कौन है ₹1,825 करोड़ के GST घोटाले का मास्टरमाइंड कपिल चुग? जिसे पकड़ने के लिए DGGI को बिछाना पड़ा जाल
₹1,825 करोड़ के GST रिफंड घोटाले के आरोपी कपिल चुग को DGGI ने दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया. 22 समन के बाद भी फरार यह मास्टरमाइंड दुबई में छिपा था. फर्जी कंपनियों और इनवॉइस के जरिए उसने सरकार को बड़ा चूना लगाया था.
सरकारी खजाने में सेंध लगाने वाले शातिर दिमाग और ‘इकोनॉमिक ऑफेंडर’ कपिल चुग की फरारी आखिरकार खत्म हुई. ₹1,825 करोड़ के बड़े जीएसटी (GST) रिफंड घोटाले के मुख्य आरोपी कपिल चुग को डीजीजीआई (DGGI) की अहमदाबाद जोनल यूनिट ने दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार कर लिया है. वह दुबई से लौट रहा था, तभी अधिकारियों ने उसे दबोच लिया.
कपिल चुग कोई साधारण जालसाज नहीं है, बल्कि वह कॉम्प्लेक्स कॉरपोरेट स्ट्रक्चर बनाकर बैंकों और सरकार को चूना लगाने में माहिर माना जाता है. आइए जानते हैं आखिर कौन है यह शख्स और कैसे घोटाले से इसने इतना बड़ा साम्राज्य खड़ा किया.
22 समन के बाद भी नहीं आया हाथ, दुबई में था ठिकाना
कपिल चुग की चालाकी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जांच एजेंसियों ने उसे एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 22 समन जारी किए थे. लेकिन हर बार वह जांच से बचता रहा और आखिरकार देश छोड़कर दुबई भाग गया. वह लंबे समय से डीजीजीआई की रडार पर था. जांच एजेंसियां उसके हर मूवमेंट पर नजर रखें हुए थी और आखिरकार दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर उसे ‘इंटरसेप्ट’ किया गया. कपिल चुग की गिरफ्तारी तब संभव हो पाई जब वह विदेश से भारत लौटा.
कैसे दिए ₹1,825 करोड़ के घोटाले को अंजाम?
जांच में सामने आया है कि कपिल चुग और उसका साथी विपिन शर्मा मिलकर एक हाई-टेक नेटवर्क चला रहे थे. पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके काम करने का तरीका कुछ इस प्रकार था:
- फर्जी कंपनियों का जाल: कपिल ने डमी फर्म्स का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया था. ये कंपनियां सिर्फ कागजों पर थीं. इनके पास न तो कोई दफ्तर था, न कर्मचारी और न ही कोई वास्तविक व्यापार.
- KYC का खेल: इन कंपनियों को बनाने के लिए गरीब या अनजान लोगों के आधार और पैन कार्ड (KYC) का इस्तेमाल किया गया. इन ‘नाममात्र के मालिकों’ को हर महीने फिक्स्ड कैश देकर चुप रखा जाता था.
- फेक इनवॉइस और ITC: बिना किसी माल की सप्लाई के करोड़ों रुपये के फर्जी बिल (Invoices) बनाए गए. खासकर तंबाकू उत्पादों के महंगे बिल दिखाकर भारी-भरकम इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) जेनरेट किया गया.
- एक्सपोर्ट के नाम पर रिफंड: इस फर्जी ITC को कई कंपनियों के बीच घुमाया गया और अंत में ऐसी कंपनियों के पास भेजा गया जो खुद को एक्सपोर्टर दिखाती थीं (खासकर कांडला सेज – KASEZ में). फिर ‘जीरो-रेटेड सप्लाई’ के नाम पर सरकार से ₹1,825 करोड़ का रिफंड नकद में वसूल लिया गया.
बैंकों को भी लगाया करोड़ों का चूना
कपिल चुग का हाथ सिर्फ जीएसटी चोरी तक ही सीमित नहीं था. उसने अपने एक्सपोर्ट बिजनेस का टर्नओवर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया और येस बैंक (Yes Bank) से करीब ₹11 करोड़ की धोखाधड़ी की. इतना ही नहीं, सीबीआई (CBI) भी उसके खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के जरिए क्रेडिट सुविधाएं लेने के मामले में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है.
सेबी (SEBI) की रडार पर भी था यह ग्रुप
इस पूरे खेल में कपिल का साथी विपिन शर्मा (MD, Elitecon) भी शामिल था. सेबी ने भी 30 मार्च को एक आदेश जारी कर विपिन शर्मा के खिलाफ कार्रवाई की है. उन पर आरोप है कि उन्होंने जीएसटी धोखाधड़ी से जुड़े फर्जी टर्नओवर के जरिए अपनी कंपनी की वैल्यूएशन को गलत तरीके से बढ़ाया था.
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मास्टरमाइंड की प्रोफाइल
वित्त मंत्रालय ने कपिल चुग को एक ‘आदतन आर्थिक अपराधी’ (Habitual Economic Offender) करार दिया है. अधिकारियों का कहना है कि उसका पूरा करियर ही ऐसी कॉम्प्लेक्स वित्तीय संरचनाएं तैयार करने में बीता है जिनका एकमात्र उद्देश्य सरकारी राजस्व और बैंकिंग प्रणाली को नुकसान पहुंचाना था.
फिलहाल, कपिल चुग सलाखों के पीछे है और जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क के अन्य गुर्गों और इस घोटाले में शामिल अन्य कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं.
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