ईरान यु्द्ध से इन 10 भारतीयों के बिजनेस पर संकट, कहलाते हैं UAE के सबसे अमीर इंडियन, दुबई से लेकर अबू धाबी तक है जलवा
इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध से मिडिल ईस्ट में अस्थिरता गहरा गई है. इस तनाव का असर UAE में बड़े कारोबार करने वाले भारतीय उद्योगपतियों पर भी पड़ रहा है. रिटेल, रियल एस्टेट, हेल्थकेयर और एजुकेशन सेक्टर से जुड़े यूसुफ अली, मिक्की जगतियानी, पीएनसी मेनन और दूसरे दिग्गजों के बिजनेस पर अनिश्चितता का खतरा मंडरा रहा है.
इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने पूरे मिडिल ईस्ट में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है. हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि पूरे मिडिल ईस्ट में अलर्ट जारी है. हवाई यातायात प्रभावित है और ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का दावा किया है. यह वही समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया की बड़ी तेल सप्लाई गुजरती है. यूएई जैसे देशों की अर्थव्यवस्था ट्रेड, रिटेल, रियल एस्टेट, हेल्थकेयर और एजुकेशन पर टिकी है. ऐसे में वहां बड़े स्तर पर कारोबार करने वाले भारतीय मूल के अरबपतियों के बिजनेस पर भी दबाव बन सकता है. आइए जानते हैं इन 10 बड़े भारतीय बिजनेसमैन के बारे में, जिनका नाम UAE के सबसे अमीर भारतीयों में लिया जाता है.
Yusuff Ali M.A.
एमए यूसुफ अली लूलू ग्रुप के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. उनका ग्रुप अबू धाबी मुख्यालय से रिटेल कारोबार चलाता है. लूलू हाइपरमार्केट और शॉपिंग मॉल की चेन पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैली है. साल 2025 में फोर्ब्स ने इन्हें दुनिया के 100 सबसे अमीर बिजनेसमेन की कैटेगरी में नामित किया. रिपोर्ट के मुताबिक उनकी कुल संपत्ति 7.4 अरब डॉलर है. उन्हें “मिडिल ईस्ट रिटेल किंग” भी कहा जाता है. अगर युद्ध के कारण सप्लाई चेन, इंपोर्ट और कस्टमर फुटफॉल प्रभावित होते हैं तो रिटेल सेक्टर पर दबाव बढ़ सकता है.
Micky Jagtiani
मिक्की जगतियानी लैंडमार्क ग्रुप के संस्थापक थे. उनका निधन मई 2023 में हुआ. लैंडमार्क ग्रुप के 24 देशों में 2,200 से ज्यादा स्टोर हैं. साल 2023 में फोर्ब्स ने उनकी टोटल नेटवर्थ उनके निधन से पहले करीब 5.2 अरब डॉलर बताई. रिटेल नेटवर्क बड़ा होने के कारण क्षेत्रीय अस्थिरता का असर इस तरह के कारोबार पर सीधा पड़ सकता है.
B. R. Shetty
डॉ. बीआर शेट्टी UAE Exchange और NMC हेल्थकेयर के संस्थापक हैं. उनका कारोबार बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विस और हेल्थकेयर से जुड़ा रहा है. साल 2029 में फोर्ब्स ने उनकी नेटवर्थ 4.2 अरब डॉलर बताई. अगर युद्ध के कारण विदेशी निवेश और वित्तीय लेनदेन प्रभावित होते हैं तो इस सेक्टर पर भी दबाव बन सकता है.
P. N. C. Menon
पीएनसी मेनन सोभा ग्रुप के संस्थापक हैं. उनका रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन बिजनेस UAE, ओमान, बहरीन और भारत तक फैला है. फोर्ब्स के अनुसार अप्रैल 2024 तक उनकी नेटवर्थ 2.8 अरब डॉलर रहा. युद्ध की स्थिति में रियल एस्टेट निवेश और प्रोजेक्ट लॉन्च प्रभावित हो सकते हैं.
Sunny Varkey
सनी वर्की GEMS एजुकेशन के फाउंडर हैं. यह दुनिया की सबसे बड़ी प्राइवेट K-12 स्कूल ऑपरेटर कंपनी मानी जाती है. 2025 की शुरुआत तक उनकी नेटवर्थ करीब 3.8 से 4 अरब डॉलर आंकी गई है. क्षेत्र में अस्थिरता होने पर अंतरराष्ट्रीय छात्रों और स्कूल ऑपरेशन पर असर पड़ सकता है.
Azad Moopen
डॉ. आजाद मूपेन Aster DM हेल्थकेयर के संस्थापक हैं. उनका हेल्थकेयर नेटवर्क मिडिल ईस्ट और भारत में फैला है. साल 2024–2025 के अनुमान के मुताबिक उनकी नेटवर्थ करीब 1 अरब डॉलर है. हेल्थ सेक्टर जरूरी सेवाओं में आता है, लेकिन क्षेत्रीय तनाव से ऑपरेशनल लागत बढ़ सकती है.
Rizwan Sajan
मुंबई में जन्मे रिजवान साजन Danube Group के चेयरमैन हैं. रियल एस्टेट और बिल्डिंग मटेरियल में उनका बड़ा कारोबार है. फोर्ब्स के मुताबिक, उनकी नेटवर्थ करीब 2.5 अरब डॉलर है. प्रॉपर्टी बाजार में अनिश्चितता से मांग प्रभावित हो सकती है.
Syed Mohammad Salahuddin
सैयद मोहम्मद सलाहुद्दीन ETA Ascon & Star Group के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. कंपनी रियल एस्टेट, कंस्ट्रक्शन और इंजीनियरिंग में एक्टिव है. इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट अक्सर सरकारी और निजी निवेश पर निर्भर होते हैं, ऐसे में क्षेत्रीय संकट से नए प्रोजेक्ट प्रभावित हो सकते हैं.
Rajen Kilachand
राजेन किलाचंद Dodsal Group के चेयरमैन और प्रेसिडेंट हैं. यह कंपनी इंजीनियरिंग, माइनिंग, ट्रेडिंग और हॉस्पिटैलिटी में काम करती है. हालांकि उनकी सटीक नेटवर्थ सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, लेकिन उन्हें अरब वर्ल्ड के प्रमुख भारतीय बिजनेस लीडर्स में गिना जाता है. बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर संकट का असर पड़ सकता है.
Mohan G. Valrani
मोहन वालरानी Al Shirawi Group के वरिष्ठ वाइस चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. ग्रुप मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग, ट्रेडिंग और सर्विस सेक्टर में काम करता है. उनकी नेटवर्थ सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं है, लेकिन UAE में भारतीय उद्योगपतियों की टॉप लिस्ट में उनका नाम शामिल रहता है. औद्योगिक और सप्लाई सेक्टर पर युद्ध का असर पड़ सकता है.
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