मुंबई हमले के मास्टमाइंड तहव्वुर राणा की नागरिकता होगी रद्द! कनाडा उठाएगा बड़ा कदम, भारत आ रहे हैं PM कार्नी
कनाडा सरकार ने 26/11 मुंबई टेरर अटैक के मास्टरमाइंड आतंकी तहव्वुर हुसैन राणा की नागरिकता रद्द करने की कार्रवाई शुरू कर दी है. यह कदम कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के 26 फरवरी को भारत दौरे से पहले उठाया गया है. बई हमलों में करीब 166 लोगों की मौत हुई थी.
2008 के मुंबई आतंकी हमले में अहम भूमिका निभाने के आरोपी पाकिस्तानी मूल के कारोबारी आतंकवादी तहव्वुर हुसैन राणा के खिलाफ कनाडा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा से पहले यह बड़ा कदम है, जिसके बाद इस मामले ने एक बार फिर से इंटरनेशनल लेवल पर चर्चा का विषय बन गया है.
26/11 मुंबई टेरर अटैक का मास्टरमाइंड राणा पाकिस्तान में जन्मा कनाडाई नागरिक है. वह 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के प्रमुख साजिशकर्ताओं में से एक डेविड कोलमैन हेडली उर्फ दाऊद गिलानी का करीबी सहयोगी रहा है. हेडली अमेरिकी नागरिक है.
नागरिकता रद्द करने का आधार क्या है?
राणा को अप्रैल 2025 में अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित किया गया. नई दिल्ली पहुंचते ही उन्हें राष्ट्रीय जांच एजेंसी National Investigation Agency ने गिरफ्तार किया. बता दें मुंबई हमलें में 166 लोगों की मौत हुई थी. बिजनेस स्टेंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा के इमिग्रेशन अधिकारियों ने राणा को सूचित किया है कि उनकी नागरिकता रद्द की जा सकती है. कनाडा के इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप विभाग Immigration, Refugees and Citizenship Canada ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई आतंकवाद के आरोपों के कारण नहीं, बल्कि कथित गलत जानकारी देने के आधार पर की जा रही है.
रिफ्यूजी और सिटिजनशिप कनाडा (IRCC0 के दस्तावेजों में कहा गया है कि राणा ने नागरिकता आवेदन के दौरान अपने कनाडा में निवास से जुड़ी जानकारी में गंभीर और जानबूझकर धोखा दिया. अधिकारियों का आरोप है कि उसने आवेदन में दावा किया था कि वे ओटावा और टोरंटो में रह रहा था, जबकि जांच में उनका अधिकांश समय शिकागो में बिताना सामने आया.
जांच में क्या सामने आया ?
31 मई, 2024 के एक लेटर में IRCC ने राणा को बताया कि उसकी कही गई गलत जानकारी ने फैसला लेने वालों को नागरिकता देने में गुमराह किया है. जबकि ऐसा लग रहा था कि वह एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया को पूरा नहीं करता था. यह मामला अब कनाडा के फेडरल कोर्ट को भेज दिया गया है. उसके पास यह तय करने का आखिरी अधिकार है कि नागरिकता गलत जानकारी, धोखाधड़ी या जरूरी बातें छिपाकर हासिल की गई थी या नहीं.
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