PM Modi-Xi Jinping SCO Meet: भारत-चीन साझेदारी पर जोर, शी जिनपिंग ने दिए 4 अहम सुझाव; कहा मजबूत होंगे रिश्ते
SCO शिखर सम्मेलन 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मुलाकात की. दोनों नेताओं ने कहा कि भारत और चीन “साझेदार हैं, प्रतिद्वंदी नहीं” और साझा हित मतभेदों से कहीं बड़े हैं. बैठक में सीमा विवाद, सीमा-पार आतंकवाद, द्विपक्षीय व्यापार, निवेश, सांस्कृतिक रिश्तों और एशियाई सदी के सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई.

PM Modi and President Xi Jinping SCO: शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान तियानजिन (चीन) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच रविवार को अहम बातचीत हुई. इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने जोर दिया कि भारत और चीन “साझेदार हैं, प्रतिद्वंदी नहीं” और दोनों देशों के साझा हित, मतभेदों से कहीं बड़े हैं. इससे इतर, अमेरिका के लिए इन दो दिग्गज नेताओं का एक मंच पर साथ आना और मिलना कई बड़े संकेत भी देता है. इस मुलाकात के बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रेस रिलीज के जरिये कई बातें साझा की है. आइए विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं.
घरेलू विकास और साझेदारी पर सहमति
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बातचीत की जानकारी देते हुए बताया कि दोनों नेताओं ने यह माना कि भारत और चीन की प्राथमिकता अपने-अपने घरेलू विकास लक्ष्य हैं. उन्होंने कहा कि स्थिर और अच्छे रिश्ते 2.8 अरब लोगों के लिए लाभकारी होंगे. दोनों देशों ने सहमति जताई कि मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए. इससे इतर, दोनों नेताओं ने इस बात को भी स्वीकार किया कि भारत और चीन का सहयोग “एशियाई सदी” को आकार देने और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है.
आतंकवाद पर चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी ने सीमा-पार आतंकवाद का मुद्दा उठाया और कहा कि यह भारत और चीन दोनों के लिए गंभीर खतरा है. उन्होंने इस मामले में एक-दूसरे को समर्थन और समझ देने की जरूरत पर जोर दिया. मिस्री ने कहा कि चीन ने SCO सम्मेलन के संदर्भ में भारत के आतंकवाद-विरोधी प्रयासों को समझा और सहयोग दिया. बातचीत में सीमा मुद्दा भी उठा. मिस्री ने बताया कि दोनों नेताओं ने पिछले साल हुई सफल डिसएंगेजमेंट और उसके बाद सीमा पर बनी शांति को सकारात्मक माना.
पीएम मोदी ने साफ कहा कि सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता से ही द्विपक्षीय रिश्तों का विकास संभव है. दोनों देशों ने सीमा विवाद का समाधान न्यायसंगत, उचित और दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य तरीके से निकालने की प्रतिबद्धता जताई. साथ ही यह भी कहा कि व्यापार, लोगों के बीच रिश्ते, ट्रांस-बॉर्डर नदियों पर सहयोग और आतंकवाद से लड़ाई जैसे मुद्दों पर आगे प्रगति की जाएगी.
शी जिनपिंग के चार सुझाव
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रिश्तों को मजबूत करने के लिए चार सुझाव दिए-
- रणनीतिक संवाद और आपसी भरोसा बढ़ाना.
- आपसी आदान-प्रदान और सहयोग बढ़ाना.
- साझा हितों के लिए “विन-विन” परिणाम लाना.
- बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत कर साझा हितों की रक्षा करना.
प्रधानमंत्री मोदी ने इन सुझावों का सकारात्मक स्वागत किया. दोनों नेताओं ने माना कि भारत और चीन की अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक व्यापार को स्थिर करने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं. उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार घाटा कम करने, निवेश को बढ़ावा देने और नीति पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जरूरत पर बल दिया. मोदी ने कहा कि भारत-चीन संबंध “आपसी भरोसे, सम्मान और संवेदनशीलता” पर आधारित होंगे. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन रिश्तों को किसी “तीसरे देश की नजर से” नहीं देखा जाना चाहिए.
लोगों के बीच रिश्ते और सांस्कृतिक जुड़ाव
मीटिंग में यह भी सहमति बनी कि कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू की जाएगी. साथ ही सीधी उड़ानों और वीजा प्रक्रियाओं को आसान बनाकर लोगों के बीच संपर्क और मजबूत किया जाएगा. मोदी ने शी को 2026 में भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया, जिसे शी ने स्वीकार कर लिया. इससे इतर, सोशल मीडिया पर पीएम मोदी ने इस मुलाकात को “फलदायी” बताया. उन्होंने कहा, “हमने कजान में हुई पिछली मुलाकात के बाद से रिश्तों में आई सकारात्मक गति की समीक्षा की. हमने सीमा पर शांति बनाए रखने की अहमियत दोहराई और इस बात पर सहमति जताई कि हमारे रिश्ते आपसी सम्मान, हित और संवेदनशीलता पर आधारित रहेंगे.”
पीएम मोदी की मुलाकात Cai Qi से
प्रधानमंत्री मोदी ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की पोलितब्यूरो स्थायी समिति के सदस्य Cai Qi से भी मुलाकात की. मूल रूप से चीनी पक्ष ने उनके लिए भोज का प्रस्ताव रखा था, लेकिन कार्यक्रम की व्यस्तता के कारण यह संभव नहीं हो पाया. इसके बजाय एक संक्षिप्त बैठक रखी गई. इस मुलाकात में मोदी ने भारत-चीन रिश्तों के भविष्य को लेकर अपना विजन साझा किया और काई से समर्थन मांगा. काई ने कहा कि चीन भारत के साथ आदान-प्रदान और सहयोग बढ़ाना चाहता है और दोनों नेताओं के बीच बनी सहमति को आगे ले जाएगा.
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