ट्रेन ड्राइवर को नहीं मिलेगा खाने और शौच का ब्रेक, जानें रेलवे ने क्यों ठुकरा दी यह मांग
पिछले कुछ समय में कई रेल दुर्घटनाएं देखने को मिली हैं और हाल के दिनों में इनमें बढ़ोतरी हुई है. अब रेलवे ने लोको पायलटों को लेकर बड़ा फैसला लिया है. उन्हें ड्यूटी के दौरान भोजन करने और शौच के लिए ब्रेक नहीं मिलेगा. इसके अलावा, हाई स्पीड ट्रेन की परिभाषा भी बदल दी गई है.
Indian Railways: इंडियन रेलवे ने लोको पायलटों की लंबे समय से चली आ रही उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें ड्यूटी के दौरान उन्हें भोजन करने और शौच के लिए ब्रेक देने की बात कही जा रही थी. रेलवे बोर्ड ने एक उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए कहा है कि भोजन और शौच के लिए ब्रेक देने से ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ेगा. साथ ही, यह भी माना गया है कि इससे ट्रेनों की आवाजाही में बाधा आ सकती है.
बढ़ती रेल दुर्घटनाओं के बीच लिया गया फैसला
पिछले कुछ समय में कई ट्रेनें दुर्घटना का शिकार हो चुकी हैं. आम तौर पर इनमें मानवीय भूल को ही जिम्मेदार ठहराया गया है. इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने यह फैसला लिया है. साथ ही, रेलवे ने ट्रेन के ड्राइवर के केबिन में आवाज और वीडियो रिकॉर्ड करने वाले सिस्टम लगाने के निर्णय का भी बचाव किया है. रेलवे का कहना है कि यह ड्राइवर्स की प्राइवेसी का उल्लंघन नहीं है. उनका मानना है कि यह सिस्टम दुर्घटना की जांच के समय चालक दल की मदद करेगा.
ट्रेनों की स्पीड लिमिट भी बढ़ाई गई
रेलवे बोर्ड के पांच कार्यकारी निदेशकों और रेलवे की शोध शाखा Research Designs and Standards Organisation (RDSO) की समिति की सिफारिशों पर हाई-स्पीड ट्रेनों की परिभाषा को 110 किमी प्रति घंटा से बढ़ाकर 130 किमी प्रति घंटा कर दिया गया है. पहले 110 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक स्पीड वाली ट्रेनों को “हाई-स्पीड” कहा जाता था, जिसे अब बढ़ाकर 130 किमी प्रति घंटा कर दिया गया है.
मिलेगा सहायक लोको पायलट
समिति ने यह भी सिफारिश की है कि यदि कोई ट्रेन 200 किमी प्रति घंटे या उससे अधिक दूरी तय करने वाली मेनलाइन इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (MEMU) है, तो उसमें एक सहायक लोको पायलट तैनात किया जाना चाहिए.
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फैसले की हो रही आलोचना
All India Loco Running Staff Association (AILRSA) ने रेलवे के इस फैसले की आलोचना की है. AILRSA के सेक्रेटरी के. सी. जेम्स ने रेलवे बोर्ड को लिखे पत्र में कहा है कि स्पीड बढ़ने से ड्राइवर्स पर दबाव बढ़ेगा, लेकिन रेलवे ने इसका मूल्यांकन नहीं किया है. उनका कहना है कि ट्रेन में शौचालय नहीं होने के बावजूद रेलवे ने ड्राइवर्स को ब्रेक देने से मना कर दिया है, जो पूरी तरह गलत है.
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