India-US ट्रेड डील के बाद किन प्रोडक्ट्स पर 0, किन पर 25% और किन पर बना रहेगा 50% टैरिफ? यहां जानें डिटेल
भारत-अमेरिका ट्रेड डील से भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है. अमेरिका ने कुल प्रभावी टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया है. हालांकि स्टील, एल्युमिनियम और कुछ ऑटो सेक्टर्स पर ऊंचे टैरिफ बने रहेंगे. आइये जानते हैं कि अमेरिका अब भी किन प्रोडक्ट्स पर जीरो, किन पर 25% और किन पर 50% टैरिफ लेगा.
India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (India–US Trade Agreement) की औपचारिक घोषणा के बाद भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है. इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर प्रस्तावित 25 प्रतिशत के रेसीपोकल टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है. इसके साथ ही 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ भी पूरी तरह हटा लिया गया है. इसका सीधा असर यह हुआ है कि कई भारतीय उत्पादों पर कुल प्रभावी टैरिफ 50 प्रतिशत से घटकर अब 18 प्रतिशत रह गया है. हालांकि, अमेरिका ने सेक्शन 232 के तहत जिन उत्पादों पर राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर टैरिफ लगाया गया है वे अब भी ऊंचे टैरिफ के दायरे में रहेंगे. आइये जानते हैं कि अमेरिका अब भी किन प्रोडक्ट्स किन पर 25% और किन पर 50% टैरिफ लेगा.
इन चीजों पर अब भी बना रह सकता है 50% टैरिफ
इस घोषणा से सभी सेक्टर्स को समान राहत नहीं मिली है. अमेरिका के सेक्शन 232 के तहत जिन उत्पादों पर राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर शुल्क लगाया गया है, वे अब भी ऊंचे टैरिफ के दायरे में बने रहेंगे. स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर जैसे मेटल्स के भारतीय निर्यात पर अमेरिका में अब भी 50 प्रतिशत तक का टैरिफ लागू रह सकता है. बजाज ब्रोकिंग के अनुसार, इन सेक्टर्स में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के बावजूद टैरिफ छूट मिलने की संभावना आमतौर पर कम रहती है.
इन सेक्टर पर 25% टैरिफ
इसके अलावा ऑटो सेक्टर से जुड़े कुछ चुनिंदा ऑटो कंपोनेंट्स पर 25 प्रतिशत का टैरिफ जारी रह सकता है. यह उन कंपनियों के लिए चुनौती बना रहेगा, जिनका अमेरिकी बाजार पर बड़ा निर्भरता है.
इन पर जीरो टैरिफ
दूसरी ओर, कई अहम सेक्टर्स को पूरी राहत दी गई है. फार्मास्यूटिकल्स, एयरक्राफ्ट और उनके पार्ट्स, स्मार्टफोन्स, साथ ही कुछ मैकेनिकल और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स पर अमेरिका में पहले की तरह जीरो टैरिफ लागू रहेगा.
इन सेक्टर को फायदा
बजाज ब्रोकिंग का मानना है कि इस समझौते से टेक्सटाइल्स और अपैरल, जेम्स एंड ज्वैलरी, इंजीनियरिंग गुड्स, केमिकल्स, लेदर और फुटवियर जैसे सेक्टर्स को सबसे ज्यादा फायदा होगा. इसके साथ ही एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड एग्रीकल्चर और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े कारोबारों की कमाई में स्थिरता आने की उम्मीद है. आईटी सर्विसेज और फार्मा सेक्टर में भी निकट अवधि में रिकवरी को सपोर्ट मिल सकता है.
एशियाई देशों पर कितना है टैरिफ
ब्रोकरेज फर्म Bajaj Broking के मुताबिक, यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए “सिग्निफिकेंट रिलीफ” लेकर आया है. बजाज ब्रोकिंग का कहना है कि अमेरिका द्वारा तय किया गया 18 प्रतिशत का अंतिम टैरिफ रेट कई एशियाई देशों की तुलना में कम है. उदाहरण के तौर पर बांग्लादेश और श्रीलंका के लिए यह दर 20 प्रतिशत, पाकिस्तान के लिए 19 प्रतिशत और थाईलैंड के लिए भी 19 प्रतिशत तय की गई है. ऐसे में वैश्विक व्यापार में भारत को एक अपेक्षाकृत बेहतर और अनुकूल स्थिति मिलती दिखाई दे रही है.




