सरकार लगाएगी दो मेगा पनडुब्बी डील पर मुहर, इस कंपनी की होने वाली है मौज; जानें लॉन्ग टर्म में क्यों रखें स्टॉक पर नजर
भारत अगले साल के मध्य तक एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की दो मेगा पनडुब्बी डील पर मुहर लगाने की तैयारी में है, जिससे देश की अंडरवाटर वॉरफेयर क्षमता और मजबूत होगी. स्कॉर्पीन पनडुब्बियों और प्रोजेक्ट 75I के तहत बनने वाली स्टील्थ पनडुब्बियों में मझगांव डॉक लिमिटेड (MDL) की प्रमुख भूमिका रहेगी. इस सौदे से कंपनी को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है, वहीं निवेशकों के लिए भी यह लॉन्ग टर्म में फायदे का सौदा साबित हो सकता है.

Mazagon Dock Shipbuilders: चीन की बढ़ती नौसैनिक ताकत के मद्देनजर भारत अगले साल के मध्य तक एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की दो मेगा पनडुब्बी डीलों पर मुहर लगाने की तैयारी में है. पीटीआई ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से रविवार को बताया कि इन सौदों का उद्देश्य देश की अंडरवाटर वॉरफेयर क्षमताओं को मजबूत करना है. इस डील में सबसे ज्यादा फायदा मझगांव डॉक लिमिटेड (एमडीएल) को होने वाला है. ऐसे में निवेशक लंबे समय में इस कंपनी पर नजर रख सकते हैं, जिससे आने वाले दिनों में बेहतर फायदा की उम्मीद की जा रही है. तो चलिए आपको बताते हैं इस डील के बारे में, साथ ही जानेंगे इससे मझगांव डॉक लिमिटेड को कैसे फायदा होने वाला है.
स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के डील पर अंतिम चरण
पहला प्रोजेक्ट तीन स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों के प्रोक्योरमेंट के लिए है, जिनका निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र की मझगांव डॉक लिमिटेड (एमडीएल) और फ्रांस की प्रमुख रक्षा कंपनी नेवल ग्रुप मिलकर करेंगे. सूत्रों ने बताया कि रक्षा मंत्रालय ने लगभग 36,000 करोड़ रुपये के इस सौदे को दो साल पहले मंजूरी दे दी थी, लेकिन परियोजना के विभिन्न तकनीकी और वाणिज्यिक पहलुओं को अंतिम रूप देने की वार्ता में देरी हुई है.
दूसरे प्रोजेक्ट पर 65,000 करोड़ रुपये की लागत
दूसरा प्रोजेक्ट प्रोजेक्ट 75 India (P75-I) के तहत लगभग 65,000 करोड़ रुपये की लागत वाली छह डीजल-इलेक्ट्रिक स्टील्थ पनडुब्बियों का अधिग्रहण है. इस प्रोक्योरमेंट को वर्ष 2021 में मंत्रालय द्वारा मंजूरी दी गई थी. इस प्रोजेक्ट के लिए जर्मन शिपबिल्डर थाइसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) ने मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के साथ साझेदारी की है. इसे हाल के वर्षों में ‘मेक इन इंडिया’ की सबसे बड़ी पहलों में से एक करार दिया गया है.
अगले साल के मध्य तक की समयसीमा
एक सूत्र ने कहा, “हम उम्मीद कर रहे हैं कि दोनों अनुबंध अगले साल के मध्य तक अंतिम रूप से पक्के हो जाएंगे.” सूत्रों ने कहा कि सौदे की लागत पर बातचीत जल्द शुरू होगी और अनुबंध तय होने से पहले पूरी प्रक्रिया में छह से नौ महीने का समय लग सकता है.
निर्माता कंपनी की तैयारियां
यह पूछे जाने पर कि क्या मझगांव डॉक लिमिटेड के पास दोनों परियोजनाओं को एक साथ लागू करने की कैपिब्लिटी होगी, तो सूत्रों ने कहा कि यह शिपबिल्डर पर है कि वह अपने इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करे. एक सूत्र ने कहा, “स्कॉर्पीन पनडुब्बी परियोजना में पहले ही बहुत देरी हुई है और हमें उम्मीद है कि इसे जल्द ही अंतिम रूप दे दिया जाएगा.”
मझगांव डॉक लिमिटेड रहेगा फोकस में
अगर भारत अपनी समुद्री युद्ध क्षमताओं को बढ़ाने के लिए अगले साल के मध्य तक एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के दो बड़े पनडुब्बी सौदे करता है तो ऐसे में सबसे ज्यादा फायदा मझगांव डॉक लिमिटेड को होने वाला है. दोनों ही डील में इस कंपनी की अहम भूमिका रहने वाली है. ऐसे में निवेशकों को इस पर नजर बनाए रखना फायदे का सौदा साबित हो सकता है.
शुक्रवार को मझगांव डॉक लिमिटेड के शेयर में 0.95 फीसदी की गिरावट आई है. इस गिरावट के बाद इसका शेयर 2603.10 रुपये पर पहुंच गया है. 1,05,119 करोड़ रुपये मार्केट कैप वाली इस कंपनी का शेयर पिछले एक साल में 22.50 फीसदी का रिटर्न दिया है.
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डिस्क्लेमर: मनी9लाइव किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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