 रुपये में करीब 20 पैसे सिर्फ पुराने कर्ज के ब्याज में चले जाते हैं, जिससे साफ होता है कि बढ़ता कर्ज सरकार की वित्तीय सेहत पर कितना दबाव डालता है. इससे इतर, सरकार अपने तमाम स्कीम्स पर भी 16 पैसे खर्च करती है. रक्षा खर्च भी सरकार के खर्च का अहम हिस्सा है. देश की सुरक्षा, सेना के आधुनिकीकरण और रणनीतिक जरूरतों के लिए रक्षा बजट में बड़ा प्रावधान किया जाता है. इसके अलावा पेंशन पर भी अच्छी-खासी रकम खर्च होती है, जिसमें सशस्त्र बलों और सरकारी कर्मचारियों की पेंशन शामिल है.
आंकड़े क्या कहते हैं?
आंकड़े के मुताबिक, सरकार ने साल 2025-26 में सेंटर सेक्टर स्कीम्स और प्रोजेक्ट्स पर कुल 1621899 करोड़ रुपये खर्च किए. इससे इतर, पेंशन और डिफेंस में सरकार ने क्रमश: 276618 करोड़ रुपये और 491732 करोड़ रुपये खर्च करती है.
| खर्च का मद | राशि (₹ करोड़) |
|---|---|
| सेंटर सेक्टर स्कीम्स व प्रोजेक्ट्स | 16,21,899 |
| रक्षा खर्च (Defence) | 4,91,732 |
| पेंशन | 2,76,618 |
| ब्याज भुगतान | (लगभग कुल खर्च का 20%) |
| राज्यों को टैक्स में हिस्सा | सबसे बड़ा हिस्सा |
हर 1 रुपये का मतलब क्या है?
अगर आसान शब्दों में कहें, तो सरकार के पास आने वाले हर 1 रुपये में से बड़ा हिस्सा टैक्स से आता है और वही पैसा राज्यों, ब्याज भुगतान, रक्षा, पेंशन और विकास योजनाओं में खर्च हो जाता है. बजट 2025-26 यह दिखाता है कि सरकार एक तरफ विकास और कल्याण पर खर्च बढ़ाने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ कर्ज और ब्याज का बोझ भी लगातार बना हुआ है. कुल मिलाकर, बजट यह साफ करता है कि सरकार की कमाई और खर्च दोनों के बीच संतुलन बनाना कितना चुनौतीपूर्ण काम है. टैक्स से जुटाया गया पैसा सिर्फ सरकार की तिजोरी में नहीं रहता, बल्कि वह राज्यों, आम जनता की योजनाओं, सुरक्षा और देश की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में खर्च हो जाता है. यही वजह है कि बजट को देश की अर्थव्यवस्था की दिशा और सरकार की प्राथमिकताओं का सबसे बड़ा आईना माना जाता है.
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